मुर्मू 25 जुलाई को शपथ ग्रहण करने वालीं 10वीं राष्ट्रपति होंगी

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Mon, 25 Jul 2022 08:08 PM
मुर्मू 25 जुलाई को शपथ ग्रहण करने वालीं 10वीं राष्ट्रपति होंगी

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नयी दिल्ली/भुवनेश्वर/रायरंगपुर. द्रौपदी मुर्मू 25 जुलाई को शपथ लेने वाली देश की 10वीं राष्ट्रपति होंगी. रिकॉर्ड दर्शाते हैं कि वर्ष 1977 से लगातार राष्ट्रपतियों ने इस तिथि (25 जुलाई) को शपथग्रहण की है. भारत के पहले राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद ने 26 जनवरी 1950 को शपथ ली थी. 1952 में उन्होंने पहला राष्ट्रपति चुनाव जीता. राजेंद्र प्रसाद ने दूसरा राष्ट्रपति चुनाव भी जीता और मई 1962 तक इस पद पर रहे.
सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने 13 मई, 1962 को राष्ट्रपति के रूप में शपथ ली और वह 13 मई, 1967 तक इस पद पर रहे. दो राष्ट्रपति – जाकिर हुसैन और फखरुद्दीन अली अहमद – अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर सके क्योंकि उनका निधन हो गया था.

भारत के छठे राष्ट्रपति नीलम संजीव रेड्डी ने 25 जुलाई 1977 को शपथ ली. तब से 25 जुलाई को ज्ञानी जैल सिंह, आर. वेंकटरमण, शंकर दयाल शर्मा, के.आर. नारायणन, ए.पी.जे. अब्दुल कलाम, प्रतिभा पाटिल, प्रणब मुखर्जी और रामनाथ कोंिवद ने इसी तिथि को राष्ट्रपति पद की शपथ ली.

द्रौपदी मुर्मू सोमवार को लेंगी राष्ट्रपति पद की शपथ

नवनिर्वाचित राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू सोमवार को देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद की शपथ लेंगी और उसके बाद उन्हें 21 तोपों की सलामी दी जाएगी. केंद्रीय गृह मंत्रालय ने कहा कि समारोह सोमवार को सुबह करीब सवा 10 बजे संसद के केंद्रीय कक्ष में होगा, जहां प्रधान न्यायाधीश एन. वी. रमण उन्हें राष्ट्रपति पद की शपथ दिलाएंगे. गृह मंत्रालय ने कहा कि इसके बाद उन्हें 21 तोपों की सलामी दी जाएगी. इसके बाद राष्ट्रपति का संबोधन होगा.

समारोह से पहले, निवर्तमान राष्ट्रपति और निर्वाचित राष्ट्रपति संसद पहुंचेंगे. उपराष्ट्रपति एवं राज्यसभा के सभापति एम. वेंकैया नायडू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, मंत्रिपरिषद के सदस्य, राज्यपाल, मुख्यमंत्री, राजनयिक मिशनों के प्रमुख, संसद सदस्य और सरकार के प्रमुख असैन्य एवं सैन्य अधिकारी समारोह में शामिल होंगे.

संसद के केन्द्रीय कक्ष में समारोह के समापन पर राष्ट्रपति, ‘राष्ट्रपति भवन’ के लिए रवाना होंगी, जहां उन्हें एक ‘इंटर-र्सिवस गार्ड आॅफ आॅनर’ दिया जाएगा और निवर्तमान राष्ट्रपति का शिष्टाचार सम्मान किया जाएगा. मुर्मू (64) ने बृहस्पतिवार को विपक्षी दलों के राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार यशवंत सिन्हा को हराकर इतिहास रच दिया. मुर्मू ने निर्वाचक मंडल सहित सांसदों और विधायकों के 64 प्रतिशत से अधिक वैध वोट प्राप्त किए और भारी मतों के अंतर से चुनाव जीता. वह देश की 15वीं राष्ट्रपति बनेंगी. मुर्मू को सिन्हा के 3,80,177 वोटों के मुकाबले 6,76,803 वोट मिले. वह आजादी के बाद पैदा होने वाली पहली और शीर्ष पद पर काबिज होने वाली सबसे कम उम्र की राष्ट्रपति होंगी. वह राष्ट्रपति बनने वाली दूसरी महिला भी हैं.

