नयी दिल्ली. उपराष्ट्रपति चुनाव में विपक्ष की उम्मीदवार मार्गरेट अल्वा ने इस चुनाव से दूर रहने के तृणमूल कांग्रेस के निर्णय को ‘निराशाजनक’ करार देते हुए शुक्रवार को उम्मीद जताई कि ‘साहस की प्रतीक’ ममता बनर्जी इस चुनाव में विपक्ष के साथ खड़ी होंगी.
दूसरी तरफ, ममता बनर्जी की पार्टी ने कहा कि वह अल्वा के खिलाफ नहीं है और कभी भी राजग उम्मीदवार जगदीप धनखड़ का समर्थन नहीं करेगी, लेकिन उसने चुनाव से अनुपस्थित रहने का सैद्धांतिक फैसला किया है क्योंकि अल्वा का नाम अन्य विपक्षी दलों ने ‘एकतरफा ढंग से’ तय किया.
अल्वा ने ट्वीट किया, ‘‘उप राष्ट्रपति चुनाव से तृणमूल कांग्रेस का अनुपस्थित रहने का फैसला निराशाजनक है. यह वाद-विवाद, अहंकार और गुस्से का समय नहीं है. यह साहस, नेतृत्व और एकता का समय है.’’ उन्होंने कहा, ‘‘मेरा विश्वास है कि ममता बनर्जी, जो साहस का प्रतीक हैं, विपक्ष के साथ खड़ी होंगी.’’ देश के 17 विपक्षी दलों ने गत रविवार को उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए वरिष्ठ कांग्रेस नेता मार्गरेट अल्वा को अपना साझा उम्मीदवार घोषित किया था.
तृणमूल कांग्रेस और आम आदमी पार्टी का कोई नेता अल्वा के नामांकन के मौके पर नहीं पहुंचा था. ये दोनों दल उस बैठक में भी शामिल नहीं हुए थे जिसमें अल्वा को विपक्ष का साझा उम्मीदवार बनाने का फैसला हुआ था. हालांकि पवार ने कहा था कि वह तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी और आम आदमी पार्टी के संयोजक अरंिवद केजरीवाल के संपर्क में हैं.
अल्वा के ट्वीट पर तृणमूल कांग्रेस के प्रवक्ता कुणाल घोष ने कहा, ‘‘हमारे राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने कल स्पष्ट किया कि हम मार्गरेट अल्वा के खिलाफ नहीं हैं, बल्कि उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए उम्मीदवार चुनने का जो एकतरफा फैसला किया गया उसके खिलाफ हैं. इसमें कोई दूसरा मुद्दा नहीं है.’’ उन्होंने कहा, ‘‘हम आशा करते हैं कि हमारा सैद्धांतिक रुख आने वाले दिनों में विपक्षी एकता को मजबूत करने में मदद करेगा और भविष्य में ऐसे कदम पर विराम लगाएगा.’ घोष ने माकपा के इस आरोप को भी खारिज कर दिया जिसमें कहा गया था कि तृणमूल कांग्रेस का कदम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ममता बनर्जी के बीच सहमति का हिस्सा है.
उन्होंने कहा, ‘‘पश्चिम बंगाल के राज्यपाल पद पर रहते धनखड़ ने एक पार्टी विशेष के हित में काम किया. हम ऐसे व्यक्ति का समर्थन नहीं कर सकते. तृणमूल कभी कुछ ऐसा नहीं करेगी जिससे धनखड़ की संभावना को बल मिलता हो.’’ उल्लेखनीय है कि तृणमूल कांग्रेस के महासचिव अभिषेक बनर्जी ने बृहस्पतिवार को कहा कि उनकी पार्टी आगामी उपराष्ट्रपति चुनाव से दूर रहेगी.
उन्होंने कहा कि तृणमूल कांग्रेस उसे जानकारी दिए बिना विपक्षी उम्मीदवार का फैसला करने के तरीके से सहमत नहीं है. राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) ने पश्चिम बंगाल के पूर्व राज्यपाल जगदीप धनखड़ को उपराष्ट्रपति पद के चुनाव में अपना उम्मीदवार बनाया है, जिनका मुकाबला अल्वा से होना है.
