वायु प्रदूषण कम करने के लिए वैकल्पिक ईंधन, नई प्रौद्योगिकी पर ध्यान देना होगा: गडकरी

नयी दिल्ली. देश को वायु प्रदूषण कम करने के लिए वैकल्पिक ईंधन, जैव-ईंधन के साथ ही नयी प्रौद्योगिकी और नवाचार पर ध्यान देना होगा. केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने मंगलवार को ‘आईसीवीए ग्रीन रिटर्न्स समिट 2025’ को संबोधित करते हुए यह बात कही.
उन्होंने कहा कि किसी भी देश या समाज में नैतिकता, अर्थव्यवस्था और पर्यावरण-पारिस्थितिकी, तीन सबसे महत्वपूर्ण क्षेत्र हैं.

गडकरी ने कहा, ”पर्यावरण और पारिस्थितकी बहुत महत्वपूर्ण हैं… वायु प्रदूषण के बारे में मुझे बताने की जरूरत नहीं. आप खुद इस समस्या को महसूस कर रहे हैं. हम दिल्ली में इसका सामना कर रहे हैं.” सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री ने कहा कि कुल वायु प्रदूषण का 40 प्रतिशत हिस्सा परिवहन ईंधन से आता है और यह देश, खासकर दिल्ली के लिए बड़ी समस्या है.

गडकरी ने कहा कि भारत जीवाश्म ईंधन आयात करने में 22 लाख करोड़ रुपये खर्च कर रहा है और जीवाश्म ईंधन के कारण ही ”हम प्रदूषण की समस्या को झेल रहे हैं.” उन्होंने कहा, ”हमें प्रदूषण कम करने के लिए वैकल्पिक ईंधन और जैव-ईंधन पर ध्यान देना होगा.” केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के मुताबिक मंगलवार को राष्ट्रीय राजधानी का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) ‘बेहद खराब’ श्रेणी में 360 रहा. यह सोमवार को 382 था. उन्होंने कहा कि भारत नयी तकनीक और नए नवाचार विकसित करके भी प्रदूषण कम कर सकता है.

गडकरी ने कहा कि एक्सप्रेसवे और आर्थिक गलियारों के तेज विस्तार की वजह से इस साल दिसंबर तक भारत में लॉजिस्टिक लागत एकल अंक में आ जाएगी. आईआईटी चेन्नई, आईआईटी कानपुर और आईआईएम बेंगलुरु की हाल की रिपोर्ट से पता चला कि एक्सप्रेसवे और आर्थिक गलियारों के निर्माण से भारत की लॉजिस्टिक लागत पहले के 16 प्रतिशत से घटकर 10 प्रतिशत रह गई है.
मंत्री ने कहा कि दिसंबर तक भारत की लॉजिस्टिक लागत नौ प्रतिशत पर आ जाएगी, जिससे भारत ज्यादा प्रतिस्पर्धी बनेगा. अमेरिका और यूरोपीय देशों में लॉजिस्टिक लागत 12 प्रतिशत है, जबकि चीन में 8 से 10 प्रतिशत.

भारत के वाहन क्षेत्र की बात करते हुए गडकरी ने कहा कि पांच साल के अंदर हमारा लक्ष्य भारत के वाहन उद्योग को दुनिया में अव्वल बनाना है. मंत्री ने कहा कि भारत की जीडीपी वृद्धि को ब­ढ़ाने के लिए कृषि पर ध्यान देना जरूरी है. मक्के से एथनॉल बनाने की अनुमति देने के बाद किसानों ने 45,000 करोड़ रुपये अतिरिक्त कमाए हैं. पहले मक्के का भाव 1,200 रुपये प्रति क्विंटल था और सरकार द्वारा मक्के से जैव-एथनॉल बनाने की अनुमति देने के बाद यह 2,800 रुपये प्रति क्विंटल हो गया. गडकरी ने कहा, ”हमने उत्तर प्रदेश और बिहार के किसानों को अतिरिक्त 45,000 करोड़ रुपये दिए हैं. इस वजह से बिहार और उत्तर प्रदेश में मक्के की खेती तीन गुना ब­ढ़ गई है. इससे इन राज्यों में विकास तेजी से होगा.”

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