भाजपा उम्मीदवार जितिन प्रसाद ने पीलीभीत निर्वाचन क्षेत्र से पर्चा दाखिल किया

नामांकन के आखिरी दिन वरुण के पीलीभीत न पहुंचने पर अटकलों पर विराम

पीलीभीत. उत्तर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री जितिन प्रसाद ने पीलीभीत से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के उम्मीदवार के रूप में बुधवार को नामांकन दाखिल किया. पार्टी ने प्रसाद को मौजूदा सांसद वरुण गांधी की जगह पर प्रत्याशी बनाया है. पीलीभीत के सांसद वरुण गांधी को भाजपा ने टिकट नहीं दिया है, वह आज पीलीभीत में नही थे, और तमाम अटकलों के बावजूद उन्होंने अपना नामांकन पत्र दाखिल नहीं किया.

प्रसाद के वकील सरोज कुमार बाजपेयी ने पीटीआई-भाषा को बताया, ”प्रसाद ने जिला निर्वाचन अधिकारी के समक्ष हिंदी भाषा में चार सेटों में नामांकन पत्र जमा किया है. उन्होंने अपनी कुल चल और अचल संपत्ति 15 करोड़ रुपये दिखाई है.” उन्होंने बताया कि उनके नामांकन पत्र में चारों विधानसभाओं के भाजपा विधायकों-संजय गंगवार, बाबूराम पासवान, विवेक वर्मा और स्वामी प्रकाशानंद प्रस्तावक थे.

नामांकन के दौरान वरुण गांधी मौजूद नहीं थे और स्थानीय नेता उनकी अनुपस्थिति के बारे में चुप्पी साधे हुए हैं. नामांकन से पहले प्रसाद ने शहर स्थित मां यशवंती देवी के मंदिर में मत्था टेका और उसके बाद विधि-विधान से पूजा-अर्चना की. नामांकन के बाद मंदिर परिसर में ही चुनावी सभा का आयोजन किया गया.

प्रदेश के लोक निर्माण मंत्री प्रसाद ने कहा, ”मैं मुझको चुनाव मैदान में उतारने के लिए भाजपा के राष्ट्रीय और राज्य नेतृत्व को धन्यवाद देता हूं. मैं पीलीभीत लोकसभा सीट से चुनाव जीतकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों को मजबूत करने के लिए काम करूंगा.” पीलीभीत सीट पर पिछले चार लोकसभा चुनावों से भाजपा का ही कब्जा है. वर्तमान में वरुण गांधी यहां से सांसद हैं. प्रसाद ने 2004 में कांग्रेस के टिकट पर शाहजहांपुर सीट से लोकसभा चुनाव जीता था और 2009 में वह धौरहरा सीट से जीते थे और तत्कालीन कांग्रेस सरकार में राज्य मंत्री बनाए गए थे.

पार्टी के वरिष्ठ नेता और योगी आदित्यनाथ कैबिनेट में मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा, ”वरुण गांधी हमारे नेता हैं और पार्टी उनका इस्तेमाल अन्य जगह पर करेगी.” पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष भूपेन्द्र चौधरी ने मंगलवार को संभल में पत्रकारों से बातचीत में भी कुछ इसी तरह की बात कही. उन्होंने कहा था, ”वरुण गांधी एक वरिष्ठ नेता हैं और पार्टी जल्द ही उन्हें कुछ जिम्मेदारियां सौंपेगी.”

पीलीभीत सीट 1989 से मेनका गांधी और उनके बेटे वरुण गांधी के पास रही है. मेनका ने 1989 में जनता दल के टिकट पर इस सीट से जीत हासिल की और 1996 में उसी पार्टी से और 1998 में एक स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में अपनी जीत दोहराई. उन्होंने 2004 में भाजपा उम्मीदवार के रूप में इस सीट से एक बार फिर जीत हासिल की . उनके बेटे वरुण गांधी 2009 में भाजपा के टिकट पर इस सीट से जीते थे. 2014 में मेनका गांधी इस सीट पर लौटीं और भाजपा के टिकट पर जीत हासिल की . 2019 में वरुण गांधी भाजपा के टिकट पर इस सीट से जीते थे .

