हर साल 18 लाख से ज्यादा लोग हो रहे ब्रेन की इस जानलेवा बीमारी का शिकार, जानिए कैसे टालें खतरा

Author: Nandkishoryadav
UPDATED: Sat, 07 Nov 2026 04:18 PM
हर साल 18 लाख से ज्यादा लोग हो रहे ब्रेन की इस जानलेवा बीमारी का शिकार, जानिए कैसे टालें खतरा
ऑडियो सुनें

शरीर को स्वस्थ और फिट रखने के लिए शरीर के मास्टर यानी ब्रेन हेल्थ का ध्यान रखना जरूरी हो जाता है। मस्तिष्क को हमारे शरीर का मुख्य नियंत्रण केंद्र माना जाता है जो कंप्यूटर के सीपीयू की तरह काम करता है। यह शरीर के सभी अंगों, हमारी सोच, भावनाओं, और गतिविधियों को संचालित करता है।  अगर इसमें किसी भी तरह की दिक्कत आ जाती है तो इससे पूरे शरीर का कामकाज बाधित हो सकता है।

ब्रेन को हेल्दी रखने के लिए इसमें खून का संचार ठीक तरीके से होते रहना सबसे जरूरी है। हालांकि अगर दिमाग तक खून को ले जाने वाली नसों में कहीं ब्लॉकेज हो जाए या ये फट जाए तो ऐसी स्थिति जानलेवा हो सकती है, इससे स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है।

भारत में हर साल ब्रेन स्ट्रोक के 18 लाख (1.8 मिलियन) से ज्यादा नए मामले सामने आते हैं, जिसका मतलब है कि लगभग हर 20 सेकंड में एक स्ट्रोक का मामला होता है। भारत में स्ट्रोक मौत का चौथा सबसे बड़ा कारण है और विकलांगता का पांचवां सबसे बड़ा कारण है।

डॉक्टर बताते हैं, ब्रेन स्ट्रोक एक ऐसी मेडिकल इमरजेंसी है, जिसमें कुछ ही मिनटों की देरी मरीज की जान ले सकती है। डॉक्टर ने इस खतरे को पहचानने के लिए आसान तरीका बताया है।

ब्रेन स्ट्रोक के खतरे

ब्रेन स्ट्रोक में दिमाग के किसी हिस्से तक खून पहुंचना बंद हो जाता है या दिमाग की कोई नस फट जाती है। इससे दिमाग की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचने लगता है। कई बार मरीज अचानक बोलना बंद कर देता है, उसका चेहरा एक तरफ झुक जाता है या हाथ-पैर में कमजोरी आ जाती है।

सबसे बड़ी परेशानी ये है कि लोग इन संकेतों को अक्सर चक्कर, थकान या उम्र का असर समझकर नजरअंदाज कर देते हैं।

स्ट्रोक में समय सबसे अहम होता है। न्यूरोलॉजिस्ट डॉ प्रतीक गोस्वामी बताते हैं, एक आसान तरीका है जिसकी मदद से कुछ ही सेकंड में स्ट्रोक के शुरुआती संकेत पहचाना  जा सकते हैं, इसे FAST (फास्ट) टेस्ट कहते हैं। आइए इस बारे में जान लेते हैं।

स्ट्रोक को कैसे आसानी से पहचानें?

ब्रेन स्ट्रोक का खतरा युवाओं में तेजी से बढ़ता देखा जा रहा है। स्ट्रोक मुख्य रूप से दो प्रकार का होता है। पहला इस्केमिक स्ट्रोक है जिसमें खून का थक्का दिमाग की नस में रुकावट पैदा कर देता है। वहीं दूसरा हेमोरेजिक स्ट्रोक है, जब दिमाग की कोई नस फट जाती है और ब्लीडिंग होने लगता है तो इससे स्ट्रोक हो सकता है।

स्ट्रोक की पहचान के लिए FAST एक आसान तरीका है।

  • F (फेस)- मरीज को मुस्कुराने के लिए कहें। क्या चेहरे का एक हिस्सा नीचे की तरफ झुक रहा है?
  • A (आर्म्स यानी हाथ)- मरीज से दोनों हाथ ऊपर उठाने को कहें। क्या एक हाथ कमजोर होकर नीचे गिर रहा है?
  • S (स्पीच)- मरीज से कोई आसान वाक्य बोलने को कहें। क्या उसकी आवाज लड़खड़ा रही है या वह ठीक से बोल नहीं पा रहा?
  • T (टाइम)-इनमें से कोई भी लक्षण दिखे तो तुरंत एंबुलेंस बुलाएं। समय नोट करें कि लक्षण कब शुरू हुए।

स्ट्रोक होने पर तुरंत क्या करें?

स्ट्रोक के लक्षण दिखने पर बिल्कुल इंतजार न करें। तुरंत मरीज को अस्पताल लेकर जाएं जिससे जरूरी उपचार हो सके।

मरीज को खाने-पीने के लिए कुछ न दें और डॉक्टर की सलाह के बिना एस्पिरिन जैसी दवा न दें, क्योंकि स्ट्रोक का कारण नस में रुकावट या नस का फटना दोनों हो सकता है। स्ट्रोक में जितनी जल्दी इलाज मिलता है, दिमाग को होने वाले नुकसान को कम करने की संभावना उतनी बेहतर होती है। समय पर लक्षणों की पहचान और इलाज से जान बचने की संभावना बढ़ जाती है।

Breaking news. hindi news. Navabharat News. Latest news, in-depth analysis and opinion.
नवभारत न्यूज : छत्तीसगढ़, असम, ओडिशा, देश, दुनिया और राज्यों की खबरों का विश्वसनीय मंच.

लेखक के बारे में
By Nandkishoryadav