पारंपरिक संथाली साड़ी पहन कर शपथ ग्रहण कर सकती हैं मुर्मू

नवनिर्वाचित राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू सोमवार को देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद की शपथ लेंगी और इस दौरान वह पारंपरिक संथाली साड़ी में नजर आ सकती हैं. मूर्मू की भाभी सुकरी टुडू पूर्वी भारत में संथाल समुदाय की महिलाओं द्वारा पहनी जाने वाली एक खास साड़ी लेकर दिल्ली आ रही हैं. सुकरी अपने पति तारिणीसेन टुडू के साथ संसद के केंद्रीय कक्ष में होने वाले शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने के लिए शनिवार को राष्ट्रीय राजधानी के लिए रवाना हो गयीं.

सुकरी ने कहा, ‘‘मैं दीदी के लिए पारंपरिक संथाली साड़ी ला रही हूं और उम्मीद करती हूं कि वह शपथ ग्रहण समारोह के दौरान इसे पहनेंगी. मुझे अभी पता नहीं है कि वह असल में इस अवसर पर क्या पहनेंगी. राष्ट्रपति भवन नए राष्ट्रपति की पोशाक का फैसला लेगा.’’ संथाली साड़ियों के एक छोर में कुछ धारियों का काम होता है और संथाली समुदाय की महिलाएं इसे खास मौकों पर पहनती हैं. संथाली साड़ियों में लम्बाकार में एक समान धारियां होती हैं और दोनों छोरों पर एक जैसी डिजाइन होती है.

सुकरी अपने पति तथा परिवार के साथ मयूरभंज जिले में रायरंगपुर के समीप उपरबेड़ा गांव में रहती हैं. उन्होंने कहा कि वह मुर्मू के लिए पारंपरिक मिठाई ‘अरिसा पिठा’ भी लेकर जा रही हैं. इस बीच, मुर्मू की बेटी एवं बैंक अधिकारी इतिश्री तथा उनके पति गणेश हेम्बराम नयी दिल्ली पहुंच गए हैं और वे निर्वाचित राष्ट्रपति के साथ रह रहे हैं.

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के एक वरिष्ठ नेता ने कहा, ‘‘निर्वाचित राष्ट्रपति के परिवार के केवल चार सदस्य – भाई, भाभी, बेटी और दामाद ही शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होंगे.’’ उन्होंने कहा कि देश की 15वीं राष्ट्रपति के शपथ ग्रहण समारोह में ‘आदिवासी’ संस्कृति और परंपरा की झलक देखने को मिल सकती है.

बीजू जनता दल के अध्यक्ष और ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक राष्ट्रीय राजधानी के चार दिवसीय दौरे पर शनिवार को रवाना हो गए. वह मुर्मू के शपथ ग्रहण समारोह में भी शामिल होंगे. सूत्रों ने बताया कि मयूरभंज जिले से भाजपा के छह विधायकों के अलावा, ईश्वरीय प्रजापति ब्रह्मकुमारी की रायरंगपुर शाखा के तीन सदस्य ब्रह्मकुमारी सुप्रिया, ब्रह्मकुमारी बसंती और ब्रह्मकुमार गोंिवद भी नयी दिल्ली पहुंच गए हैं और उन्होंने मुर्मू से मुलाकात की.

केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव, धमेंद्र प्रधान और विश्वेश्वर टुडू, भाजपा सांसद सुरेश पुजारी, बसंत पांडा, संगीता कुमारा सिंहदेव और उनके पति केवी सिंहदेव ने नयी दिल्ली में मुर्मू से मुलाकात की. उनके शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने की उम्मीद है. उपरबेड़ा गांव के एक साधारण आदिवासी परिवार से आने वाली 64 वर्षीय मुर्मू ने भारत का राष्ट्रपति बनने तक पार्षद से लेकर मंत्री और झारखंड के राज्यपाल पद तक का लंबा सफर तय किया है.

नहीं जानते कि अब उन्हें अनौपचारिक रूप से संबोधित कर सकेंगे या नहीं: मुर्मू के मित्र
नवनिर्वाचित राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू सोमवार को देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद की शपथ लेने वाली हैं, इसबीच उनके पुराने घर के पड़ोसी और मित्र इस बात को लेकर असमंजस में हैं कि अगली बार जब वे उनसे मिलेंगे तो अपने मित्र को कैसे संबोधित करेंगे.

