नयी दिल्ली/मैसूरु/जींद. दिल्ली पुलिस को शक है कि बुधवार को संसद की सुरक्षा में हुई चूक के मामले में पकड़े गए चार लोगों के साथ दो और लोग शामिल थे. सूत्रों ने यह जानकारी दी. सूत्रों ने दावा किया कि सभी छह लोग एक-दूसरे को जानते हैं और गुरुग्राम में एक घर में रह रहे थे.
आरोपी अमोल शिंदे और नीलम को संसद भवन के बाहर से पकड़ा गया, जबकि सागर शर्मा और मनोरंजन डी को लोकसभा के अंदर से पकड़ा गया. वे पुलिस की हिरासत में हैं. पुलिस उनके दो संदिग्ध साथियों की तलाश में है जिनकी पहचान ललित और विक्रम के तौर पर हुई है.
पुलिस ने कहा कि संसद भवन के बाहर प्रदर्शन के दौरान कैन का इस्तेमाल कर पीला और लाल रंग का धुआं फैलाने के आरोप में अमोल और नीलम को गिरफ्तार किया गया है. दर्शक दीर्घा से दो व्यक्तियों के लोकसभा में कूदने और कैन से पीला तथा लाल रंग का धुआं फैलाने के कुछ मिनट बाद यह घटना हुई. लोकसभा में हुई घटना से सांसदों में दहशत फैल गई.
पुलिस सूत्रों ने बताया कि चारों आरोपी एक-दूसरे को जानते थे और उनके दो अन्य साथी भी थे, जिनका अब तक पता नहीं चल पाया है.
पुलिस के एक सूत्र ने कहा, ह्लचार लोगों को पकड़ लिया गया है, जबकि पांचवें की पहचान कर ली गई है. दो संदिग्ध और चार आरोपी गुरुग्राम के एक घर में रुके थे और ऐसा लगता है कि घटना की साजिश रची गई थी.ह्व
सूत्र ने कहा, “आरोपियों के पास से मोबाइल फोन नहीं मिले हैं और पुलिस उनके फोन की तलाश कर रही है.” सुरक्षा में चूक की यह घटना 2001 में संसद पर हुए आतंकी हमले की बरसी के दिन हुई. पाकिस्तान आधारित लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद संगठनों के आतंकवादियों ने 2001 में आज ही के दिन संसद परिसर पर हमला किया था, जिसमें नौ लोगों की मौत हो गई थी.
सुरक्षा चूक ने अपर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था को उजागर किया
संसद में बुधवार को हुई बड़ी सुरक्षा चूक ने सुरक्षा प्रोटोकॉल में कमियों को सामने ला दिया है. लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला द्वारा सुरक्षा चूक के मुद्दे पर बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में कई नेताओं ने इस मुद्दे को उठाया. सूत्रों ने बताया कि लोकसभा कक्ष में कूदने वाले दो आरोपियों मनोरंजन डी और सागर शर्मा के पास 45 मिनट की अवधि वाले आगंतुक पास थे, लेकिन वे नियमों का उल्लंघन करते हुए करीब दो घंटे तक दर्शक दीर्घा में रहे.
सूत्रों के अनुसार, संसद के सुरक्षा कर्मचारी आगंतुकों को उनके वहां रुकने की समयसीमा के पूरा होते ही बाहर निकाल देते थे, लेकिन नए भवन की दीर्घाओं में उनकी तैनाती लगभग ना के बराबर थी, क्योंकि वे बदलती सुरक्षा आवश्यकताओं के बीच विभिन्न स्थानों पर ड्यूटी में व्यस्त रहे.
उन्होंने कहा कि विशेष निदेशक (सुरक्षा) से लेकर सुरक्षा सहायक ग्रेड- द्वितीय तक के पदानुक्रम में सुरक्षा अधिकारियों के स्वीकृत पदों की संख्या 301 है, जबकि कार्यरत 176 हैं और 125 पद रिक्त हैं. सूत्रों ने बताया कि महत्वपूर्ण बात यह है कि रिक्तियों का सबसे बड़ा हिस्सा शुरुआती स्तर के अधिकारियों का है, जो सुरक्षा तंत्र का महत्वपूर्ण अंग हैं.
लोकसभा में कूदने वाले व्यक्ति के पिता ने कहा-”अगर मेरे बेटे ने गलत किया है तो उसे फांसी दे दो”
संसद में सुरक्षा चूक के एक बड़े मामले में लोकसभा कक्ष में कूदने वाले दो व्यक्तियों में से एक के पिता ने कहा कि ”अगर मेरे बेटे ने गलत किया है तो उसे फांसी दे दो.” संसद में कूदकर अफरातफरी मचाने वाले मनोरंजन डी. के पिता देवराज गौड़ा ने दावा किया कि उनका बेटा ईमानदार और सच्चा है तथा हमेशा समाज के लिए अच्छा करना चाहता है.
