राहुल गांधी की कांग्रेस नेता मनीष तिवारी ने की सराहना; कहा – ‘पीएम इन वेटिंग’ होता है नेता प्रतिपक्ष

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Wed, 28 Aug 2024 07:46 PM
राहुल गांधी की कांग्रेस नेता मनीष तिवारी ने की सराहना; कहा – ‘पीएम इन वेटिंग’ होता है नेता प्रतिपक्ष
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नयी दिल्ली. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मनीष तिवारी ने जनता के मुद्दे उठाने और मणिपुर जैसे मामलों में ”मरहम” लगाने के लिए राहुल गांधी की तारीफ करते हुए कहा कि हर नेता प्रतिपक्ष ”पीएम इन वेटिंग” होता है. राहुल, हाल में संपन्न हुए लोकसभा चुनाव के बाद संसद के निचले सदन में नेता प्रतिपक्ष बने हैं. तिवारी ने ‘पीटीआई’ के विशेष कार्यक्रम ‘@4पार्लियामेंट स्ट्रीट’ में समाचार एजेंसी के संपादकों के साथ बातचीत के दौरान राहुल गांधी की सराहना की.

यह पूछे जाने पर कि राहुल गांधी लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं, ऐसे में क्या अब उन्हें भावी प्रधानमंत्री के रूप में देखा जा रहा है, तिवारी ने कहा, ”हर नेता प्रतिपक्ष ‘पीएम इन वेटिंग’ होता है…. जहां तक ??राहुल गांधी का सवाल है, उनके भाषणों को पूरे देश में बहुत पसंद किया गया है, उन्होंने ऐसे मुद्दे उठाए हैं जो लोगों के दिल और दिमाग के करीब हैं.” उन्होंने कहा कि विपक्ष के नेता के रूप में राहुल गांधी ने जो यात्राएं कीं, यहां तक ??कि मणिपुर जैसे जगहों की, जहां ”मरहम” लगाने की आवश्यकता थी, वहां मरहम भी लगाया. तिवारी ने कहा कि यह वास्तव में राहुल गांधी की ”परिपक्वता” का भी प्रमाण है.

लोकसभा में 10 साल के अंतराल के बाद यह पहली बार है जब एक नेता प्रतिपक्ष है, क्योंकि सबसे बड़े विपक्षी दल कांग्रेस के पास 16वीं और 17वीं लोकसभा में इस पद के लिए दावा करने को लेकर आवश्यक 10 प्रतिशत सदस्य नहीं थे. राहुल इस बार लोकसभा में उत्तर प्रदेश की रायबरेली सीट का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं. इससे पहले, वह तीन बार अमेठी और एक बार वायनाड का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं.

चीन के मामले पर विस्तृत चर्चा की जरूरत, सरकार के रुख में ‘झिझक और अपारदर्शिता’: तिवारी

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मनीष तिवारी ने चीन के साथ सीमा गतिरोध पर संसद में चर्चा कराने में कथित ”झिझक और अपारर्दिशता” के लिए मोदी सरकार की आलोचना की और बीजिंग के साथ भारत के समग्र संबंधों पर एक विस्तृत चर्चा की आवश्यकता पर बल दिया. तिवारी ने यह आरोप भी लगाया कि रक्षा और विदेश मंत्रालय संसदीय छानबीन से मुक्त हैं.

उन्होंने 1962 के भारत-चीन सीमा युद्ध के दौरान संसद में चर्चा होने का उदाहरण दिया और इस बात का उल्लेख किया कि 1971 में जब पाकिस्तान के साथ लड़ाई चल रही थी तो तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने संसद को जानकारी दी थी. तिवारी पिछले कई सत्रों से संसद में चीन के विषय पर चर्चा कराने की मांग कर रहे हैं. उन्होंने 17वीं और वर्तमान लोकसभा में भी इस विषय पर कार्यास्थगन के कई नोटिस दिए हैं.

उन्होंने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ”अपारर्दिशता का यह दृष्टिकोण, यह दिखावा करने की कोशिश करना कि सब कुछ ठीक है… मुझे नहीं लगता कि इससे देश को मदद मिलेगी.” चीन के साथ वर्तमान सीमा मुद्दे का उल्लेख करते हुए तिवारी ने कहा, ”आपके पास 50,000-60,000 सैनिक हैं जो आंखों में आंखें डालकर डंटे हुए हैं और दूसरी ओर आपका चीन के साथ व्यापार संबंध है, जो वास्तव में बढ़ते व्यापार घाटे के साथ भारत के लिए नुकसानदेह साबित हो रहा है.” कांग्रेस नेता ने यह कहा कि चीन के साथ भारत के समग्र संबंधों पर एक विस्तृत चर्चा की आवश्यकता है.

लोकसभा चुनाव के नतीजे ने भारत को ‘सांस लेने’ का मौका दिया: मनीष तिवारी

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मनीष तिवारी ने कहा कि इस साल हुए लोकसभा चुनाव के नतीजे संख्या बल के लिहाज से नहीं, बल्कि इस मायने में अहम हैं कि एक बार फिर से भारत को ”सांस लेने” और इसके संस्थानों को काम करने का मौका मिला है. उन्होंने ‘पीटीआई’ के विशेष कार्यक्रम ‘@4पार्लियामेंट स्ट्रीट’ में समाचार एजेंसी के संपादकों के साथ बातचीत में यह भी कहा कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) इस बात को स्वीकार करे या न करे, लेकिन कुछ मुद्दों पर सरकार के हालिया ”यू-टर्न” गठबंधन राजनीति की वास्तविकताओं को दर्शाते हैं.