ओडिशा के मयूरभंज जिले के उपरबेड़ा गांव के किसान रामचंद्र मुर्मू ने कहा,‘‘ नवनिर्वाचित राष्ट्रपति के गृहनगर में सभी को उनकी उपलब्धियों पर गर्व है, लेकिन मैं समझ नहीं पा रहा हूं कि बातचीत के क्रम में मुझे ‘तू’ (अनौपचारिक संबोधन) का प्रयोग करना चाहिए या ‘आप’ (सम्मान के साथ औपचारिक संबोधन) का.’’ रामचंद्र, जो उपरबेड़ा के सरकारी उच्च प्राथमिक विद्यालय में उनके सहपाठी थे, ने याद किया कि दोनों अक्सर स्कूल परिसर में एक ही थाली से खाना खाते थे.

उन्होंने अपने खेत के काम से विराम लेते हुए कहा, ‘‘हम सभी ने एक साथ खेल गतिविधियों में भाग लिया. इन सभी वर्षों में मैंने उन्हें संबोधित करने के लिए ‘तू’ का इस्तेमाल किया है. चीजें अब बदल गई हैं. मुझे समझ नहीं आ रहा है कि मैं भारत के पहले नागरिक के लिए ‘तू’ का उपयोग कर सकता हूं या नहीं. आखिर एक किसान और राष्ट्रपति के लिए चीजें समान कैसे हो सकती हैं.’’ मुर्मू के बारे में उन्होंने कहा, ‘‘उनके परिवार के पास जमीन-जायदाद थी, जिससे राजस्व नहीं होता था. वह एक सीधी-सादी और मिलनसार लड़की थीं.’’

मुर्मू के एक अन्य मित्र गोंिवद मांझी ने कहा कि वह आखिरी बार मुर्मू से तब मिले थे, जब वह झारखंड की राज्यपाल थीं. उन्होंने कहा, ‘‘वह झारखंड के राज्यपाल के रूप में मेरे घर आई थीं, उस समय, हमने हमेशा की तरह बातचीत की. वह जमीन से जुड़ी इंसान हैं. इसमें कोई औपचारिकता शामिल नहीं थी. अब, हालांकि, मुझे नहीं पता कि क्या मैं देश के राष्ट्रपति के साथ अनौपचारिक रूप से बात कर सकता हूं.’’ मांझी ने भी अपने स्कूल के दिनों की यादों का जिक्र किया और कहा, ‘‘वह स्कूल में सबसे मेधावी छात्रों में से थीं. गरीबी के कारण मुझे पढ़ाई छोड़नी पड़ी. वह अक्सर मुझे अपने घर भोजन पर बुलाती थी. मुझे उनके घर पर ‘पाखल भात’ याद है.’’

1958 में एक संथाल परिवार में जन्मीं मुर्मू ने उपरबेड़ा के सरकारी उच्च प्राथमिक विद्यालय में कक्षा सात तक पढ़ाई की और फिर भुवनेश्वर के सरकारी बालिका उच्च विद्यालय में चली गईं. उन्होंने रामादेवी महिला कॉलेज से स्रातक किया.

उनकी कॉलेज की साथी सुचित्रा सामल ने कहा कि राष्ट्रपति निर्वाचित होने पर भी वह वैसी ही थीं जैसी पहली बार की मुलाकात में. सामल ने कहा, ‘‘जब उन्होंने मुझे दो दिन पहले फोन किया तो मुझे सुखद आश्चर्य हुआ. मैं उनके व्यस्त कार्यक्रम के बीच उनके फोन की उम्मीद नहीं कर रही थी. मैंने उनकी सफलता पर पहले उन्हें शुभकामना दी.’’ सामल, डांगी मुर्मू के साथ कुछ साल पहले झारखंड राजभवन में द्रौपदी से मिली थीं.

डांगी ने कहा, ‘‘हमने पुराने दिनों को याद करते हुए एक मजेदार समय बिताया. हमने खूब सारी बातें कीं,हंसी-मजाक किया और अपने जीवन की जानकारी साझा की. द्रौपदी सामान्य, शांत स्वभाव की थीं.’’ सामल को जल्द ही राष्ट्रपति भवन से निमंत्रण मिलने की उम्मीद है. उन्होंने कहा, ‘‘उन्हें वहां का कार्यभार संभालने दीजिए, हम वहीं जाकर उससे मिल लेंगे.’’

राष्ट्रपति-निर्वाचित द्रौपदी मुर्मू की सादगी उनकी सफलता की कुंजी है : मुर्मू के शिक्षक
राष्ट्रपति-निर्वाचित द्रौपदी मुर्मू सादगी में विश्वास करती हैं और वह हमेशा दूसरों की सहायता करती रहीं हैं. मुर्मू की शिक्षक और उनके मित्रों ने यह बात कही. उन्होंने कहा कि मुर्मू बदले में कुछ मांगे बिना जरूरतमंदों की मदद करती हैं. बचपन से ही उनसे जुड़े लोगों का मानना है कि सादगी उनकी सफलता की कुंजी है.