गौड़ा ने संवाददाताओं से कहा, ”अगर मेरा बेटा अच्छा करता है तो ठीक है लेकिन अगर उसने कुछ गलत किया है तो उसे फांसी दे दो. (अगर उसने गलत किया है) वह मेरा बेटा नहीं है. वह संसद हमारी है. आप जैसे लोगों ने ही इसे बनाया है. इसे बनाने में महात्मा गांधी, नेहरू जैसे नेताओं ने कड़ी मेहनत की थी. जो कोई भी यह (हमला) करता है वह निंदनीय है. हम इसे स्वीकार नहीं करेंगे.”
उन्होंने कहा, ”मेरा बेटा एक अच्छा लड़का है. वह ईमानदार और सच्चा है. उसकी एकमात्र इच्छा समाज के लिए अच्छा करना और समाज के लिए बलिदान देना है. वह स्वामी विवेकानंद की किताबें पढ़ता था. मुझे लगता है कि इन किताबों को पढ़ने के बाद उसके मन में ऐसे विचार विकसित हुए.”
गौड़ा ने कहा, ”यह समझना मुश्किल है कि उसके दिमाग में क्या चल रहा था. मेरे बेटे ने 2016 में बीई (बैचलर इन इंजीनियरिंग) पूरा किया और खेती का काम देख रहा था. उसने दिल्ली और बेंगलुरु में कुछ कंपनियों में भी काम किया है.” मैसूरु का रहने वाला मनोरंजन और एक अन्य व्यक्ति सागर शर्मा लोकसभा की कार्यवाही के दौरान दर्शक दीर्घा से सदन के भीतर कूद गए, जिससे संसद में अफरातफरी मच गई. सांसदों द्वारा पकड़े जाने से पहले दोनों ने नारे भी लगाए.
नीलम की गिरफ्तारी से परिजन भी हैरान, मां ने कहा-नौकरी की हताशा में उठाया कदम
संसद भवन के बाहर बुधवार को प्रदर्शन के दौरान कनस्तर का इस्तेमाल कर पीला और लाल रंग का धुआं फैलाने वाली महिला के इस कदम से उसके परिजन भी हैरान हैं और उन्होंने कहा कि हो सकता है उसने नौकरी नहीं मिलने की हताशा में यह कदम उठाया हो. पुलिस ने संसद के बाहर प्रदर्शन के दौरान जिन दो लोगों को गिरफ्तार किया है उनकी पहचान हरियाणा के जींद जिले के घासो खुर्द गांव निवासी नीलम (42) और महाराष्ट्र के लातूर इलाके के अमोल शिंदे (25) के रूप में हुई है.
पुलिस के अनुसार, दोनों ने संसद भवन के बाहर गैस कनस्तर खोलकर धुआं फैलाने के साथ-साथ ‘ तानाशाही नहीं चलेगी’, ‘भारत माता की जय’ और ‘जय भीम, जय भारत’ जैसे नारे लगाए. नीलम की मां सरस्वती देवी ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि वह (नीलम) सिविल सेवा परीक्षाओं की तैयारियों के सिलसिले में प्रदेश के हिसार में एक ‘पेइंगगेस्ट’ के तौर पर रह रही थी. उन्होंने कहा कि वह 25 नवंबर को घर से हिसार के लिए निकली थी और उन्हें उसके दिल्ली जाने और प्रदर्शन में शामिल होने का पता मीडिया में आई खबरों से चला.
सरस्वती ने कहा,” मेरी बेटी के साथ आज सुबह बात हुई थी और उसने मुझसे ध्यान से अपने लिये दवा लेने को कहा था. हमें इसकी जानकारी नहीं थी कि वह दिल्ली गई है.” नीलम की मां ने कहा, ” मुझे नहीं पता कि किस तरह से उसने यह कदम उठाया. हो सकता है कि उसने नौकरी (पाने) के लिए ऐसा किया हो.”
