आईजोल. म्यामां के चिन राज्य में मिलिशिया समूह ‘पीपुल्स डिफेंस फोर्स’ (पीडीएफ) द्वारा एक सैन्य शिविर पर कब्जा करने के बाद दो और जवान भागकर मिजोरम पहुंचे. एक पुलिस अधिकारी ने बुधवार को यह जानकारी दी. अधिकारी ने बताया कि म्यांमा के दो सैनिक मिजोरम में दाखिल हुए और मंगलवार शाम को जोखावथर पुलिस थाने पहुंचे.
अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, “केंद्र के निर्देश के अनुसार जवानों को असम राइफल्स को सौंप दिया गया और उन सभी को भारतीय रक्षा अधिकारियों ने हवाई मार्ग से सुरक्षित स्थान पर पहुंचा दिया है.” पुलिस अधिकारी ने बताया कि अब तक म्यामां के कुल 45 जवान भागकर मिजोरम आ चुके हैं.
उन्होंने कहा कि सबसे पहले म्यामां के 39 जवान मिजोरम में दाखिल हुए और सोमवार शाम को पूर्वी मिजोरम के चम्फाई जिले के सीमावर्ती गांव जोखावथर के निकटतम पुलिस थाने में पहुंचे. अधिकारी ने बताया कि 39 जवानों को असम राइफल्स ने मंगलवार को हवाई मार्ग से सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया और बाकी अन्य छह जवानों को बुधवार को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया.
राज्य गृह विभाग के एक अधिकारी ने कहा कि म्यांमा के जवानों को चम्फाई जिले से मणिपुर के सीमावर्ती शहर मोरेह तक हवाई मार्ग से ले जाया गया, जहां से उन्हें मोरेह के निकटतम म्यांमा शहर तमू भेजा गया. पुलिस अधिकारी ने बताया कि भारत-म्यांमा सीमा पर स्थिति अब शांत है, क्योंकि म्यांमा सेना और पीपुल्स डिफेंस फोर्स (पीडीएफ) के बीच अब कोई झड़प नहीं हुई है.
उन्होंने कहा, “फिलहाल स्थिति अब शांत है और हमें उम्मीद है कि अगले दो से तीन दिनों में भारत-म्यांमा सीमा पर स्थिति सामान्य हो जाएगी. आगे क्या होगा इसकी भविष्यवाणी करना मुश्किल है.” अधिकारियों ने कहा कि म्यांमा की सेना और पीडीएफ के बीच गोलीबारी के बाद म्यांमा के चिन राज्य के खवीमावी, रिहखावदार और पड़ोसी गांवों के लगभग 5,000 लोग भाग गए और मिजोरम के जोखावथर में शरण ले ली है.
चम्फाई के उपायुक्त जेम्स लालरिंचन ने कहा कि पीडीएफ द्वारा भारतीय सीमा के करीब चिन राज्य में ख्वामावी और रिहखावदार में दो सैन्य शिविरों पर हमला करने के बाद रविवार शाम को गोलीबारी शुरू हुई और सोमवार शाम तक जारी रही. मिजोरम, म्यांमा के साथ 510 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा साझा करता है. पूर्वोत्तर राज्य ने म्यामां के 31,000 से अधिक शरणार्थियों को शरण दी है, जो हालिया झड़पों से पहले फरवरी 2021 में हुए सैन्य तख्तापलट के बाद वहां से भाग गए थे. मिजोरम में शरण लेने वाले म्यांमार के नागरिक चिन समुदाय के हैं. चिन और मिजो एक ही जातीय समूह “जो” से संबंधित हैं.