ह्यूटन में आसमान में लहराया ‘जय श्री राम’ का बैनर

अयोध्या को अपना ननिहाल मानते हैं खुद को राजकुमारी सूरीरत्ना का वंशज कहने वाले दक्षिण कोरियाई लोग

ह्यूटन/अयोध्या. अयोध्या में राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह के एक सप्ताह के बाद भी भारतीय अमेरिकियों के बीच उत्साह का माहौल है और अमेरिका के ह्यूटन शहर में हवाई जहाज से एक बैनर लहराया गया जिस पर लिखा था, ”यूनिवर्स चैंट्स जय श्री राम” यानी ब्रह्मांड में गूंज रहा जय श्री राम का मंत्र.

ह्यूटन में पिछले दिनों कंपकंपाती सर्दी और बारिश के बाद परंपरागत भारतीय परिधान पहने भारतवंशी लोग रविवार को गुजरात समाज और अन्य स्थानों पर जमा हुए. वे भगवा झंडे हाथ में लिए हुए ‘जय श्री राम’ के नारे लगा रहे थे. जिस विमान पर यह बैनर लहराया गया, उसके पायलट का भी ‘जय श्री राम’ के नारे लगाकर अभिनंदन किया गया.

आयोजकों ने रविवार को दोपहर 1 से 3 बजे के बीच पूरे ह्यूटन में अपनी तरह के पहले हवाई बैनर के बारे में प्रचार किया. भारतीय मूल के लोग आसमान में निहारते रहे. इसके लिए प्रचार करने वाले फ्लायर पर लिखा था, ”आसमान पर नजर रखें और जब आप अपने इलाके में विमान को देखें तो जय श्री राम के नारे लगाएं.” इस शो के आयोजक उमंग मेहता ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ”500 साल के संघर्ष के बाद श्री राम मंदिर के उद्घाटन का उत्सव मनाने के लिए इस कार्यक्रम की कल्पना की गई और इस तरह का संदेश दिया गया जो हिंदुओं के बीच गूंजता रहे.”

अयोध्या को अपना ननिहाल मानते हैं खुद को राजकुमारी सूरीरत्ना का वंशज कहने वाले दक्षिण कोरियाई लोग
धार्मिक नगरी अयोध्या और उत्तरी एशियाई देश दक्षिण कोरिया के बीच एक गहरा नाता जोड़ा जाता है. कोरियाई किवदंतियों के मुताबिक करीब दो हजार साल पहले अयोध्या की एक किशोरवय राजकुमारी सूरीरत्ना नौका से 4500 किलोमीटर का सफर तय करके कोरिया पहुंची थीं और वहां गया साम्राज्य की स्थापना करने वाले राजा किम सूरो के साथ विवाह किया था. इसके बाद वह राजकुमारी रानी हेओ ह्वांग ओक के नाम से प्रसिद्ध हुई थीं.

भारत में इस किवदंती से शायद ही कोई वाकिफ हो और न ही इस तथ्य से कि दक्षिण कोरिया में खुद को सूरीरत्ना का वंशज मानने वाले करीब 60 लाख लोग अयोध्या को अपना ननिहाल मानते हैं. ऐसे में यह स्वाभाविक है कि उनमें से अनेक लोगों ने 22 जनवरी को अयोध्या में रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा के कार्यक्रम को बेहद उत्सुकता से आनलाइन माध्यमों से देखा और अब वे नवनिर्मित राम मंदिर को करीब से देखने के लिये अयोध्या आने का और ज्यादा इंतजार नहीं कर सकते.

‘कारक’ समुदाय के अनेक सदस्य हर साल यहां ‘क्वीन हेओ मेमोरियल पार्क’ में रानी हेओ ह्वांग ओक को श्रद्धांजलि देने के लिये उनके स्मारक पर आते हैं. इस स्मारक को 2001 में उत्तर प्रदेश सरकार और दक्षिण कोरिया सरकार के परस्पर सहयोग से सरयू नदी के किनारे स्थापित किया गया था.

‘सेंट्रल कारक क्लैन सोसाइटी’ के महासचिव किम चिल-सु ने कहा, “अयोध्या हमारे लिए बहुत खास है क्योंकि हम इसे अपनी नानी के घर के रूप में देखते हैं.” किम भी 22 जनवरी को ‘क्वीन हेओ मेमोरियल पार्क’ से कुछ किलोमीटर दूर मंदिर में राम लला की नई मूर्ति के ‘प्राण प्रतिष्ठा’ समारोह में शामिल हुए थे.

यहां ‘क्वीन हेओ मेमोरियल पार्क’ 2,000 वर्ग मीटर क्षेत्र में फैला है. इस पार्क में एक ध्यान कक्ष, रानी और राजा को सर्मिपत मंडप, रास्ते, एक फव्वारा, भित्ति चित्र और ऑडियो-वीडियो सुविधाएं उपलब्ध हैं. मंडप विशिष्ट कोरियाई शैली में टाइल वाली ढलान वाली छत के साथ बनाया गया है.

अगले महीने अपने देश के 22 अन्य लोगों के साथ अयोध्या आने की योजना बना रहे यू जिन ली ने दक्षिण कोरिया से फोन पर ‘पीटीआई-भाषा’ से बातचीत में कहा, “हम स्मारक पर श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए हर साल अयोध्या जाते हैं और इस बार हम नए राम मंदिर में भी जाने की योजना बना रहे हैं. हमने समारोह को ऑनलाइन देखा और यह गजब का अनुभव था. मैं पुराने अस्थायी मंदिर में नहीं गया हूं लेकिन इस मामले से जुड़े विवाद के बारे में मैंने पढ.ा है.”

प्राचीन कोरियाई ग्रंथ, “सैमगुक युसा” के अनुसार, रानी हीओ ह्वांग-ओक को गिम्हे हेओ परिवारों की पूर्वज माता के रूप में माना जाता है. इस ग्रंथ में कहा गया है कि रानी 48 ईस्वी में “अयुता” से कोरिया आई थीं. वह अभी भी कारक कबीले के गिम्हे हेओ परिवारों की पूर्वज मां के रूप में पूजनीय हैं.

दक्षिण कोरियाई दूतावास ने भी ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में 22 जनवरी को राम मंदिर में हुए अभिषेक समारोह के लिए भारत को बधाई दी थी. इस संदेश में कहा गया था, “यह स्थान 48 ईस्वी में अयोध्या और गया (कोरिया) के राजा किम सुरो और रानी श्रीरत्ना (हेओ ह्वांग-ओक) के बीच वैवाहिक संबंध के आधार पर कोरिया-भारत संबंधों के लिए एक बड़ा प्रतीकात्मक महत्व रखता है.” वर्ष 2015 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और दक्षिण कोरिया के पूर्व राष्ट्रपति मून जे-इन ने स्मारक के विस्तार के लिए एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए थे.

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