नामांकन के आखिरी दिन वरुण के पीलीभीत न पहुंचने पर अटकलों पर विराम

लोकसभा चुनाव के पहले चरण के नामांकन दाखिल करने के आखिरी दिन मौजूदा सांसद वरुण गांधी यहां नहीं पहुंचे, जिससे उन सभी अटकलों पर विराम लग गया कि पार्टी द्वारा टिकट नहीं दिए जाने के बाद वह निर्दलीय मैदान में उतर सकते हैं. सभी की निगाहें इस बात पर टिकी थी कि आखिरी दिन वरुण गांधी अपना नामांकन दाखिल करते हैं या नहीं . पिछले सप्ताह उनके प्रतिनिधि द्वारा नामांकन पत्र खरीदे जाने के बाद चर्चा तेज हो गई थी.

पार्टी ने वरुण गांधी की जगह राज्य सरकार के मंत्री जितिन प्रसाद को पीलीभीत सीट से उम्मीदवार बनाया है. तीन दशकों से अधिक समय में यह पहला मौका है जब मां-बेटे की जोड़ी राज्य के तराई क्षेत्र के पीलीभीत निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव मैदान में नहीं होगी. जितिन प्रसाद ने बुधवार को प्रदेश अध्यक्ष भूपेन्द्र चौधरी और सरकार में मंत्री स्वतंत्र देव सिंह की मौजूदगी में इस सीट से नामांकन दाखिल किया .

मेनका गांधी या फिर वरुण 1989 से लगातार इस सीट से चुनाव लड़ते आ रहे हैं, लेकिन, इस बार दोनों में से कोई भी यहां से मैदान में नहीं है. किसानों, स्वास्थ्य और नौकरियों के मुद्दों पर कई बार भाजपा की आलोचना करने वाले वरुण गांधी को इस बार पार्टी ने टिकट नहीं दिया. टिकट नहीं मिलने के बाद ऐसी खबरें आ रही थीं कि वरुण गांधी इस सीट से निर्दलीय चुनाव लड़ सकते हैं. बुधवार को दिन में तीन बजे नामांकन खत्म होने से पहले वरुण गांधी के नहीं आने पर संदेह खत्म हो गया.

हालांकि उनकी मां और सुल्तानपुर से मौजूदा सांसद मेनका गांधी को भाजपा ने उसी सीट से एक बार फिर से उम्मीदवार बनाया है .
पीलीभीत सीट पर 1989 से मेनका गांधी और उनके बेटे वरुण गांधी चुनाव लड़ते आ रहे हैं. मेनका ने 1989 में जनता दल के टिकट पर इस सीट से जीत हासिल की हालांकि, 1991 में उन्हें हार का सामना करना पड़ा . इसके बाद 1996 में एक बार फिर जनता दल के टिकट पर वह संसद पहुंची . इसके बाद 1998 और 1999 में निर्दलीय उम्मीदवार के तौर निर्वाचित घोषित हुयी थी .

मेनका ने वर्ष 2004 और 2014 में भाजपा उम्मीदवार के तौर पर इस सीट पर जीत दर्ज की. मेनका के बेटे वरुण गांधी ने 2009 और 2019 में भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ा और लोकसभा पहुंचे. भाजपा उम्मीदवार जितिन प्रसाद के नामांकन दाखिल करने के बाद एक रैली को संबोधित करते हुए, राज्य भाजपा अध्यक्ष भूपेन्द्र चौधरी ने कहा, “वरुण गांधी एक वरिष्ठ नेता हैं और पार्टी जल्द ही उन्हें कोई जिम्मेदारी देगी.” रैली में मौजूद स्वतंत्र देव सिंह ने कहा, “वरुण गांधी हमारे नेता हैं और पार्टी उनका इस्तेमाल किसी और जगह करेगी.” मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी ने पीलीभीत से भगवत सरन गंगवार को अपना उम्मीदवार बनाया है. बहुजन समाज पार्टी ने इस सीट से अनीस अहमद खान को मैदान में उतारा है .

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