मायावती के ‘दुर्व्यवहार, भ्रष्टाचार, लालच’ के बावजूद बसपा की ‘राजनीतिक ताकत बरकरार’ रही: उदित राज

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Tue, 18 Feb 2025 06:39 PM
मायावती के ‘दुर्व्यवहार, भ्रष्टाचार, लालच’ के बावजूद बसपा की ‘राजनीतिक ताकत बरकरार’ रही: उदित राज
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लखनऊ. पूर्व सांसद उदित राज ने बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती पर निशाना साधते हुए दावा किया कि उनके ”दुर्व्यवहार, भ्रष्टाचार और लालच” के बावजूद उनकी ”राजनीतिक ताकत लंबे समय तक बरकरार रही”. उदित राज ने यह भी कहा कि मायावती ने “सामाजिक आंदोलन का गला घोंट दिया है” और “अब मायावती का गला घोंटने का समय आ गया है.”

सोमवार को लखनऊ में पत्रकारों से उदित राज ने कहा, “महाभारत के युद्ध के दौरान जब अर्जुन ने भगवान कृष्ण से पूछा कि वह अपने ही रिश्तेदारों को कैसे मारेंगे, तो भगवान कृष्ण ने कहा कि कोई रिश्तेदार नहीं होते और उन्हें (अर्जुन को) न्याय के लिए लड़ना है. आज मेरे कृष्ण ने मुझसे कहा है कि पहले अपने दुश्मन को मारो. सामाजिक न्याय की दुश्मन सुश्री मायावती ने सामाजिक आंदोलन का गला घोंट दिया. और अब उनका गला घोंटने का समय आ गया है.”

पूर्व सांसद उदित राज ने कहा, ”1980 के दशक के बाद कांशीराम जी ने उत्तर प्रदेश में बहुजन जागरण की शुरुआत की जो 2000 के दशक में अपने चरम पर पहुंच गया. भले ही आंदोलन की परिणति राजनीति में हुई, लेकिन इसकी सोच और आधार सामाजिक न्याय रहा है. अन्य राजनीतिक दल राजनीति से शुरू हो कर राजनीति पर ही खत्म होते हैं, लेकिन बहुजन समाज पार्टी के साथ ऐसा नहीं था.” उन्होंने कहा, ”मायावती की क्रूरता और अक्षमता के बावजूद कार्यकर्ता और मतदाता लड़ते रहे. कार्यकर्ताओं के घर बिके, उनके बच्चों को शिक्षा नहीं मिली और उनके साथ क्रूरता की गई, फिर भी वे बहुजन राज लाने के लिए संघर्ष करते रहे. फुले, शाहू, आंबेडकर (महात्मा ज्योतिराव गोविंदराव फुले, रार्जिष शाहू महाराज, बी. आर. आंबेडकर) को मानने वाले लाखों कार्यकर्ता निराशा के दौर से गुजर रहे हैं. कुछ लोगों ने अपने स्तर पर छोटे-छोटे संगठन बनाए हैं, लेकिन उनकी (फुले, शाहू, आंबेडकर की) सोच मरी नहीं है.”

उत्तर पश्चिमी दिल्ली के पूर्व लोकसभा सदस्य ने यह भी कहा, ”जिस तरह दलितों की हालत खराब थी, उसी तरह आज मुस्लिम समुदाय भी उसी दौर से गुजर रहा है. मुस्लिम समुदाय अकेले इस स्थिति से नहीं लड़ सकता. दलित भी अकेले सक्षम नहीं हैं. जब भी मुस्लिम समुदाय अपनी समस्या उठाता है, तो उसका नतीजा सांप्रदायिकता में बदल जाता है.” उन्होंने कहा कि एक दिसंबर 2024 को दिल्ली के रामलीला मैदान में ‘डोमा परिसंघ’ की पहली रैली हुई, जिसमें वक्फ बोर्ड को बचाने की मांग उठाई गई. उदित राज वर्तमान में दलित, ओबीसी, अल्पसंख्यक और आदिवासी (डीओएमए) परिसंघ के प्रमुख हैं.

उन्होंने आंबेडकरवादियों से एकजुट होने का आह्वान करते हुए कहा, ”तथाकथित आंबेडकरवादी जाति व्यवस्था को तोड़ नहीं पाए, कम से कम जातिवाद और जाति संगठन को तो रोकिए. ब्राह्मण, क्षत्रिय और वैश्यों के खिलाफ बोलकर कब तक लोगों को इकट्ठा करते रहेंगे? आज जरूरत है खुद को बदलने की. ऊंची जातियों की आलोचना करके मुस्लिमों और दलित-पिछड़ों के खिलाफ बोलकर हिंदू एकजुट हो रहे हैं. इस रास्ते पर चलना बंद करें.”

