पिछले दो दिनों से कवर्धा में जारी किसान आंदोलन आज थम गया। भारतीय किसान संघ ने इसे स्थगित करने का ऐलान किया है।
विगत 8 अक्टूबर से अपनी 23 सूत्रीय मांगों को लेकर संघ प्रदर्शन कर रहा था. किसानों ने शहर के सभी प्रवेश मार्गों पर वाहन खड़े कर चक्काजाम कर दिया था. इस बीच भारतीय किसान संघ के प्रदेश पदाधिकारियों की मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा और अरुण साव के साथ बैठक हुई. बैठक में प्रमुख मांगों पर सहमति बनने के बाद संघ ने अपना प्रदर्शन स्थगित करने की घोषणा की. बताया जाता है कि संघ की मांग पर ही राज्य समाचार सरकार ने गन्ने की खरीदी दर 329 रुपये से बढ़ाकर 425 रुपये प्रति क्विंटल करने का निर्णय लिया है.
इसके अलावा कृषक उन्नति योजना के तहत किसानों को प्रति एकड़ 15 हजार रुपये अनुदान देने, धान खरीदी केंद्रों में तौल की मात्रा 41.500 किलो से घटाकर 40.700 किलो करने और बिजली के निजीकरण की योजना पर रोक लगाने जैसे मुद्दों पर सहमति बनी है. किसान संघ ने साफ किया है कि आंदोलन समाप्त नहीं, बल्कि फिलहाल स्थगित किया गया है. शेष मांगों पर समाधान नहीं होने की स्थिति में आने वाले समय में प्रदेशभर के किसान राजधानी रायपुर में प्रदर्शन करेंगे.
जानते चलें कि 23 सूत्रीय मांगों को लेकर किसानों ने कबीरधाम में प्रदर्शन किया. शहर में प्रवेश करने वाले सभी मार्गों को ट्रैक्टर और बैरिकेड लगाकर पूरी तरह बंद कर दिया था. सिर्फ एम्बुलेंस को आने-जाने दिया जा रहा था. इसके कारण स्कूलों में छुट्टी भी कर दी गई थी. प्रदर्शनस्थल पर भारी पुलिस तैनात की गई थी. जानकारी मिलने पर प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे. उन्होंने किसानों को काफी समझाने का प्रयास किया. हालांकि किसान अपनी मांगों को लेकर अड़े रहे. बातचीत के बावजूद कोई समाधान नहीं निकल सका था. प्रदर्शन के बीच शुक्रवार रात भारतीय किसान संघ के प्रदेश पदाधिकारियों की मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा और अरुण साव के साथ बैठक हुई. करीब रात 1 बजे तक चली बैठक में किसानों की प्रमुख मांगों को सरकार ने मान लिया. इसके बाद किसानों के प्रदर्शन को स्थगित करने की घोषणा की गई. दो दिन के प्रदर्शन के बाद अब जाम खोल दिया जाएगा, जिससे आम जनता को भी राहत मिलेगी. भारतीय किसान संघ के जिलाध्यक्ष डोमन चंद्रवंशी ने बताया कि जिला स्तर की मांगों को पूरा करने के लिए कलेक्टर की ओर से आश्वासन मिला है, जबकि शासन स्तर की तीन प्रमुख मांगों पर सरकार ने सहमति जताई है. पिछले आठ साल से स्थिर गन्ने के दाम में 69 रुपये की बढ़ोतरी करने का फैसला लिया गया है.