नयी दिल्ली/उत्तरकाशी/राउरकेला. उत्तराखंड के उत्तरकाशी में सिल्क्यारा सुरंग के अंदर फंसे सभी 41 मजदूरों को जीवित बाहर निकालने के लिए क्षैतिज ‘ड्रिल’ करने पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है और केवल यही तरीका दूसरा सर्वश्रेष्ठ विकल्प होगा. अधिकारियों ने मंगलवार को यह जानकारी दी.
बचाव प्रयासों के बारे में संवाददाताओं को जानकारी देते हुए राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के सदस्य लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन ने कहा कि सुरंग में फंसे इन मजदूरों को बचाने के लिए पांच मोर्चे पर एक साथ प्रयास किये जा रहे हैं.
उन्होंने कहा कि ”क्षैतिज ड्रिल करने पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा” क्योंकि चट्टान की संरचना लम्बवत ‘ड्रिल’ करने में चुनौती पेश कर रही है.
सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के सचिव अनुराग जैन ने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में ”क्षैतिज ‘ड्रिल’ करना दूसरा सर्वश्रेष्ठ विकल्प है.” हसनैन ने बताया कि नयी छह इंच चौड़ी पाइपलाइन का उपयोग फंसे हुए मजदूरों को गर्म भोजन और दवा उपलब्ध कराने में किया जाएगा.
अभी, मजदूरों को खाद्य सामग्री चार इंच चौड़ी पाइपलाइन के जरिए मुहैया की जा रही है. हसनैन ने यह भी कहा कि फंसे हुए मजदूरों के साथ बेहतर संचार करने के लिए छह इंच चौड़ी पाइपलाइन के जरिये उपकरण भी भेजा जाएगा. उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) के दल बचाव अभियान के दौरान उत्पन्न होने वाली किसी भी अकस्मात स्थिति से निपटने के लिए स्थल पर अभ्यास कर रहे हैं.
मलबे में चौड़ा पाइप डाले जाने से श्रमिकों से बातचीत आसान हुई : रिश्तेदार
सुरंग में फंसे श्रमिकों के सिलक्यारा में मौजूद रिश्तेदारों ने मंगलवार को मलबे में छह इंच व्यास के चौड़े पाइप के डाले जाने से उसके जरिए बातचीत करने में आसानी होने से कुछ राहत महसूस की . सुरंग में फंसे 41 श्रमिकों में शामिल अपने देवर प्रदीप किस्कू की कुशल क्षेम जानने के लिए बिहार के बांका से सिलक्यारा पहुंची सुनीता हेम्ब्रम ने ‘पीटीआई भाषा’ को बताया, ‘मैंने उनसे सुबह बात की . नए पाइप से उन्हें संतरे भेजे गए हैं. वह ठीक हैं.’
हेम्ब्रम ने कहा कि नए पाइप के जरिए श्रमिकों से बातचीत में आसानी हुई है . उन्होंने कहा, ‘इससे पहले हमें उन्हें अपनी आवाज सुनाने के लिए चिल्लाना पड़ता था लेकिन आज उनकी आवाज स्पष्ट थी.’ पिछले नौ दिन से मलबे के दूसरी ओर फंसे अपने भाई गब्बर सिंह नेगी का इंतजार कर रहे जयमल सिंह नेगी ने कहा कि नई पाइपलाइन डाले जाने से निश्चित रूप से श्रमिकों से संपर्क बेहतर हुआ है लेकिन असली चुनौती (उन्हें बाहर निकालने की) अभी बनी हुई है .
उन्होंने कहा, ‘ नई पाइपलाइन डाले जाने से भोजन को बड़ी मात्रा में भेजा जाना आसान हो गया है जो अच्छी बात है लेकिन वैसे देखा जाए तो स्थिति वही है जो पहले थी .’ अपने भाई से बात करने के बाद नेगी ने कहा कि हांलांकि, फंसे श्रमिक आपस में बातचीत कर रहे हैं और एक दूसरे का मनोबल बढ़ा रहे हैं .
दूसरी तरफ, उत्तर प्रदेश के रहने वाले चौधरी ने कहा कि उन्हें उनके पुत्र मंजीत से बात नहीं करने दी गयी. उन्होंने कहा, ‘मैं पिछले मंगलवार को आया था. मेरे यहां आने के तुरंत बाद मैंने मंजीत से एक बार बात की थी, लेकिन अब मुझे अंदर जाने और उससे बात करने की अनुमति नहीं दी जा रही है.’ मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने रविवार को अपने पिछले दौरे में अधिकारियों से यह सुनिश्चित करने को कहा था कि सुरंग में फंसे श्रमिकों के परेशान रिश्तेदारों को कोई असुविधा न हो.
उत्तराखंड में सुरंग बचाव अभियान के लिए विमान के जरिए ओडिशा से ले जाए जा रहे आरएसपी पाइप
उत्तराखंड के सिलक्यारा में निर्माणाधीन सुरंग का एक हिस्सा गिरने के बाद उसके अंदर फंसे 41 श्रमिकों की सुरक्षित निकासी के लिए देशभर में हो रही प्रतीक्षा के बीच राउरकेला इस्पात संयंत्र (आरएसपी) में निर्मित विशेष किस्म के पाइप बचाव कार्य में इस्तेमाल की खातिर विमान के जरिए यहां से ले जाए गए हैं. एक अधिकारी ने यह जानकारी दी.
अधिकारी ने कहा कि मंगलवार को भी विशेष किस्म के पाइप विमान के जरिए उत्तरकाशी में उस स्थान पर इस्तेमाल के लिए ले जाए गए हैं, जहां सुरंग ढह गई है. उन्होंने कहा कि सोमवार को एक बड़े विमान ने दो बार उड़ान भरी और पाइप लेकर गया. उस पाइप का इस्तेमाल घटनास्थल पर एनडीआरएफ के साथ काम कर रही एक अंतरराष्ट्रीय बचाव टीम कर सकती है.
संयंत्र के अधिकारियों ने कहा, “उत्तराखंड ले जाए जा रहे पाइप की चौड़ाई काफी ज्यादा है.” हालांकि उन्होंने इस बारे में कोई विस्तृत जानकारी साझा नहीं की. उल्लेखनीय है कि 12 नवंबर को ढही निर्माणाधीन सुरंग में फंसे 41 में से पांच श्रमिक ओडिशा के रहने वाले हैं. घटनास्थल पर जारी निकासी अभियान में एक बड़ी सफलता उस समय मिली जब बचाव दल के अधिकारियों ने मंगलवार सुबह डाली गई छह इंच की नयी पाइपलाइन के माध्यम से श्रमिकों के साथ संपर्क किया.