अहमदाबाद. तेलंगाना की राज्यपाल तमिलिसाई सौंदरराजन ने शुक्रवार को कहा कि उत्तरी राज्य ‘गौमुद्रा’ (गाय का पवित्र प्रतीक) का प्रतिनिधित्व करते हैं, न कि ‘गौमूत्र’ का. उनकी यह टिप्पणी द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) के लोकसभा सदस्य के एक विवादास्पद बयान की पृष्ठभूमि में आई है.
लोकसभा में द्रमुक के सदस्य डी. एन. वी. सेंथिल कुमार ने मंगलवार को मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में भाजपा की हाल में विधानसभा चुनावों में हुई जीत के मद्देनजर हिंदी भाषी राज्यों का विवादास्पद संदर्भ देकर विवाद खड़ा कर दिया था. तमिलनाडु के सांसद ने लोकसभा में एक चर्चा में भाग लेते हुए यह विवादास्पद टिप्पणी की थी. सौंदरराजन ने कुमार के बयान को ”दुर्भाग्यपूर्ण” करार दिया.
उन्होंने कहा, ”मैं तमिलनाडु से हूं और मुझे यह कहना पड़ रहा है, क्योंकि यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि आजकल कुछ लोगों द्वारा उत्तर-दक्षिण विभाजन का उल्लेख किया जा रहा है. मुझे वास्तव में बहुत बुरा लगा जब तमिलनाडु के ही एक संसद सदस्य ने दक्षिणी राज्यों को अलग करते हुये उत्तरी राज्यों को ‘गौमूत्र’ राज्यों के रूप में र्विणत किया.” राज्यपाल यहां ‘इंडिया थिंक काउंसिल’ और गुजरात विश्वविद्यालय की ओर से आयोजित सांस्कृतिक अर्थव्यवस्था सम्मेलन को संबोधित कर रही थी.
उन्होंने कहा, ”मुझे कहना होगा कि ये (उत्तरी राज्य) ‘गौमुद्रा’ राज्य हैं, ‘गौमूत्र’ नहीं. मैं ऐसा इसलिए कह रही हूं क्योंकि यह विभाजन नहीं होना चाहिए. सम्मान होना चाहिए. सौंदरराजन ने कहा कि भारत के लोग आध्यात्मिक रूप से एकजुट हैं और उन्हें क्षेत्रीय आधार पर विभाजित करने के प्रयास अस्वीकार्य हैं.
उन्होंने विश्वविद्यालय के छात्रों और संकाय सदस्यों को संबोधित करते हुए कहा, ”आप लोगों को कैसे विभाजित कर सकते हैं. आध्यात्मिक रूप से लोग विभाजित नहीं हैं. राजनीतिक रूप से कुछ लोग विभाजित करना चाहते हैं, लेकिन ऐसा नहीं हो सकता क्योंकि इस देश के लोग आध्यात्मिक रूप से एकजुट हैं.”