क्रॉस-वोटिंग और उपराष्ट्रपति चुनाव में तृणमूल के फैसले से विपक्षी एकता में फिर दरार
राष्ट्रपति चुनाव में कई राज्यों में द्रौपदी मुर्मू के पक्ष में क्रॉस-वोंिटग होने और उपराष्ट्रपति चुनाव से दूरी बनाने के तृणमूल कांग्रेस के फैसले से विपक्षी एकता में एक बार फिर दरार पड़ गई है. तृणमूल कांग्रेस का कहना है कि उसने उपराष्ट्रपति चुनाव से अनुपस्थित रहने का फैसला किया क्योंकि मार्गरेट अल्वा को उम्मीदवार बनाने को लेकर उसे विश्वास में नहीं लिया गया. विपक्षी दलों के नेताओं का कहना है कि वे इस मुद्दे पर ममता बनर्जी के संपर्क में थे.
अल्वा ने तृणमूल के फैसले पर कहा, ‘‘उप राष्ट्रपति चुनाव से तृणमूल कांग्रेस का अनुपस्थित रहने का फैसला निराशाजनक है. यह वाद-विवाद, अहंकार और गुस्से का समय नहीं है. यह साहस, नेतृत्व और एकता का समय है.’’ राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि वह ममता बनर्जी से संपर्क साधने और उन्हें अल्वा की उम्मीदवारी का समर्थन करने के लिए मनाएंगे.
सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने गत 15 जुलाई को ममता बनर्जी से बात की थी और उस समय तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ने ऐसा कोई संकेत नहीं दिया था कि वह विपक्षी उम्मीदवार का समर्थन नहीं करेंगी. सूत्रों ने बताया कि सोनिया गांधी ने 16 जुलाई को जगदीप धनखड़ के राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन का उम्मीदवार घोषित होने के बाद ममता से संपर्क करने का प्रयास किया, लेकिन उनसे संपर्क नहीं साधा जा सका.
उन्होंने बताया कि शरद पवार ने भी मार्गरेट अल्वा का नाम घोषित होने के बाद 17 जुलाई को ममता बनर्जी से संपर्क करने का प्रयास किया, लेकिन संपर्क नहीं हो सका. देश के 17 विपक्षी दलों ने गत रविवार को उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए वरिष्ठ कांग्रेस नेता मार्गरेट अल्वा को अपना साझा उम्मीदवार घोषित किया था.
तृणमूल कांग्रेस और आम आदमी पार्टी का कोई नेता अल्वा के नामांकन के मौके पर नहीं पहुंचा था. ये दोनों दल उस बैठक में भी शामिल नहीं हुए थे जिसमें अल्वा को विपक्ष का साझा उम्मीदवार बनाने का फैसला हुआ था. उस समय पवार ने कहा था कि वह तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी और आम आदमी पार्टी के संयोजक अरंिवद केजरीवाल के संपर्क में हैं.
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव डी राजा ने बताया कि विपक्षी दलों की बैठक के दौरान पवार ने ममता से संपर्क करने का प्रयास किया, लेकिन बताया गया कि मुख्यमंत्री एक आधिकारिक आॅनलाइन बैठक में हैं. उन्होंने कहा कि कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने भी तृणमूल कांग्रेस के सांसदों से बात की और यह समझा जा रहा था कि पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ पार्टी मार्गरेट अल्वा का समर्थन करेगी.
उधर, विभिन्न राज्यों में कई विपक्षी विधायकों ने राष्ट्रपति चुनाव में राजग उम्मीदवार मुर्मू के समर्थन में मतदान किया. भाजपा से जुड़े सूत्रों का दावा है कि 125 विधायकों ने मुर्मू के लिए क्रॉस-वोंिटग की. मतगणना के नतीजों से पता चलता है कि 17 सांसदों ने भी मुर्मू के समर्थन में क्रॉस-वोंिटग की.