गुरुग्राम में 14 बांग्लादेशी पकड़े गए, पूछताछ में बड़ा खुलासा: एंटी टेररिस्ट स्क्वॉड (एटीएस) ने गुरुवार को गुरुग्राम में 14 बांग्लादेशियों को पकड़ा था। पूछताछ में पता चला कि इनमें से दो आरोपी 19 साल पहले सुरंग के रास्ते भारत में दाखिल हुए थे और तभी से गुरुग्राम में दिहाड़ी मजदूरी कर रहे हैं।
सुरंग से बुलाए साथी
एटीएस के मुताबिक अनवर हुसैन ने पूछताछ में बताया कि वह और राजू उर्फ आलम 2007 में सुरंग से भारत आए थे। इसके बाद उन्होंने अपने अन्य साथियों को भी उसी सुरंग से भारत में दाखिल करा दिया। एक-एक कर 12 अन्य घुसपैठिये भी भारत आ गए। पूछताछ के आधार पर घुसपैठ का ब्योरा इस तरह है: 2007 में 2, 2024 में 2, 2025 में 2 और 2026 में 8। यानी आठ लोग इसी साल सुरंग के रास्ते आए।
झुग्गियों में रहकर आरएमसी पाइपलाइन में करते थे काम
सभी आरोपी गुरुग्राम की अलग-अलग झुग्गियों में रहकर मजदूरी करते थे। जांच में सामने आया कि ज्यादातर रेडी मिक्स कंक्रीट (आरएमसी) पाइपलाइन में काम करते थे। एटीएस यह भी पता लगा रही है कि ये सभी आरएमसी में ही क्यों काम कर रहे थे।
आधार कार्ड और पासपोर्ट तक बनवाए
एटीएस की जांच में पता चला कि 14 में से सभी के पास भारत का आधार कार्ड बन चुका है, हालांकि कुछ के पास अब भी बांग्लादेश के आईडी मौजूद हैं। एक घुसपैठिये ने पासपोर्ट भी बनवा लिया था। एटीएस जांच कर रही है कि पासपोर्ट और आधार बनवाने में स्थानीय स्तर पर किन लोगों ने मदद की।
शहर में सघन जांच की तैयारी
एक साथ 14 बांग्लादेशी पकड़े जाने के बाद एटीएस गुरुग्राम में सघन जांच की तैयारी में है। शहर में बन रही बड़ी इमारतों में काम करने वाले मजदूरों की पहचान की जांच होगी और सभी आरएमसी प्लांट का निरीक्षण किया जाएगा। आशंका है कि नाम बदलकर या पहचान छिपाकर और बांग्लादेशी भी शहर में काम कर रहे हों।
जून में भी पकड़े गए थे 13 बांग्लादेशी
गुरुग्राम पुलिस ने 14-15 जून को 800 से ज्यादा लोगों के दस्तावेज जांचे थे, जिसमें 13 बांग्लादेशी नागरिक हिरासत में लिए गए थे। ये सभी बांग्लादेश बॉर्डर से अवैध रूप से भारत में घुसे थे। इन्हें 16 जुलाई को नई दिल्ली-माल्दा टाउन एक्सप्रेस से पश्चिम बंगाल के मालदा टाउन ले जाकर वहां की टीम के हवाले किया गया, जहां से उन्हें बॉर्डर के रास्ते बांग्लादेश वापस भेजा जाना था।