बस्तर संभाग में आदिवासी संगठन के बंद का मिलाजुला असर रहा

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Tue, 23 Jan 2024 09:00 PM
बस्तर संभाग में आदिवासी संगठन के बंद का मिलाजुला असर रहा

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जगदलपुर. सुरक्षार्किमयों और नक्सलियों के बीच इस महीने के शुरू में हुई मुठभेड़ में एक बच्ची की मौत के विरोध में मंगलवार को छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में एक आदिवासी संगठन द्वारा आहूत बंद का मिलाजुला असर रहा. बंद का आह्वान सर्व आदिवासी समाज (एसएएस) ने किया था, जिसने हसदेव अरण्य क्षेत्र में कोयला खदान परियोजनाओं के लिए “वनों की कटाई” का विरोध कर रहे ग्रामीणों को अपना समर्थन दिया है. पुलिस ने कहा कि बंद शांतिपूर्ण रहा और बस्तर संभाग से किसी अप्रिय घटना की सूचना नहीं है.

जगदलपुर सहित संभाग के कुछ शहरों में व्यापारिक प्रतिष्ठान दोपहर तक बंद रहे. बाकी जगहों पर बंद का असर सबसे कम दिखा. आदिवासी बहुल बस्तर संभाग में सात जिले- कांकेर, कोंडागांव, नारायणपुर, बस्तर, बीजापुर, दंतेवाड़ा और सुकमा शामिल हैं. छत्तीसगढ़ में आदिवासी समूहों के एक निकाय, एसएएस के बस्तर संभाग के अध्यक्ष प्रकाश ठाकुर ने दावा किया, “बंद को समाज के सभी वर्गों में अच्छी प्रतिक्रिया मिली, खासकर व्यापारियों और व्यवसायियों से जिन्होंने इसे अपना समर्थन दिया.” बीजापुर जिले में गत एक जनवरी को नक्सलियों और सुरक्षाबलों के बीच मुठभेड़ में छह महीने की एक बच्ची की मौत हो गई थी तथा बच्ची की मां और जिला रिजर्व गार्ड के दो जवान घायल हो गए थे.

उत्तरी छत्तीसगढ़ में कोयला खदानों के लिए जैव विविधता से समृद्ध हसदेव अरण्य क्षेत्र में पेड़ों की कटाई का ग्रामीण विरोध कर रहे हैं.
बंद को ‘बस्तर चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज’ ने समर्थन दिया था. जगदलपुर और कोंडागांव तथा कांकेर सहित अन्य जिलों के मुख्यालयों में व्यावसायिक प्रतिष्ठान और दुकानें अपराह्न दो बजे तक बंद रहीं. नारायणपुर, सुकमा और दंतेवाड़ा जैसे जिलों में बंद का कोई खास असर नहीं दिखा. स्कूल और अस्पतालों, मेडिकल स्टोर और एम्बुलेंस सहित आवश्यक सेवाओं को बंद के दायरे से बाहर रखा गया था. क्षेत्र में परिवहन सेवा भी अप्रभावित रही.

By Yogesh Kumar Sahu