कांग्रेस एक ‘स्थापित कंपनी’ की तरह, भाजपा ‘स्टार्टअप’ है: जयराम रमेश

नयी दिल्ली. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने लोकसभा चुनाव से ठीक पहले अपनी पार्टी की वापसी की उम्मीद जताते हुए कहा है कि देश का सबसे पुराना दल एक ऐसी ‘स्थापित कंपनी’ की तरह है जिसके ‘मार्केट कैप’ में उतार-चढ़ाव होते रहते हैं. कांग्रेस की तुलना में भाजपा को उन्होंने एक ‘स्टार्टअप’ करार दिया.

रमेश ने ”पीटीआई मुख्यालय” में समाचार एजेंसी के संपादकों एवं पत्रकारों के साथ बातचीत में इस बात पर भी जोर दिया कि चुनावी सफलता के लिए संगठनात्मक शक्ति का होना जरूरी है. साथ ही, उन्होंने इस धारणा को भी खारिज किया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का ‘करिश्माई नेतृत्व’ भारतीय जनता पार्टी की सफलता का अकेला कारण है.

कांग्रेस महासचिव रमेश ने कहा कि ‘करिश्माई नेता’ की अवधारणा पर विश्वास करना एक ”खतरनाक विचार” है क्योंकि ऐसा करना ‘डेमागॉग’ में विश्वास करना है. ‘डेमागॉग’ एक ऐसे नेता को कहते हैं जो तर्कसंगत बातों के बजाय आम लोगों की इच्छाओं और पूर्वाग्रहों के जरिये अपने लिए समर्थन चाहता है.

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने स्वीकार किया कि पार्टी में पीढ़ीगत बदलाव और नए चेहरों को आगे लाने की जरूरत है. रमेश ने कहा कि कांग्रेस में यह मुश्किल है क्योंकि लोग लंबे समय से पार्टी में हैं. कांग्रेस नेता ने कहा, ”भाजपा के लिए यह आसान है क्योंकि आप जानते हैं कि भाजपा कई राज्यों में एक ‘स्टार्टअप’ है. आप भाजपा को एक स्टार्टअप के रूप में देखते हैं, कांग्रेस एक स्टार्टअप नहीं है, कांग्रेस एक अच्छी तरह से स्थापित कंपनी है जिसके ‘मार्केट कैप’ में उतार-चढ़ाव होता रहता है.” मार्केट कैप शेयर बाजार में प्रयुक्त होने वाला एक शब्द है जिसका अर्थ किसी कंपनी के कुल शेयरों के बाजार मूल्य से है.

रमेश के अनुसार, एक ‘स्टार्टअप’ बहुत सारे लोगों को समाहित करने में सक्षम होता है, ऐसे में जिसे कांग्रेस में टिकट नहीं मिलता, वह भाजपा में शामिल हो जाता है इसलिए कई राज्यों में कांग्रेस का नुकसान यह है कि वह दशकों से वहां स्थापित है. उन्होंने कहा कि किसी स्थान पर जमे रहने का एक नुकसान यह है कि आप नए लोगों को आने का मौका नहीं दे पाते.

कांग्रेस महासचिव ने कहा, ”लेकिन, यह धीरे-धीरे हो रहा है, यह कुछ राज्यों में हो रहा है. यह निश्चित रूप से तेजी से होना चाहिए.” यह पूछे जाने पर कि क्या कांग्रेस में केंद्रीय नेतृत्व के स्तर पर बदलाव की जरूरत है और पीढ़ीगत बदलाव क्यों नहीं हो रहा है तो रमेश ने कहा कि कांग्रेस एकमात्र ऐसी पार्टी है जिसका निर्वाचित अध्यक्ष है.

उनका कहना था, ”हम व्यक्तियों को बहुत अधिक महत्व देते हैंङ्घ यदि आप भारतीय राजनीति पर रजनी कोठारी द्वारा लिखित पुस्तक पढ़ेंगे तो उसमें जो बात कही गई है, वह यह है कि पहले कांग्रेस में एक ‘सिस्टम’ होता था और वह पहली बार 1969 में पार्टी के विभाजन के साथ टूट गया. फिर 1978 में पार्टी के दूसरे विभाजन के साथ यह आगे और ज्यादा प्रभावित हो गया.” रमेश ने कहा, ”आपके पास शीर्ष पर करिश्माई नेतृत्व हो सकता है, लेकिन अगर जिला स्तर पर, ब्लॉक स्तर पर और राज्य स्तर पर आपके पास गुटों में मध्यस्थता, कलह को संभालने और लोगों को एकसाथ लाने की व्यवस्था नहीं है तो कोई भी एक व्यक्ति फर्क नहीं डालने वाला है.”

कांग्रेस नेता के मुताबिक, ”मैं करिश्माई नेता वाली अवधारणा में बहुत विश्वास नहीं रखता…इस पर विश्वास करना एक बहुत ही खतरनाक विचार है, इसीलिए मैं इसमें विश्वास नहीं करता हूं. अगर मैं किसी करिश्माई नेता पर विश्वास करना शुरू कर दूं तो मैं स्वत: एक ‘डेमागॉग’ में विश्वास करने लगता हूं, फिर मैं मुसोलिनी (इतालवी तानाशाह) में विश्वास करने लगता हूं.” रमेश ने इस बात को भी खारिज कर दिया कि देश के लगभग 40 प्रतिशत लोग ‘करिश्माई नेता’ की अवधारणा में विश्वास करते हैं. कांग्रेस नेता ने कहा कि उनके विश्लेषण के अनुसार, भाजपा के 36 प्रतिशत वोट शेयर में से कम से कम 22-23 प्रतिशत संगठन के कारण है. उन्होंने कहा कि हो सकता है कि मोदी ने कुछ प्रतिशत वोट जोड़े हों.

यह पूछे जाने पर कि क्या प्रधानमंत्री मोदी का ”करिश्मा और भाषण कला” भाजपा को अलग बना रही है, रमेश ने कहा, ”नहीं. मुझे लगता है कि यह संगठन ही है जो बहुत बड़ा अंतर पैदा करता है. आपके पास वह सारा करिश्मा हो सकता है जो आप चाहते हैं, लेकिन अगर आप मतदान के दिन उस करिश्मे का उपयोग नहीं कर पाएंगे, तो करिश्मे का कोई फायदा नहीं होगा.” उन्होंने कहा, ”मुझे लगता है कि हमें करिश्मे के पीछे नहीं जाना चाहिए, हमें सिस्टम (प्रणाली) के पीछे जाना चाहिए.”

एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, ”मुझे यकीन है कि अरविंद केजरीवाल के बाद कांग्रेस के कुछ नेताओं को निशाना बनाया जाएगा…आज हम जिस प्रतिद्वंद्वी का सामना कर रहे हैं वह किसी नियम, किसी परंपरा, किसी परिपाटी का पालन नहीं करता है और निष्ठुर है.” यह पूछे जाने पर कि लोकसभा में कांग्रेस को कितनी सीट मिलेंगी, तो रमेश ने कहा कि जिस पार्टी को 2003 में खारिज कर दिया गया था, वह पांच महीने बाद सबसे बड़ी पार्टी बन गई थी. उन्होंने कहा, ”इसी तरह के सवाल 2004 में भी उठाए गए थे. इसलिए, मैं इस संभावना को खारिज नहीं करूंगा कि आपको कोई बड़ा आश्चर्य देखने को मिल सकता है.”

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