रायरंगपुर अधिसूचित क्षेत्र परिषद के एक पार्षद से विधायक, मंत्री और राज्यपाल तक का सफर तय करने वालीं मुर्मू सोमवार को देश के राष्ट्रपति के रूप में शपथ लेंगी. उपरबेड़ा गांव में मुर्मू के उच्च प्राथमिक विद्यालय के शिक्षक बासुदेव बेहरा ने कहा कि भौतिकवादी आधिपत्य छोड़ना उनका एक अंर्तिनहित गुण रहा.

बेहरा ने एक घटना को याद करते हुए कहा, ‘‘द्रौपदी के पिता बिरंच टुडू उपरबेड़ा गांव के प्रधान थे और परिवार गरीबी से जूझ रहा था. वह एक फ्रॉक में स्कूल आती थीं और उनके पास ज्योमेट्री बॉक्स नहीं होता था. स्कूल ने उन्हें ज्योमेट्री बॉक्स प्रदान किया था.’’ उन्होंने कहा कि स्कूल में एक छोटा ‘पुस्तक बैंक’ था, जहां से ऐसे छात्र किताबें ले सकते थे जो इन्हें खरीदने का खर्च नहीं उठा सकते थे.

बेहरा ने कहा, ‘‘द्रौपदी ने पुस्तक बैंक से किताबें ली थीं. हालांकि, जब उन्होंने हमारे उच्च प्राथमिक विद्यालय में सातवीं कक्षा की पढ़ाई पूरी की, तो उन्होंने न केवल वे किताबें लौटा दीं, बल्कि दूसरों की मदद के लिए अपनी किताबें और नोट्स भी प्रदान किये.’’ इसके अलावा, स्कूल में ब्लैकबोर्ड की सफाई के लिए ‘डस्टर’ भी नहीं थे. मुर्मू के मददगार स्वभाव को याद करते हुए शिक्षक ने कहा, ‘‘द्रौपदी अक्सर सभी कक्षाओं के लिए हाथ से बने डस्टर उपलब्ध कराती थीं. उन्होंने फटे कपड़ों से ये डस्टर बनाये थे.’’ मुर्मू की सहपाठी रहीं तन्मयी बिसोई ने भी उनसे जुड़ी यादें साझा कीं.

बिसोई ने कहा, ‘‘द्रौपदी बहुत ही विनम्र रहीं हैं . वह कभी किसी से कुछ नहीं मांगेगीं. जब भी हम दोस्त एक जगह इकट्ठे होते थे, तो उनके पास जो कुछ भी खाना होता था, वह बांट देती थीं. वह दूसरों से लेने में नहीं बल्कि देने में विश्वास रखती हैं.’’ विधायक राजकिशोर दास ने कहा कि 2009-2015 के बीच अपने पति, दो बेटों, मां और भाई को खोने वालीं मुर्मू ने गरीब बच्चों को शिक्षित करने की अपनी प्रतिबद्धता के चलते अपने पति और बेटों की याद में एक स्कूल स्थापित करने के लिए अपने सास-ससुर का घर और संपत्ति दान कर दी.

मुर्मू का ससुराल गांव पहाड़पुर में है, जहां स्थापित एसएलएस (श्याम-लक्ष्मण-सिपुन) आवासीय विद्यालय में अब 100 गरीब छात्र-छात्राओं को शिक्षा प्रदान की जाती है. स्कूल के प्रधानाध्यापक जे. गिरि ने कहा, ‘‘मैडम (मुर्मू) झारखंड की राज्यपाल रहते हुए भी साल में कम से कम दो बार स्कूल का दौरा करती थीं.’’ गिरि ने कहा कि मुर्मू ने स्कूल के लिए 3.20 एकड़ जमीन दान में दी है जो कक्षा 6-10 तक की शिक्षा प्रदान करता है. गिरि ने कहा, ‘‘उन्होंने (मुर्मू) उच्च विद्यालय की स्थापना की क्योंकि मुर्मू को अपने गांव के स्कूल से सातवीं कक्षा पास करने के बाद खुद बहुत समस्याओं का सामना करना पड़ा था. वह नहीं चाहतीं कि अन्य बच्चों को भी इसी तरह की कठिनाइयों का सामना करना पड़े.’’

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