उन्होंने कहा, ”भगवान गौतम बुद्ध ने कहा था – अत्त दीपो भव:. इसका मतलब है कि अपनी सोच बदलिए. दलित और पिछड़े वर्ग चाहते हैं कि ऊंची जातियां खुद को बदलें, लेकिन वे आपस में जातिवाद करते रहे.” बहुजनों के संगठनों पर उन्होंने कहा, ”अब तक बहुजनों के जो संगठन बने हैं, वे व्यक्ति और जाति के आधार पर बने हैं. आबादी 85 प्रतिशत है, लेकिन क्या संगठन में ऊपर से नीचे तक सभी वर्गों की हिस्सेदारी है? संगठन चलाने वाले अपनी जाति और अपने मित्रों को महत्वपूर्ण पद देते हैं और कहते हैं कि वे बहुजनों का कल्याण कर रहे हैं.”

उदित राज ने कहा, ”डोमा परिसंघ के संगठनात्मक ढांचे में हर स्तर पर चार लोगों – एक दलित, एक ओबीसी (अन्य पिछड़ा वर्ग), एक मुस्लिम और एक आदिवासी का होना अनिवार्य होगा. बहुजन सिर्फ नाम का नहीं है, बल्कि काम करके दिखाना होगा.” उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में झांसी, बांदा, श्रावस्ती, कानपुर, मेरठ और आजमगढ़ में छह सम्मेलन आयोजित करने का निर्णय लिया गया है.

बाद में अपनी टिप्पणी के बारे में पूछे गए सवालों का जवाब देते हुए उदित राज ने मंगलवार को ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, “बहुजन समाज के आंदोलन का गला घोंटा गया…करोड़ों कार्यकर्ताओं ने भूखे-प्यासे रहकर पार्टी और आंदोलन को खड़ा किया था. इस पर जब मीडिया ने मुझसे सवाल पूछे तो मैंने कहा कि निश्चित रूप से, उनका भी राजनीतिक रूप से गला घोंट दिया जाना चाहिए. मेरा मतलब राजनीतिक मौत से था और कुछ नहीं.” उदित राज ने कहा, “पूरी बात को तोड़-मरोड़ कर पेश करना सही नहीं है.” जब उनसे वायरल वीडियो के बारे में पूछा गया जिसमें वे ‘गला घोट देना चाहिए’ वाले बयान को सही ठहराते हुए कह रहे हैं कि उनके ‘कृष्ण’ ने उन्हें ऐसा करने का आदेश दिया है, तो उदित राज ने कहा, “इलाहाबाद उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति सभाजीत यादव, दलित, ओबीसी, अल्पसंख्यक और आदिवासी (डोमा) परिसंघ के संरक्षक भी मेरे साथ मौजूद थे.”

उदित राज ने कहा,” उन्होंने मेरा जिक्र करते हुए कहा था ‘मुझे मेरा अर्जुन मिल गया है.’ जवाब में मैंने उनसे कहा कि वे हमारे ‘कृष्ण’ हैं. न्यायमूर्ति यादव ने यह भी कहा था कि न्याय के लिए लड़ने में कृष्ण अर्जुन का मार्गदर्शन करते हैं, भले ही इसका मतलब अपने ही खिलाफ क्यों न हो. यह मेरी टिप्पणी और मेरे कृष्ण सादृश्य का संदर्भ था. लेकिन, अब इसे बदला जा रहा है.” उन्होंने ‘पीटीआई-भाषा’ से यह भी कहा कि वह अपने बयान के इरादे और राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों द्वारा इसकी गलत व्याख्या किए जाने के बारे में स्पष्टीकरण भी जारी करेंगे.

नयी दिल्ली में आयकर विभाग के पूर्व उपायुक्त, संयुक्त आयुक्त और अपर आयुक्त रह चुके उदित राज ने 24 नवंबर 2003 को सरकारी नौकरी से इस्तीफा देकर ‘इंडियन जस्टिस पार्टी’ का गठन किया. उन्होंने फरवरी 2014 में ‘इंडियन जस्टिस पार्टी’ का भाजपा में विलय कर दिया था. वह 2014 से 2019 के बीच उत्तर पश्चिम दिल्ली से भाजपा के सांसद थे. पहले कार्यकाल के बाद उन्होंने पार्टी छोड़ दी. वह 2019 में कांग्रेस में शामिल हो गए.

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