क्या सीढ़ियां चढ़ते समय आपको भी सांस फूलने लगती है? मॉर्निंग वॉक का समय कम हो गया है और बाजार जाने में भी पहले से ज्यादा थकान महसूस होती है? अक्सर लोग इन बदलावों को बढ़ती उम्र का असर मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन सावधान, अगर आपको ऐसी दिक्कतें अक्सर होने लगी हैं और इसके कारण रोजमर्रा का कामकाज भी प्रभावित होने लगा है तो एक बार डॉक्टर से मिलकर इसकी जांच जरूर करा लें। कई बार इस तरह की दिक्कतें दिल की किसी बीमारी का संकेत हो सकती हैं।
डॉक्टर कहते हैं, 45 की उम्र के बाद शारीरिक क्षमता में लगातार आ रही गिरावट को हल्के में लेना ठीक नहीं है। कार्डियोलॉजिस्ट के मुताबिक, कई बार हार्ट वॉल्व की बीमारी धीरे-धीरे बढ़ती है और हम अपनी दिनचर्या बदलकर इसके लक्षणों के साथ जीना सीख लेतें है। ऐसी स्थितियों में डॉक्टर एक्टिविटी ऑडिट की सलाह देते हैं।
आइए जानते हैं कि कब सेहत में दिखने वाले इस तरह के बदलावों को लेकर अलर्ट हो जाना चाहिए।
शारीरिक क्षमता में कमी को न करें अनदेखा
कार्डियोलॉजिस्ट डॉ नितिन प्रकाश बताते हैं, शारीरिक क्षमता में कमी और छोटी-छोटी परेशानियों को अनदेखा नहीं करना चाहिए।
अगर आप भी कुछ समय से ताकत में कमी महसूस कर रहे हैं, तो अपनी रोजमर्रा की गतिविधियों आकलन करें, इसे एक्टिविटी ऑडिट कहा जाता है। इसका मतलब है कि आप अपनी शारीरिक क्षमता की तुलना करें। केवल यह न देखें कि आपको कोई बीमारी महसूस हो रही है या नहीं, बल्कि यह भी सोचें कि कुछ साल पहले आप जितने आराम से काम कर लेते थे, क्या आज भी उतनी ही आसानी से कर पाते हैं?
हार्ट वॉल्व की समस्या के शुरुआती संकेत क्या हैं?
दिल में चार वॉल्व (वाल्व) होते हैं, जो खून को सही दिशा में बहने में मदद करते हैं। ये वॉल्व खून को आगे जाने देते हैं और उसे पीछे लौटने से रोकते हैं। जब इनमें से किसी वॉल्व में खराबी आ जाती है, तो इसे हार्ट वॉल्व डिजीज कहा जाता है। इस बीमारी से जूझ रहे लोगों में कई तरह की दिक्कतें हो सकती हैं।
- पैदल चलने, सीढ़ियां चढ़ने या थोड़ा शारीरिक काम करने पर भी सांस लेने में परेशानी होना।
- बिना ज्यादा काम किए ही बहुत थक जाना या रोजमर्रा के कामों में ऊर्जा की कमी महसूस होना।
- अचानक सिर घूमना या ऐसा महसूस होना कि संतुलन बिगड़ रहा है।
- पैरों और टखनों में सूजन, खासतौर पर पैरों के निचले हिस्से में पानी जमा होने के कारण सूजन आना।
- दिल का बहुत तेज धड़कना, धड़कन का अनियमित होना होना, इसे पैल्पिटेशन कहते हैं।
हार्ट वॉल्व की समस्या है तो क्या करें?
अगर आपको हार्ट वॉल्व की समस्या है तो पर घबराएं नहीं, लेकिन इसे गंभीरता से लें। कुछ उपाय इसमें मददगार हो सकते हैं।
- जल्द से जल्द हृदय रोग विशेषज्ञ से मिलें।: हृदय के वाल्व की स्थिति जानने के लिए 2D इकोकार्डियोग्राफी करवाएं।
- डॉक्टर द्वारा दी गई दवाइयां नियमित रूप से लें। खुद से दवा बंद न करें।
- नमक, तली-भुनी चीजें और ज्यादा फैट वाली चीजों का सेवन कम करें।
- डॉक्टर की सलाह से हल्के व्यायाम और वॉक जैसे अभ्यास करें। समय-समय पर हृदय की जांच करवाते रहें।