नयी दिल्ली. राष्ट्रीय राजधानी के लिए मुख्यमंत्री चुनने में देरी को लेकर भारतीय जनता पार्टी पर कटाक्ष करते हुए आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता और दिल्ली के पूर्व मंत्री गोपाल राय ने सोमवार को कहा कि दिल्ली में पहले की तरह अगले पांच वर्ष में फिर से तीन अलग-अलग मुख्यमंत्री देखने को मिल सकते हैं.
राय ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि भाजपा अपनी निर्णायक जीत के बावजूद नेता चुनने में संघर्ष कर रही है, जो पार्टी के भीतर गहरे आंतरिक विभाजन को दर्शाता है. उन्होंने कहा, “10 दिन बाद भी वे मुख्यमंत्री का चयन नहीं कर पाए हैं, जिससे पता चलता है कि उनके पास कोई चेहरा नहीं है. वास्तविकता यह है कि इतिहास खुद को दोहरा सकता है और हम अगले पांच वर्ष में तीन मुख्यमंत्री देख सकते हैं, जैसा कि दिल्ली में पिछली भाजपा सरकार के दौरान हुआ था.” राय ने दोहराया कि आम आदमी पार्टी एक मजबूत विपक्ष के रूप में काम करेगी और यह सुनिश्चित करेगी कि भाजपा दिल्ली की जनता से किए गए अपने वादे पूरे करे.
उन्होंने कहा, “भाजपा ने निर्वाचन आयोग के साथ मिलीभगत करके प्रचार के दौरान अपनी सारी रणनीति अपनाई. उनकी सारी ताकत के बावजूद दिल्ली के लोग हमारे साथ खड़े रहे और हम इसके लिए उनके आभारी हैं. सीट के मामले में अंतर है, लेकिन हमने फैसला किया है कि आप लोगों के साथ खड़ी होगी और भाजपा के खिलाफ आवाज उठाएगी.” आप नेता ने भाजपा पर आंतरिक सत्ता संघर्ष का भी आरोप लगाया और कहा कि जो भी मुख्यमंत्री बनेगा उसे पार्टी के भीतर अन्य गुटों के प्रतिरोध का सामना करना पड़ेगा.
उन्होंने कहा, “मुख्यमंत्री पद को लेकर अनिर्णय से पता चलता है कि भाजपा के भीतर कितने सत्ता समूह काम कर रहे हैं. कोई भी चुना जाए, अन्य समूह उनके नेतृत्व को बाधित करने की कोशिश करेंगे और इतिहास खुद को दोहराएगा.” भाजपा द्वारा अभी तक अपना मुख्यमंत्री उम्मीदवार तय नहीं किए जाने के बीच राय ने घोषणा की कि आप जमीनी स्तर पर अपना समर्थन मजबूत करने पर काम करना शुरू कर देगी.
भाजपा 26 साल के अंतराल के बाद दिल्ली में सरकार बनाने जा रही है. पिछली बार उसने 1993 में विधानसभा चुनाव जीता था. 1993 से 1998 तक के अपने पिछले कार्यकाल के दौरान दिल्ली ने तीन भाजपाई मुख्यमंत्री देखे जिनमें मदन लाल खुराना, साहिब सिंह वर्मा और सुषमा स्वराज शामिल रहे.