पूर्व केंद्रीय मंत्री तिवारी का मानना ??है कि भारत को ”लोकतांत्रिक सुधारों की दूसरी लहर” की जरूरत है तथा देश की, लोकतांत्रिक ढांचे को रेखांकित करने वाली संरचनाओं को वास्तव में अधिक सहभागी, समावेशी और लोकतांत्रिक बनाने की आवश्यकता है. उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस और उसके सहयोगी आगामी विधानसभा चुनावों में जीत की ओर बढ़ रहे हैं, जिसका राष्ट्रीय राजनीति पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा.

लोकसभा चुनाव परिणामों के बाद के परिदृश्य के बारे में पूछे जाने पर तिवारी ने कहा, ”आपको 2023 के नवंबर-दिसंबर तक, पीछे जाने की जरूरत है, जो 2003 के नवंबर-दिसंबर के समान थे. उस समय भी भाजपा ने राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में जीत हासिल की थी. यह ‘भारत उदय’ (इंडिया शाइनिंग) का क्षण था. उसके बाद 2004 के चुनावों में जो हुआ, वह इतिहास है जिसे मुझे दोहराने की ज.रूरत नहीं है.”

तिवारी ने कहा, ”नवंबर-दिसंबर, 2023 में भाजपा ने राजस्थान, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में जीत हासिल की और ‘अबकी बार, 400 पार’ की बातें होने लगीं. ‘अबकी बार, 400 पार’ तो संविधान को निरस्त करना और उसके स्थान पर किसी ऐसी चीज. को लाना था जो, उस समय की भाजपा के पूर्वर्वितयों की सोच के अनुरूप था जब संविधान सभा संविधान को तैयार कर रही थी.” चंडीगढ़ से लोकसभा सदस्य तिवारी के मुताबिक, संयुक्त विपक्ष लोकसभा में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के सांसदों की संख्या लगभग 300 तक सीमित रखने में सक्षम हुआ और भाजपा 240 तक सिमट गई.

उन्होंने कहा, ”सबसे अच्छी शुरुआत यह हुई कि इसने इस देश को सांस लेने का और संस्थानों को फिर से काम शुरू करने का मौका दिया है.” कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने कहा, ”पूरी तरह से कठोरता का माहौल, जिसके तहत हर किसी ने अपने मष्तिष्क में एक सेंसर स्थापित किया हुआ था, कम से कम वह अब जून 2024 से पीछे रह गया है.” तिवारी ने कहा, ”मुझे नहीं लगता कि 2024 का चुनाव संख्या बल के संदर्भ में अहम था, बल्कि यह इसको लेकर महत्वपूर्ण था कि इसने भारत को फिर से सांस लेने का मौका दिया.” यह पूछा गया कि क्या कांग्रेस के भीतर कभी ‘जी23’ समूह ने संगठनात्मक सुधारों का आ”ान किया था और जो मांगें की गई थीं, क्या वे पूरी हो गईं? इस पर तिवारी ने कहा कि उस समय किए गए इस प्रयास को संकीर्ण नजरिये से देखना इसका गलत अर्थ निकालना होगा.

उन्होंने कहा, ”भारत को लोकतांत्रिक सुधारों की दूसरी लहर की आवश्यकता है, जिसके तहत आपको उन संरचानाओं को खोलने की जरूरत है जो वास्तव में भारत के लोकतांत्रिक ढांचे को रेखांकित करती हैं. उन्हें अधिक भागीदारीपूर्ण, समावेशी और लोकतांत्रिक होने की आवश्यकता है.” तिवारी ने कहा कि कांग्रेस आज एकमात्र ऐसी पार्टी है जिसके पास लोकतांत्रिक तरीके से निर्वाचित अध्यक्ष है, जहां पूरी तरह से लोकतांत्रिक प्रक्रिया अपनाई गई, और ऐसे लोगों के पास विकल्प था जिन्होंने आंतरिक चुनाव भी लड़ा था और बाद में पार्टी की नीति निर्धारण इकाई का हिस्सा बनाए गए.

यह पूछे जाने पर कि जब वह पार्टी में बड़े पैमाने पर सुधारों की मांग करने वाले ‘जी23’ समूह के सदस्य थे, तो क्या उन्हें कांग्रेस में हाशिए पर महसूस कराया गया था, तिवारी ने ‘ना’ में जवाब दिया और कहा कि अगर किसी का राजनीति में आने का उद्देश्य आकांक्षा तक सीमित है तो वह अलग-थलग होने की भावना से ग्रस्त हो जाता है.

हरियाणा, जम्मू-कश्मीर, महाराष्ट्र और झारखंड में विधानसभा चुनावों पर तिवारी ने कहा कि 2024 के लोकसभा चुनाव परिणाम का भारत के लोकतांत्रिक ढांचे पर सकारात्मक प्रभाव पड़ा, विधानसभा चुनावों के नतीजे भी देश के लोकतांत्रिक ढांचे को मजबूत करेंगे.
उन्होंने उम्मीद जताई कि कांग्रेस और सहयोगी दल इन चुनावों में अच्छा प्रदर्शन करेंगे.

मोदी सरकार के कुछ फैसलों पर पीछे हटने को लेकर तिवारी ने कहा, ”इसका मुख्य कारण गठबंधन सरकार है और यह एक वास्तविकता है. वे इसे स्वीकार करें या नहीं करें, लेकिन यह एक वास्तविकता है जो हर फैसले में दिखाई देगी.” तिवारी ने जनता के मुद्दे उठाने और मणिपुर जैसे मामलों में ”मरहम” लगाने के लिए राहुल गांधी की तारीफ करते हुए कहा कि हर नेता प्रतिपक्ष ”पीएम इन वेटिंग” होता है. राहुल, हाल में संपन्न हुए लोकसभा चुनाव के बाद संसद के निचले सदन में नेता प्रतिपक्ष बने हैं.

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