प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज अपने सार्वजनिक जीवन के 25 साल पूरे कर चुके हैं। ऐसे में दिल्ली के इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम में सभा का आयोजन किया गया। ‘विकसित भारत संकल्प सभा-सेवा ज्योति यात्रा’ कार्यक्रम में पीएम मोदी ने लोगों का जज्बा बढ़ाने वाला भाषण दिया। पीएम मोदी ने कहा कि We Will Do It (हम करके रहेंगे) यह अहसास ही अमृत है।
जिसने जिताया, उसने विनम्र होना सिखाया
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि मेरी सीखने की क्षमता कभी कम न हो। मैं जितना सीखूंगा, देश के लिए करने का सामर्थ्य उतना ही बढ़ेगा। जब मैं पीछे मुड़कर देखता हूं तो कृतज्ञता का भाव ही आता है। मैं कृतज्ञ हूं हर उस व्यक्ति हर उस घटना के प्रति, जिसने मुझे कुछ न कुछ सिखाया। जिसने मुझे जिताया उसने मुझे विनम्र होना सिखाया। जिसने मुझे गिराया, उसने मुझे फिर उठना सिखाया।
सीखने की ललक जीवन का हिस्सा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि मुझे याद है कि जब मैं वडनगर के स्कूल में पढ़ने जाता था, तब हमारे मास्टर जी तरह-तरह के पाठ पढ़ाते थे और क्लास में सबसे पहले पहुंचने वाले छात्र में हमेशा मेरा नाम होता था। सीखने की वो ललक मेरे जीवन का हिस्सा बन गई और मैं आज भी स्वयं को एक विद्यार्थी ही मानता हूं। हर दिन कुछ नया सीखने का प्रयास करता हूं।
आज अपने लिए भी प्रार्थना की: मोदी
पीएम मोदी ने आगे कहा कि आज प्रातः मैं श्री विनायक मंदिर में दर्शन के लिए गया था। मैंने परमात्मा के सामने देश के लिए प्रार्थना की, 140 करोड़ भारतवासियों के लिए प्रार्थना की और अपने लिए भी प्रार्थना की। प्रार्थना ये कि परमात्मा मुझे इतनी शक्ति और सामर्थ्य दीजिए कि मैं अपने देश के लिए और अधिक ऊर्जा के साथ काम कर सकूं। देशवासियों की और अधिक सेवा कर सकूं, दिन-रात सेवा कर सकूं।
जनता का सबसे बड़ा योगदान
प्रधानमंत्री ने आगे कहा कि आज मैं जो कुछ हूं, जहां भी हूं, जिस दायित्व पर हूं, उसमें सबसे बड़ा योगदान जनता-जनार्दन का ही है। मेरे लिए जनता-जनार्दन ईश्वर का ही रूप है। लाखों-करोड़ों देशवासियों के विश्वास और लाखों कार्यकर्ताओं का परिश्रम ही, मेरी सबसे बड़ी शक्ति रही है। ये 25 वर्ष का अनुभव बहुत बड़ी पूंजी है और ये पूंजी सिर्फ मोदी की नहीं है ये पूंजी देश की है।