नयी दिल्ली. दिल्ली की एक अदालत ने संसद की सुरक्षा में सेंध लगाने के मामले में गिरफ्तार ललित झा को शुक्रवार को सात दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया. दिल्ली पुलिस ने दावा किया कि झा इस घटना का ”मुख्य साजिशकर्ता” है. विशेष न्यायाधीश हरदीप कौर ने अभियोजन पक्ष द्वारा दाखिल उस अर्जी पर झा को दिल्ली पुलिस की हिरासत में भेज दिया, जिसमें कहा गया था कि पूरी साजिश का खुलासा करने के लिए उससे पूछताछ की जरूरत है.
सुनवाई के दौरान अभियोजक ने अदालत को बताया कि झा को बृहस्पतिवार की रात गिरफ्तार किया गया था, जिसके बाद उससे ”विस्तृत पूछताछ” की गई. लोक अभियोजक ने झा को 15 दिन की हिरासत में भेजे जाने का अनुरोध करते हुए कहा, ”उसने खुलासा किया कि कैसे वह पूरी घटना का साजिशकर्ता है… उसे पूरी साजिश और तौर-तरीकों का खुलासा करना है.” पुलिस ने यह भी कहा कि उससे उस फोन के बारे में पूछताछ करने की जरूरत है जिसका वह इस्तेमाल कर रहा था और अभी तक उसका पता नहीं चला है.
पुलिस ने दावा किया कि झा ने स्वीकार किया है कि आरोपियों ने संसद की सुरक्षा में सेंध लगाने की साजिश रचने के लिए कई बार मुलाकात की. पुलिस ने अदालत से कहा, ”झा ने खुलासा किया कि वे (आरोपी) देश में अराजकता पैदा करना चाहते थे ताकि वे सरकार को अपनी मांगों को पूरा करने के लिए मजबूर कर सकें. उसने बड़ी साजिश के तहत उन्हें छुपाने और सबूत नष्ट करने के लिए (अन्य आरोपियों के) फोन ले लिए. उसने खुलासा किया कि जयपुर से दिल्ली जाते वक्त रास्ते में उसने अपना फोन फेंक दिया था.”
पुलिस ने कहा कि ”हमले की बड़ी साजिश, अन्य व्यक्तियों की संलिप्तता और हमले के पीछे के वास्तविक मकसद का पता लगाने के लिए गहन जांच” के लिए झा से हिरासत में पूछताछ की आवश्यकता है. पुलिस ने कहा कि इसके अलावा, यह पता लगाने के लिए भी उससे पूछताछ की आवश्यकता है कि क्या आरोपी का किसी दुश्मन देश या आतंकवादी संगठन से कोई संबंध तो नहीं है.
संसद की सुरक्षा में चूक का मामला: जूते के सोल में छिपाकर धुआं फैलाने वाला ‘केन’ लेकर आए थे आरोपी
लोकसभा कक्ष में ‘केन’ से धुआं फैलाने वाले दो युवक अपने जूतों के बाएं सोल को काटकर बनाई गई जगह में रखकर इन्हें (केन) लाए थे. दिल्ली पुलिस की प्राथमिकी में यह बात कही गई है. मनोरंजन डी और सागर शर्मा नाम के ये युवक लोकसभा में जिन पर्चों को लेकर आए थे, उनमें तिरंगे की पृष्ठभूमि में मुट्ठी की तस्वीर थी और मणिपुर की हिंसा पर हिंदी और अंग्रेजी में एक-एक नारा लिखा था.
संसद पर 2001 में किए गए आतंकी हमले की बरसी के दिन बुधवार को, सुरक्षा में चूक की बड़ी घटना उस वक्त हुई, जब लोकसभा की कार्यवाही के दौरान दर्शक दीर्घा से दो लोग सदन के भीतर कूद गए और ‘केन’ के जरिये पीले रंग का धुआं फैला दिया. घटना के तत्काल बाद दोनों को सांसदों ने पकड़ लिया. लगभग उसी समय संसद भवन के बाहर अमोल शिंदे और नीलम देवी ने ‘केन’ से लाल और पीले रंग का धुआं फैलाते हुए ”तानाशाही नहीं चलेगी’ जैसे नारे लगाए.
पुलिस ने चारों के खिलाफ विधिविरुद्ध क्रियाकलाप (निवारण) अधिनियम (यूएपीए) के प्रावधानों के तहत आरोप दर्ज किए हैं. प्राथमिकी के अनुसार, संसद भवन के अंदर और बाहर खोली गई धुएं की केन पर चेतावनी और निर्देश लिखे थे कि ”खोलते समय चश्मे और दस्तानों का इस्तेमाल किया जाए.” प्राथमिकी में लिखा गया है कि सागर शर्मा के एलसीआर के बने स्लेटी (ग्रे) रंग के जूते के बाएं सोल को काटकर जगह बनाई गई थी और सोल की मोटाई एक अतिरिक्त रबर लगाकर बढ़ाई गई. इसमें कहा गया कि मनोरंजन के भी बाएं जूते के सोल में भी इसी तरह जगह बनाई गई थी. पुलिस ने कहा कि दाएं जूते का सोल भी आंशिक रूप से कटा मिला है.
पुलिस ने एक पुलिसकर्मी की शिकायत पर संसद मार्ग थाने में प्राथमिकी दर्ज की है. प्राथमिकी में कहा गया, ”मैं संसद मार्ग थाना के कार्यवाहक एसएचओ निरीक्षक विनय और अन्य कर्मचारियों के साथ नए संसद भवन के सुरक्षा निदेशक के कार्यालय पहुंचा, जहां ओंकार सिंह, उप निदेशक (एस) लोकसभा मौजूद थे.”
प्राथमिकी के अनुसार, ”उन्होंने उपरोक्त लोगों सागर शर्मा और मनोरंजन डी के नाम के साथ शिकायत मुझे सौंपी. उन्होंने दोनों आरोपियों के जूते और उनके आधार कार्ड भी सौंपे.” पुलिस ने कहा कि दो अन्य आरोपियों अमोल शिंदे और नीलम को चार इस्तेमाल की हुई रंगीन धुएं की केन के साथ पकड़ा गया था. उनके पास एक केन बिना इस्तेमाल की हुई भी थी. पुलिस ने बताया कि इन केन पर उपयोगकर्ताओं के लिये चेतावनी थी कि वे इसका इस्तेमाल करते वक्त चश्मा और दस्ताने पहनें और इसका बंद कमरे या बंद जगह पर कभी उपयोग नहीं करें.
दिल्ली पुलिस की विशेष शाखा ने संसद की सुरक्षा में चूक के मामले में दो और लोगों से पूछताछ की. एक आधिकारिक सूत्र ने बृहस्पतिार को यह जानकारी दी थी. सूत्र ने बताया कि विशेष प्रकोष्ठ की ‘काउंटर इंटेलीजेंस इकाई’ ने बृहस्पतिवार देर रात दो लोगों को पकड़ा. इनमें से एक को राजस्थान से पकड़ा गया.
उसने बताया कि इन दोनों ने ललित मोहन झा की मदद की थी, जिसे संसद की सुरक्षा में चूक की घटना का कथित तौर पर मुख्य षड्यंत्रकारी बताया जा रहा है. पुलिस सूत्र ने बताया कि झा बुधवार से ही फरार था. सूत्र ने बताया कि वह बृहस्पतिवार रात को नयी दिल्ली जिले में स्थित एक पुलिस थाने पहुंचा. उससे ‘काउन्टर इंटेलीजेंस टीम’ पूछताछ कर रही है.