नीलम के परिजनों का दावा है कि वह परास्नातक, एमफिल और राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा (नेट) उत्तीर्ण है और सरकारी नौकरी के लिए प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रही है. महिला के परिजनों ने कहा कि कि नीलम बेरोजगारी और छात्राओं के साथ नाइंसाफी जैसे आंदोलनों में सक्रिय रही है और उसने किसान आंदोलन में भी भाग लिया था. अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के कुम्हार समुदाय से आने वाली नीलम के परिवार में माता-पिता, तीन बहनें और दो भाई हैं. उसके पिता कोहर सिंह उचाना मंडी में हलवाई का काम करते हैं.
चुपचाप बैठे दो प्रदर्शनकारियों ने अचानक लोकसभा की कार्यवाही बाधित कर दी: प्रत्यक्षदर्शी
लोकसभा की दर्शक दीर्घा में बुधवार को मौजूद दर्शकों ने कहा कि सदन में कूदने वाले दो प्रदर्शनकारी पहले तो चुपचाप बैठे थे, लेकिन अगले ही पल उन्होंने अपनी हरकत से अचानक निचले सदन की कार्यवाही बाधित कर दी.
सार्वजनिक दीर्घा में बैठे एक प्रत्यक्षदर्शी ने कहा कि जब कुछ लोकसभा सदस्य प्रदर्शनकारियों का पीछा कर रहे थे, तो उनमें से एक प्रदर्शनकारी ने सदन के अंदर धुएं से भरा एक डिब्बा फेंक दिया.
प्रत्यक्षदर्शी ने कहा, ह्लदर्शक दीर्घा में बैठे हुए प्रदर्शनकारी कोई नारा नहीं लगा रहे थे और वे अचानक लोकसभा सदन में कूदे.ह्व उन्होंने कहा, ह्लजैसे ही प्रदर्शनकारी सदन के कक्ष में कूदे, सांसदों ने उन्हें खदेड़ने की कोशिश की. प्रदर्शनकारियों ने वहां धुएं से भरा एक डिब्बा (कनस्तर) भी फेंका. घटना के दौरान, सुरक्षा निर्देशों के अनुसार हमें बाहर निकाला गया.ह्व प्रत्यक्षर्दिशयों के अनुसार, जब ह्लसुरक्षा चूकह्व हुई तब लोकसभा की दीर्घा में लगभग 30 से 40 दर्शक बैठे थे.
एक अन्य प्रत्यक्षदर्शी ने कहा, ह्ल पांच परतों की सुरक्षा के बावजूद संसद के अंदर इस तरह की घटना स्तब्ध करने वाली थी.ह्व शून्यकाल के दौरान दो व्यक्ति दर्शक दीर्घा से लोकसभा कक्ष में कूद गए और डिब्बा के जरिए धुआं छोड़ दिया. इस दौरान उन्होंने नारे भी लगाए, जिसके बाद सांसदों ने उन्हें पकड़ लिया. लगभग उसी समय, एक महिला समेत दो व्यक्तियों ने संसद परिसर के बाहर ‘तानाशाही नहीं चलेगी’ के नारे लगाते हुए कनस्तर से धुआं छोड़ा.
लोकसभा की दर्शक दीर्घा से कूदने वाला एक आरोपी तीन माह से पास हासिल करने के लिए प्रयासरत था
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसद प्रताप सिम्हा के अधिकार पत्र पर बुधवार को लोकसभा की दर्शक दीर्घा से सदन में कूदने वाले दो व्यक्तियों को ‘पास’ जारी किए गए थे. सूत्रों के मुताबिक सांसद सिम्हा उनमें से एक आरोपी को जानते थे, क्योंकि वह उनके निर्वाचन क्षेत्र मैसूर का है और वह अक्सर उनके कार्यालय आता था.
सूत्रों के अनुसार, आरोपियों में से एक मनोरंजन डी ने सह-आरोपी सागर शर्मा को सांसद के कार्यालय में एक दोस्त के रूप में पेश किया और नयी संसद देखने के बहाने ‘पास’ हासिल किए. सिम्हा के कहने पर बुधवार के लिए तीन ‘पास’ जारी किए गए थे. सांसद के करीबी सूत्रों ने बताया कि एक महिला को संसद से लौटना पड़ा क्योंकि, उसके साथ आए बच्चे का नाम उसके ‘पास’ पर अंकित नहीं था.
महिला का दोनों आरोपियों से कोई संबंध नहीं था.
मनोरंजन डी तीन महीने से अधिक समय से सिम्हा और उनके कार्यालय में ‘पास’ के लिए प्रयासरत था. आलोचनाओं का सामना कर रहे सिम्हा के कार्यालय ने उनका बचाव करते हुए कहा कि सांसद आम तौर पर अपने निर्वाचन क्षेत्र के सदस्यों के ऐसे अनुरोधों पर विचार करते हैं.