तमिलनाडु के राज्यपाल ने पूरा अभिभाषण पढ़ने से किया इनकार, उनकी व्यक्तिगत टिप्पणी को रिकॉर्ड से हटाया गया

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Mon, 12 Feb 2024 08:51 PM
तमिलनाडु के राज्यपाल ने पूरा अभिभाषण पढ़ने से किया इनकार, उनकी व्यक्तिगत टिप्पणी को रिकॉर्ड से हटाया गया
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चेन्नई. तमिलनाडु के राज्यपाल आर.एन. रवि ने सोमवार को विधानसभा में अपने पारंपरिक अभिभाषण को पूरा पढ़ने से इनकार कर दिया और इसमें ‘गुमराह करने वाले तथ्य’ होने का दावा किया तथा सदन में राष्ट्रगान बजाये जाने के मुद्दे को लेकर द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) सरकार की आलोचना की.

उनकी कुछ टिप्पणियों को सदन की कार्यवाही के रिकॉर्ड से हटा दिया गया, और इस तरह आज का घटनाक्रम राजभवन तथा राज्य सरकार के बीच तकरार का एक और उदाहरण है. विधानसभा अध्यक्ष (स्पीकर) एम. अप्पावु ने कहा कि रिकॉर्ड से हटाई गई सामग्री रवि की ‘व्यक्तिगत’ टिप्पणियां थीं और केवल मंजूरी प्राप्त पाठ ही रिकॉर्ड में जाएंगे. इससे पहले, राज्यपाल ने विधानसभा में अपना परंपरागत अभिभाषण शुरू करने के चंद मिनटों बाद इसकी सामग्री पर कुछ टिप्पणियां करते हुए इसे खत्म कर दिया.

रवि के राष्ट्रगान के बारे में उल्लेख करने पर विधानसभा अध्यक्ष (स्पीकर) एम. अप्पावु ने कहा कि यह राज्यपाल के अभिभाषण वाले दिन सदन में आखिर में बजाया जाता है और उन्होंने इस संबंध में सदन के नियमों का हवाला दिया. बाद में राजभवन ने एक बयान में दावा किया कि रवि ने तमिलनाडु सरकार को सलाह दी थी कि वह राष्ट्रगान को सम्मान दे तथा इसे राज्यपाल का अभिभाषण शुरू होने और इसके संपन्न होने के बाद बजाये, जिसे द्रमुक सरकार ने नजरअंदाज कर दिया.

बयान में यह आरोप भी लगाया गया है कि विधानसभा अध्यक्ष ने राज्यपाल पर निशाना साधा और उन्हें ‘नाथूराम गोडसे का समर्थक’ कहा, इसलिए रवि विधानसभा की गरिमा का ध्यान रखते हुए सदन से बाहर चले गए. राजभवन ने अभिभाषण में गुमराह करने वाले दावे और तथ्य होने का आरोप लगाते हुए कहा कि यदि रवि ने पूरा अभिभाषण पढ़ा होता तो यह एक ‘संवैधानिक त्रासदी’ होती. लगातार दूसरे साल राज्य विधानसभा में राज्यपाल के अभिभाषण के दौरान विवाद देखने को मिला. पिछले साल नौ जनवरी को रवि ने सरकार द्वारा तैयार किए अभिभाषण के कुछ अंश हटा दिए थे और अपनी तरफ से कुछ बातें जोड़ दी थी.

तमिलनाडु विधानसभा के इतिहास में यह पहली बार है जब किसी राज्यपाल ने साल के सत्र की शुरुआत में सदन में अपना परंपरागत अभिभाषण नहीं पढ़ा. यह इस साल सदन में रवि का पहला अभिभाषण था. रवि ने तमिल ग्रंथ ‘तिरुक्कुरल’ के एक दोहे का जिक्र करने और तमिलनाडु विधानसभा अध्यक्ष अप्पावु, मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन तथा विधायकों का अभिवादन करने के बाद चंद मिनटों में अपना अभिभाषण समाप्त कर दिया.

इसके तुरंत बाद अप्पावु ने तमिल में राज्यपाल का पूरा अभिभाषण पढ़ा और कहा कि रवि ने सरकार द्वारा तैयार किए गये अभिभाषण के मसौदे को स्वीकृति दी थी. विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि राज्यपाल ने सुझाव दिया कि राष्ट्रगान शुरुआत में बजाया जाना चाहिए. अप्पावु ने कहा कि राज्य में हाल में अभूतपूर्व बारिश और बाढ़ के बावजूद केंद्र सरकार ने तमिलनाडु को ”एक पैसा” भी नहीं दिया जबकि प्रधानमंत्री राहत कोष में ”लाखों करोड़ों रुपये” हैं.

