नयी दिल्ली. प्रदर्शनकारी किसानों को दिल्ली में प्रवेश करने से रोकने के लिए सिंघू, टीकरी और गाजीपुर बॉर्डर पर किए गए उपायों के कारण मंगलवार सुबह दिल्ली-राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में वाहन चालकों को भारी जाम का सामना करना पड़ा. बॉर्डर पर यातायात धीमी गति से चला क्योंकि पुलिस ने राष्ट्रीय राजधानी में किसानों के मार्च के मद्देनजर सिंघू, टीकरी और गाजीपुर सीमाओं पर कई स्तर पर बैरिकेड लगाए थे.
यात्रियों को यातायात जाम से जूझना पड़ा और किसानों के प्रवेश को रोकने के लिए दिल्ली को किले में तब्दील कर दिया गया. किसानों के ‘दिल्ली चलो’ मार्च के मद्देनजर पुलिस ने शहर के सीमा बिंदुओं पर कई चरणों में बैरिकेड लगाने के अलावा कंक्रीट ब्लॉक, लोहे की कीलें और कंटेनर की दीवारें बना सुरक्षा बढ़ा दी है. सुबह सात बजे से ही गाजीपुर, सिंघु और टीकरी बॉर्डर पर वाहन बेहद धीमी गति से चलते नजर आए. दोपहर के बाद सिंघू और टीकरी बॉर्डर पर आवाजाही पूरी तरह बंद कर दी गई.
गाजीपुर बॉर्डर पर घंटों से फंसे उत्तराखंड निवासी अरुण सिंह ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा कि वह दिल्ली के लोक नायक अस्पताल में अपने बीमार पिता से मिलने जा रहे थे. उन्होंने कहा, ”मैं अपने 78 वर्षीय पिता से मिलने के लिए उत्तराखंड से आया हूं… मैं और मेरा परिवार सुबह 11 बजे से यहां फंसे हुए हैं. यह हमारे लिए बेहद निराशाजनक स्थिति है और हम क्रोधित और असहाय महसूस कर रहे हैं.” सिंह की तरह सैकड़ों यात्री गाजीपुर बॉर्डर पर जाम से जूझे .
कम से कम एक घंटे तक जाम में फंसी रहीं जूली लॉरेंस ने कहा, ”मुझे आज होने वाले किसानों के मार्च के बारे में पता था और मैं गुरुग्राम के सेक्टर-29 स्थित अपने घर से एक घंटे पहले कार्यालय के लिए निकली थी. यातायात की स्थिति को देखकर ऐसा लगता है कि जल्दी निकलने के बावजूद, मैं मध्य दिल्ली में अपने कार्यालय में कुछ घंटे देरी से पहुंच सकूंगी.” यह देखते हुए कि कामकाजी घंटों के दौरान हर दिन दिल्ली और गुड़गांव के बीच दो लाख से अधिक लोग यात्रा करते हैं, एक यातायात पुलिस अधिकारी ने लोगों को मेट्रो सेवाओं का उपयोग करने की सलाह दी.
गाजीपुर बॉर्डर पर नोएडा और दिल्ली को जोड़ने वाले प्रमुख हिस्से के आधे भाग पर बैरिकेड लगे होने के कारण एक समय में केवल दो वाहन ही गुजर पा रहे थे. गाजीपुर बॉर्डर के पास पुलिस ने लिंक सड़कों को बंद कर दिया था और वाहन एक कतार में चल रहे थे. एक अन्य यात्री कृतिका शर्मा ने कहा कि वह सुबह छह बजे अपने दफ्तर के लिए निकली थीं लेकिन 9 बजे तक भी जाम में फंसी रहीं. सिंघू और टीकरी बॉर्डर पर भी वाहनों की लंबी कतारें लगी रहीं.
वहीं, बच्चों के साथ यात्रा करने वाले परिवार परेशान हैं क्योंकि बच्चे भोजन और पानी के बिना परेशान दिखे. इसके अलावा, महिला यात्रियों को भारी यातायात के बीच सार्वजनिक शौचालय ढूंढने में कठिनाई का सामना करना पड़ा. गाजीपुर बॉर्डर पर एक अन्य यात्री कनिका चिंतित दिखी क्योंकि उन्हें समय पर हवाई अड्डा नहीं पहुंचने पर उड़ान छूटने का डर सता रहा था. कनिका ने कहा, ”मुझे स्थिति के बारे में पता नहीं था. मुझे विमान से बेंगलुरु जाना है और अब मैं जाम में फंस गई हूं, जो कछुआ गति से बढ़ रहा है.” एक परिवार ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि वे सुबह से ही लंबे जाम में इंतजार कर रहे हैं.
परिवार के एक सदस्य ने कहा, ”अब हम निराश और थके हुए महसूस कर रहे हैं. हमारे साथ छोटे बच्चे हैं, वे भी भूखे हैं. आस-पास कोई भोजन और पानी उपलब्ध नहीं है.” परिवार के साथ यात्रा कर रही एक महिला यात्री ने कहा, ”हम सड़क के बीच में फंस गए हैं. आसपास कोई सार्वजनिक शौचालय नहीं है.” किसानों के प्रदर्शन के चलते राष्ट्रीय राजधानी से सटे हरियाणा के ग्रामीणों को भी भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा.
मजदूरी करने वाले और टीकरी कलां के निवासी राजा राम ने कहा, ”हमें किसी भी विरोध प्रदर्शन से कोई लेना-देना नहीं है, लेकिन काम के बाद घर पहुंचने के लिए हमें तीन से अधिक अलग-अलग स्थानों पर अपना पहचान पत्र दिखाने के लिए कहा गया.” टीकरी बॉर्डर मेट्रो स्टेशन के पास एक भोजनालय चलाने वाले देवेंद्र सिंह ने कहा, ”किसान हरियाणा और पंजाब से आ रहे हैं और इसमें कोई स्थानीय लोग शामिल नहीं हैं, लेकिन ऐसे विरोध प्रदर्शनों के कारण हमें अपना व्यवसाय करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है क्योंकि पुलिस हमें अपनी दुकानें खोलने की अनुमति नहीं देती है.”