नयी दिल्ली. कांग्रेस ने बिहार के लिए विशेष राज्य के दर्जे की मांग पर केंद्र सरकार के रुख को लेकर सोमवार को कटाक्ष किया कि अगर ऐसा ही होता रहा तो ”अंतरात्मा जाग जाएगी”. पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का परोक्ष रूप से हवाला देते हुए यह टिप्पणी की.
रमेश ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ”वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने आज लोक सभा में पूछे गए सवाल के जवाब में कहा है कि बिहार को विशेष राज्य का दर्जा देने की मांग के लिए पर्याप्त सबूत नहीं दिया गया है. याद रहे कि एक जमाने में ”नॉन-बायोलॉजिकल प्रधानमंत्री” ने बिहार को विशेष राज्य का दर्जा देने का वादा किया था. उन्होंने तब किस आधार पर यह वादा किया था?” उन्होंने कहा, ”ऐसा होता रहा तो अंतरात्मा जाग जाएगी.”
केंद्र सरकार ने 2012 में तैयार एक अंतर-मंत्रालयी समूह की रिपोर्ट का हवाला देते हुए सोमवार को कहा कि बिहार को विशेष राज्य का दर्जा देने का कोई मामला नहीं बनता है. केंद्र का यह रुख भाजपा के सहयोगियों द्वारा पिछड़े राज्य को विशेष दर्जा देने की मांग के एक दिन बाद आया है. संसद के मानसून सत्र के पहले दिन लोकसभा में एक सवाल के लिखित जवाब में वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने कहा कि अतीत में राष्ट्रीय विकास परिषद (एनडीसी) ने कुछ राज्यों को विशेष श्रेणी का दर्जा दिया था.
आर्थिक समीक्षा में ‘गुलाबी तस्वीर’ पेश करने का प्रयास हुआ: कांग्रेस
कांग्रेस ने सोमवार को आरोप लगाया कि सरकार की ओर से पेश आर्थिक समीक्षा में ‘सब ठीक है वाली ‘गुलाबी तस्वीर’ पेश करने का प्रयास किया गया है, जबकि देश की आर्थिक स्थिति निराशाजनक है. पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने यह भी कहा कि उम्मीद है कि मंगलवार को पेश होने वाला बजट देश की वास्तविकताओं के अनुरूप होगा.
बजट से पहले सरकार की ओर से पेश आर्थिक समीक्षा में चालू वित्त वर्ष में आर्थिक संवृद्धि दर 6.5 से 7.0 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया गया है. साथ ही इसमें अर्थव्यवस्था में अधिक नौकरियां सृजित करने की जरूरत के साथ निर्यात को बढ़ावा देने के लिए चीन से अधिक प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) का समर्थन किया गया है.
जयराम रमेश ने एक बयान में कहा, ”2023-24 का आर्थिक सर्वेक्षण, जो कि कल पेश होने वाले बजट से पहले जारी किया गया, एक ऐसा दस्तावेज है, जिसे तैयार करने के लिए ‘नॉन-बायोलॉजिकल प्रधानमंत्री’ के ”स्पिन डॉक्टर्स” को कड़ी मशक़्क.त करनी पड़ी होगी. इसमें अर्थव्यवस्था की “सब ठीक है” वाली गुलाबी तस्वीर पेश करने की पूरी कोशिश की गई है. लेकिन दुर्भाग्य यह है कि आर्थिक स्थिति इतनी निराशाजनक है.”
उन्होंने दावा किया, ”खाद्य पदार्थों की महंगाई अनियंत्रित बनी हुई है, जो प्रति वर्ष लगभग 10 प्रतिशत पर है… कोविड के बाद आर्थिक सुधार बेहद असमान रहा है. ग्रामीण भारत पीछे छूट गया है… आर्थिक सर्वेक्षण में मोदी सरकार की किसान विरोधी मानसिकता का बखान है. बिना तैयारी के और अनुचित ढंग से लगाए गए निर्यात प्रतिबंधों एवं सस्ते आयात में बेतहाशा वृद्धि के साथ आयात-निर्यात नीति का दुरुपयोग, किसानों की आय को कमज.ोर करने के लिए चिह्नित किया गया है.”
कांग्रेस नेता ने कहा, ”व्यापार नीति की विफलता ने भी भारत की विनिर्माण क्षमताओं को नष्ट करने में योगदान दिया है. 2014 के बाद से, चीन से आयात का प्रतिशत कुल आयात के 11 प्रतिशत से बढ़कर 16 प्रतिशत हो गया है. इन आयातों की अनियंत्रित डंपिंग ने घरेलू एमएसएमई को स्पर्धा से बाहर कर दिया है, जिससे उन्हें बंद करना पड़ रहा है.” उन्होंने दावा किया कि आर्थिक सर्वेक्षण भी निजी निवेश उत्पन्न करने के संबंध में केंद्र सरकार की नीति निर्धारण की विफलता को स्वीकार करता है.
रमेश ने कहा, ”कॉरपोरेट क्षेत्र के लिए मोदी सरकार का दृष्टिकोण बेहद उदार रहा है. 1.5 लाख करोड़ रुपये के कॉरपोरेट कर में कटौती की गई और दो लाख करोड़ रुपये की ‘पीएलआई’. लेकिन सरकार ने यह उदारता बदले में निवेश या नियुक्ति को प्रोत्साहित किए बिना दिखाई है.” उन्होंने दावा कि आर्थिक सर्वेक्षण बेरोजग़ारी की स्थिति को स्वीकार करने के लिए मजबूर है, जो मोदी सरकार की सबसे बड़ी विफलता है.
रमेश के मुताबिक, ”आर्थिक सर्वेक्षण में कहा गया है कि हमें अगले 20 वर्षों तक हर साल लगभग 80 लाख नौकरियां पैदा करनी होंगी. 80 लाख नौकरी के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए सरकार की बड़ी आर्थिक रणनीति में एक निश्चित बदलाव की आवश्यकता है.” रमेश ने कहा, ”भारत कई वर्षों में अपनी सबसे अनिश्चित और कठिन आर्थिक स्थिति में है. आर्थिक सर्वेक्षण अर्थव्यवस्था का मनमाना दृश्य प्रस्तुत कर सकता है, लेकिन हमें उम्मीद है कि कल का बजट देश की वास्तविकताओं के अनुरूप होगा.” उन्होंने कहा, ”यदि वित्त मंत्रालय अब भी विचारों की तलाश में है, तो हम उनका भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के न्याय पत्र 2024 की ओर ध्यान दिलाना चाहेंगे. प्रशिक्षुता का अधिकार, न्यूनतम वेतन में बढ़ोतरी – 400 रुपये प्रति दिन, कर आतंकवाद का अंत और आंगनबाड़ियों जैसी सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का विस्तार समय की मांग है.”