राज्यपाल को ‘अय्या’ (महोदय) कह कर संबोधित करते हुए अप्पावु ने कहा कि वह प्रधानमंत्री से ”उस कोष से” तमिलनाडु को करीब 50,000 करोड़ रुपये की सहायता दिलाने के बारे में कह सकते हैं जिसके बारे में लोग ”सवाल नहीं उठा सकते.” अप्पावु के इस बयान के पूरा करने के तुरंत बाद राज्यपाल रवि सदन से बाहर चले गए जबकि अध्यक्ष ने माइक्रोफोन पर यह भी कहा कि परंपरागत अभिभाषण पर प्रस्ताव पारित होने के बाद राष्ट्रगान बजाया जाएगा. हालांकि, रवि रुके नहीं और अधिकारियों के साथ सदन से बाहर चले गए.

सदन के नेता और जल संसाधन मंत्री दुरईमुरुगन ने विधानसभा के रिकॉर्ड में राज्यपाल के अभिभाषण को शामिल करने के लिए एक नियम में ढील देने का प्रस्ताव पेश किया, जिसे ध्वनि मत से पारित कर दिया गया. उन्होंने कहा कि तमिल और अंग्रेजी भाषा में 46 पृष्ठों के पाठ को विधानसभा के रिकॉर्ड में शामिल किया जाएगा और इस प्रस्ताव को ध्वनि मत से पारित कर दिया गया.

केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने भी हाल में अपना परंपरागत अभिभाषण केवल अंतिम पैराग्राफ पढ़कर कुछ ही मिनटों में समाप्त कर दिया था. बाद में पत्रकारों से बातचीत में अप्पावु ने कहा कि पारंपरिक अभिभाषण के दौरान रवि द्वारा की गयी ‘व्यक्तिगत’ टिप्पणियों को सदन की कार्यवाही से ‘हटा’ दिया गया है.

अप्पावु ने कहा, ”उन्होंने (अभिभाषण से) जो कुछ पढ़ा, वह ठीक है. उसके बाद उन्होंने कुछ व्यक्तिगत टिप्पणियां कीं जिन्हें हटा दिया गया है.” राष्ट्रगान पर भी रवि ने कुछ टिप्पणियां की थीं. इस पर अध्यक्ष ने कहा कि राष्ट्रगान राज्यपाल के अभिभाषण वाले दिन आखिर में बजाया जाता है.

सदन के नियमों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि सदन की कार्यवाही राज्यपाल के अभिभाषण के बाद तमिल मंगलाचरण गीत ‘तमिल थाई वज्थू’ के साथ शुरू होती है और कार्यवाही समाप्त होने पर ”अंत में राष्ट्रगान बजाया जाता है.” राज्य के कानून मंत्री एस रघुपति ने कहा कि स्टालिन लोकतंत्र का सम्मान करते हैं और राज्यपाल के साथ सौहार्द्रपूर्ण संबंध चाहते हैं, लेकिन ऐसा लगता है कि रवि ‘रिमोट कंट्रोल’ से संचालित हो रहे हैं और इसलिए स्वतंत्र रूप से कामकाज नहीं कर रहे हैं.

विपक्ष के नेता के. पलानस्वामी ने कहा कि आज जो कुछ हुआ वह सरकार और राज्यपाल के बीच का मुद्दा है लेकिन ”जब हम वहां (सत्ता में) थे तब कोई समस्या नहीं थी.” भाजपा विधायक दल के नेता नयनार नागेंद्रन ने आरोप लगाया कि स्पीकर ने कुछ विशेष मुद्दों पर बोलकर परंपरा का उल्लंघन किया.

बाद में, राज्यपाल ने सदन की कार्यवाही के रिकॉर्ड से हटाई गई अपनी टिप्पणियों का वीडियो ‘एक्स’ पर साझा किया. इस बीच, माकपा के प्रदेश सचिव के. बालाकृष्णन ने आरोप लगाया कि राज्यपाल ने विधानसभा की पहली बैठक में अभिभाषण पढ़ने से इनकार कर सदन और राज्य के लोगों का अपमान किया.

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