गोलाघाट जिले के मेरापानी में बुलडोजर कार्रवाई के दौरान 59 परिवारों के घर और इलाके की इकलौती मस्जिद ध्वस्त कर दी गई।
कार्रवाई के बाद लोग रोते-बिलखते नजर आए। असम के नागांव, गोलाघाट और होजाई जिलों में सरकार की दो दिवसीय बेदखली कार्रवाई में 1,100 से ज्यादा मुस्लिम परिवार प्रभावित हुए।
प्रशासन के मुताबिक, ये परिवार आरक्षित वन भूमि पर अवैध कब्जा करके रह रहे थे। हालांकि, प्रभावित परिवारों का दावा है कि उनके पूर्वजों को 1974 में सरकार ने यहां बसाया था और प्रत्येक परिवार को करीब चार बीघा जमीन दी गई थी। निवासियों के मुताबिक, कार्रवाई में 10 से अधिक मस्जिदें भी तोड़ी गईं, जिनमें कुछ 50 साल से ज्यादा पुरानी थीं। असम के नगांव, होजाई और गोलाघाट जिलों में दो दिनों के दौरान 1,100 से ज्यादा परिवारों को वन भूमि से बेदखल किया गया।
वन मजदूरों के संगठनों ने भी इन परिवारों की पुरानी बसावट और जंगलों से जुड़े पारंपरिक संबंधों का हवाला दिया है। कुछ निवासियों ने गौहाटी हाईकोर्ट का रुख भी किया था। अब सवाल है कि क्या इन परिवारों के पुराने बसावट संबंधी दावों की जांच हुई और बेदखली के बाद उनके पुनर्वास की क्या व्यवस्था की गई?
बताया जाता है कि बेदखली से ग्रस्त लोग अब नगांव, मोरीगांव और कछार जिलों की ओर पलायन कर रहे हैं। असम सरकार ने जून और जुलाई 2025 के दौरान 4 जिलों में 5 बेदखली अभियानों में 3,500 से ज़्यादा बंगाली भाषी मुसलमान परिवारों को बेदखल किया है।
अधिकारियों ने बताया कि यह ज़मीन कृष्णाई रेंज के अंतर्गत पैकन रिज़र्व फ़ॉरेस्ट में आती है, लेकिन निवासियों का दावा है कि लोग वहाँ आरक्षित वन घोषित होने से पहले से ही रह रहे थे