हिमाचल में बगावत खत्म करने की कोशिश में कांग्रेस, सुधीर शर्मा को सचिव पद से हटाया

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Wed, 06 Mar 2024 09:16 PM
हिमाचल में बगावत खत्म करने की कोशिश में कांग्रेस, सुधीर शर्मा को सचिव पद से हटाया

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नयी दिल्ली/शिमला. कांग्रेस ने हिमाचल प्रदेश में पिछले दिनों अपनी सरकार पर आए संकट के मद्देनजर अब अपने घर को व्यवस्थित करने के प्रयास तेज कर दिए हैं तथा इसी क्रम में वह अपने वरिष्ठ नेताओं के साथ बातचीत कर रही है. उसने बगावत खत्म करने के लिए उठाए जा रहे कदमों के क्रम में सुधीर शर्मा को बुधवार को पार्टी के सचिव पद से हटा दिया. शर्मा उन छह विधायकों में से एक है जिन्होंने पिछले दिनों हिमाचल प्रदेश में राज्यसभा के चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के पक्ष में ‘क्रॉस-वोटिंग’ की थी.

पार्टी के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल की ओर से जारी विज्ञप्ति के अनुसार, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सुधीर शर्मा को अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सचिव पद से तत्काल प्रभाव से हटा दिया है. शर्मा ने कांग्रेस के इस कदम पर कटाक्ष करते हुए ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ”भार मुक्त तो ऐसे किया है जैसे सारा बोझ मेरे ही कंधों पर था. चिंता मिटी, चाहत गई, मनवा बेपरवाह, जिसको कछु नहीं चाहिए, वो ही शहंशाह.” हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला से ताल्लुक रखने वाले शर्मा प्रदेश के वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं में शुमार किए जाते हैं और वह प्रदेश सरकार में मंत्री रहे हैं. हाल ही में उन्हें और पांच अन्य विधायकों को अयोग्य ठहराया गया.

पार्टी के वरिष्ठ विधायक राजिंदर राणा ने भी हिमाचल कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष पद से इस्तीफे की घोषणा की. राणा ने अपने त्याग पत्र में कहा, ”मैं तत्काल प्रभाव से एचपीसीसी के कार्यकारी अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे रहा हूं.” उन्होंने फेसबुक पोस्ट में कहा, ”हिमाचल प्रदेश में पिछले विधानसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस द्वारा किए गए वादों को पूरा करने के लिए हाथ जोड़कर सुजानपुर से शिमला और शिमला से दिल्ली तक दौड़ने से कोई नतीजा नहीं निकला. मैंने न्याय की कामना की थी, लेकिन केवल मिला अपमान.” सूत्रों ने कहा कि खरगे और कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाद्रा और केसी वेणुगोपाल हिमाचल प्रदेश के वरिष्ठ विधायकों और मंत्रियों से मुलाकात कर रहे हैं.

कुछ दिनों पहले पार्टी राज्य का बजट ध्वनि मत से पारित कराकर राज्य में अपनी सरकार बचाने में कामयाब रही है. कांग्रेस के पास वर्तमान में 34 विधायक हैं जबकि भाजपा के पास 25 विधायक हैं और तीन निर्दलीय विधायक हैं जिन्होंने राज्यसभा चुनाव में भाजपा का साथ दिया था. इस बीच कांग्रेस के छह बागी विधायकों ने अपनी अयोग्यता को उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी है. सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस नेतृत्व ने इस सप्ताह के अंत में राज्य के उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री से मुलाकात की, जबकि प्रियंका गांधी ने मंत्री विक्रमादित्य सिंह से बात की.

बागियों के पार्टी में लौटने की संभावना के बारे में पूछे जाने पर विक्रमादित्य सिंह ने कहा, ”राजनीति में सब कुछ संभव है और राजनीति में सभी दरवाजे खुले हैं.” पंचकुला में छह बागी विधायकों से बातचीत के बाद सिंह ने हाल ही में दिल्ली में प्रियंका गांधी सहित वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं से मुलाकात की थी.

उन्होंने शिमला में कहा, ”मुझे आधिकारिक तौर पर विद्रोहियों से मिलने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी और मैंने अपना कर्तव्य निभाया है.” हिमाचल के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने भी दिल्ली में पार्टी नेतृत्व से मंत्रणा की है. कांग्रेस के बागियों पर निशाना साधते हुए मुख्यमंत्री सुक्खू ने बुधवार को हमीरपुर में एक सार्वजनिक कार्यक्रम में कहा कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि जिले के कुछ विधायक पार्टी के खिलाफ जाएंगे और जिले में विकास की गति में बाधा डालेंगे.

उधर, सुधीर शर्मा ने फेसबुक पोस्ट में कहा, ”मेरे सामाजिक सरोकार, विकास के लिए मेरी प्रतिबद्धता और जनहित के लिए हमेशा आगे खड़े रहना मेरे खून में है और मुझे विरासत में मिला है. …पहले का शीर्षस्थ नेतृत्व वर्तमान नेतृत्व की तरह आंखें मूंद कर नहीं बैठता था. सच्चाई बताने वालों को जलील नहीं करता था, बल्कि पार्टी की प्रति उनकी सेवाओं को अधिमान देता था और उनकी भावनाओं की कद्र करना जानता था.” हिमाचल प्रदेश में पिछले दिनों राज्यसभा की एकमात्र सीट के लिए हुए मतदान में कांग्रेस के छह विधायकों द्वारा ‘क्रॉस वोटिंग’ किये जाने के बाद भाजपा उम्मीदवार ने जीत हासिल की थी और उसके बाद से राज्य में राजनीतिक संकट पैदा हो गया था. विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने गत बृहस्पतिवार को इन छह विधायकों को अयोग्य घोषित कर दिया. विधायकों ने सदन में वित्त विधेयक पर सरकार के पक्ष में मतदान करने के पार्टी व्हिप का उल्लंघन किया था.

By Yogesh Kumar Sahu