अस्ताना(कजाकिस्तान)/नयी दिल्ली. विदेश मंत्री एस जयशंकर ने पाकिस्तान पर परोक्ष हमला करते हुए कहा है कि क्षेत्रीय एवं वैश्विक शांति के लिए आतंकवाद एक खतरा बन गया है तथा आतंकी हमलों को अंजाम व बढ़ावा देने और इसका वित्तपोषण करने वालों की पहचान और दंडित करने की जरूरत है.
हाल में अस्ताना की काजिनफॉर्म समाचार एजेंसी के साथ एक साक्षात्कार में उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि तीन बुराइयों – आतंकवाद, अलगाववाद और उग्रवाद – के खिलाफ लड़ाई शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) में प्राथमिकता है. एससीओ राष्ट्राध्यक्ष परिषद की 24वीं बैठक 4 जुलाई को कजाक राजधानी अस्ताना में कजाकिस्तान की अध्यक्षता में आयोजित की गई. इस शिखर सम्मेलन में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व जयशंकर ने किया. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ भी सम्मेलन में शामिल हुए.
विदेश मंत्री ने कहा, ”इसमें कोई संदेह नहीं है कि आज दुनिया के समक्ष सबसे बड़ी चुनौती आतंकवाद है. यह क्षेत्रीय और वैश्विक शांति के लिए खतरा बन गया है और इसके लिए हम सभी को तत्काल कार्रवाई करनी होगी.” जयशंकर ने कहा, ”आतंकवाद का मुकाबला करने के लिए बहुत व्यापक दृष्टिकोण की आवश्यकता है. न केवल आतंकवाद के जघन्य कृत्यों को अंजाम देने वालों की, बल्कि आतंक को बढ़ावा देने वालों, इसके वित्तपोषकों और प्रायोजकों, इन सभी की पहचान की जानी चाहिए और उन्हें दंडित किया जाना चाहिए.” विदेश मंत्री ने कहा कि उनका ”दृढ़ विश्वास” है कि क्षेत्रीय आतंकवाद रोधी संरचना (आरएटीएस) के माध्यम से एससीओ के पास क्षेत्र में आतंकवाद के खिलाफ उपायों का प्रस्ताव करने के लिए उपयुक्त आधार है.
अस्ताना शिखर सम्मेलन में अपनाई गई आतंकवाद और एससीओ मादक पदार्थ रोधी रणनीति से संबंधित दो महत्वपूर्ण पहल के महत्व और संभावित प्रभाव के बारे में जयशंकर ने कहा, ”मादक पदार्थों की तस्करी एक और मुद्दा है जिसका हमें मिलकर मुकाबला करने की जरूरत है और यह क्षेत्र के दो अन्य मुद्दों – आतंकवाद और अफगानिस्तान में स्थिरता – से बहुत निकटता से जुड़ा हुआ है.” जयशंकर ने कहा, ”दुशांबे में एक मादक पदार्थ रोधी केंद्र की स्थापना पर आम सहमति बनी है. यह एक स्वागत योग्य कदम है और इसकी बहुत जरूरत है.” एससीओ की स्थापना 2001 में शंघाई में रूस, चीन, किर्गिज गणराज्य, कजाकिस्तान, ताजिकिस्तान और उजबेकिस्तान के राष्ट्रपतियों द्वारा एक शिखर सम्मेलन में की गई थी. भारत और पाकिस्तान 2017 में इसके स्थायी सदस्य बने थे.
प्रशांत महासागर में स्थित द्वीप ‘बड़े महासागरीय देश’ हैं : विदेश मंत्री जयशंकर
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सोमवार को कहा कि भारत प्रशांत द्वीप समूह के विकास के प्रयासों का समर्थन करना अपनी जिम्मेदारी मानता है. जयशंकर ने एक कार्यक्रम में यह भी कहा कि प्रशांत क्षेत्र के द्वीप ”छोटे द्वीप” नहीं हैं, बल्कि ”बड़े महासागरीय देश” हैं और भारत को उनका भागीदार बनने का अवसर मिला है.
उन्होंने कहा, ”हम सतत विकास की तलाश में प्रशांत द्वीप समूह का समर्थन करना अपनी जिम्मेदारी मानते हैं. जलवायु परिवर्तन, प्राकृतिक आपदाएं, गरीबी उन्मूलन और स्वास्थ्य सेवा आम चुनौतियां हैं जिनसे हमें मिलकर निपटने की आवश्यकता है.” उन्होंने कहा, ”भारत अपने हिंद-प्रशांत साझेदारों के साथ और अधिक काम करने के लिए हमेशा तैयार हैं.” जयशंकर ने डिजिटल माध्यम से हुए एक कार्यक्रम में ये टिप्पणियां कीं. इस कार्यक्रम में भारत ने मार्शल द्वीप में चार सामुदायिक विकास परियोजनाओं के क्रियान्वयन के लिए समझौते ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए.
उन्होंने कहा, ”मुझे खुशी है कि इन परियोजनाओं में ऐलुक एटोल में एक सामुदायिक खेल केंद्र, मेजित द्वीप पर हवाई अड्डा र्टिमनल, अर्नो और वोट्जे एटोल में सामुदायिक केंद्र शामिल हैं. ये निश्चित रूप से मार्शल द्वीप के लोगों को बेहतर बुनियादी ढांचा प्रदान करेंगे.” विदेश मंत्री ने कहा कि भारत और मार्शल द्वीप गणराज्य के बीच मैत्रीपूर्ण द्विपक्षीय संबंधों का एक लंबा इतिहास है, जिसका पिछले कुछ वर्षों में भारत-प्रशांत द्वीप समूह सहयोग मंच (एफआईपीआईसी) के तत्वाधान में विस्तार हुआ है. एफआईपीआईसी भारत और प्रशांत द्वीप देशों के बीच सहयोग के लिए एक प्रमुख ढांचे के रूप में उभरा है.
जयशंकर ने तीसरे एफआईपीआईसी शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा प्रशांत द्वीप समूह के लिए भारत की ”ठोस” प्रतिबद्धताओं की घोषणा का भी उल्लेख किया. उन्होंने कहा, ”मैं उन्हें हासिल करने की दिशा में प्रगति देखकर खुश हूं. हम मार्शल द्वीप गणराज्य के लिए विलवणीकरण (पानी से नमक और अन्य खनिजों को अलग करने वाली) इकाइयों और डायलिसिस मशीनों के संबंध में प्रस्तावों पर भी काम कर रहे हैं.” विदेश मंत्री ने कहा कि भारत प्रशांत द्वीप देशों की प्राथमिकताओं और जरूरतों को पहचानता है.
उन्होंने कहा, ”स्वास्थ्य देखभाल और संबंधित बुनियादी ढांचे, गुणवत्ता और सस्ती दवाएं, अच्छी जीवन शैली, उत्कृष्टता केंद्र, शिक्षा और क्षमता निर्माण, लघु एवं मध्यम उद्योग क्षेत्र का विकास, नवीकरणीय ऊर्जा और स्वच्छ जल सुविधाएं – ये सभी हमारे सहयोग के कुछ मुख्य क्षेत्र हैं.”