झड़प में एक प्रदर्शनकारी की मौत, 12 पुलिसकर्मी घायल: किसान नेताओं ने ‘दिल्ली चलो’ मार्च 2 दिन के लिए स्थगित किया

चंडीगढ़/जींद. पंजाब-हरियाणा सीमा पर दो प्रदर्शन स्थलों में से एक खनौरी सीमा पर झड़प में एक प्रदर्शनकारी की मौत और लगभग 12 पुलिसर्किमयों के घायल होने के बाद किसान नेताओं ने बुधवार को ‘दिल्ली चलो’ मार्च दो दिन के लिए स्थगित कर दिया.
किसान नेता सरवन सिंह पंधेर ने कहा कि वे शुक्रवार शाम को आगे की रणनीति तय करेंगे.

गतिरोध को समाप्त करने के प्रयास में तीन केंद्रीय मंत्रियों के एक दल के साथ रविवार रात को चौथे दौर की वार्ता के बाद दो दिन की शांति के बाद खनौरी और शंभू में पंजाब के किसानों ने सुबह अपना आंदोलन फिर से शुरू कर दिया था. फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की कानूनी गारंटी और कृषि ऋण माफी सहित अपनी मांगों को लेकर हजारों किसान दो सीमा बिंदुओं पर डेरा डाले रहेंगे.

किसान नेता बलदेव सिंह सिरसा ने कहा कि पीड़ित की पहचान पंजाब के बठिंडा जिले के बालोके गांव के निवासी शुभकरण सिंह (21) के रूप में की गई है. पटियाला स्थित राजिंदर अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक एचएस रेखी ने संवाददाताओं से कहा कि तीन लोगों को खनौरी सीमा बिंदु से अस्पताल लाया गया था जिनमें से एक की मौत हो चुकी थी. उन्होंने बताया कि मृतक के सिर पर चोट लगी थी जबकि अन्य दो लोगों की हालत स्थिर है. हरियाणा पुलिस के एक अधिकारी ने कहा कि लगभग 12 पुलिसकर्मी उस वक्त घायल हो गए, जब उन पर लाठियों से हमला किया गया और पत्थर फेंके गए.

यह पूरी तरह गलत है कि पंजाब ने सीमाओं पर किसानों को एकत्र होने दिया: राज्य सरकार

किसान आंदोलन पर केंद्रीय गृह मंत्रालय के पत्र के जवाब में पंजाब की आम आदमी पार्टी (आप) नीत सरकार ने बुधवार को कहा कि यह दावा करना “पूरी तरह से गलत” है कि राज्य सरकार ने हरियाणा से लगते दो सीमा बिंदुओं पर किसानों को एकत्र होने की अनुमति दी.

पंजाब सरकार का जवाब केंद्र द्वारा प्रदर्शनकारियों के जमावड़े पर कड़ी आपत्ति व्यक्त किए जाने के एक दिन बाद आया. अनुमान जताया गया है कि लगभग 14,000 लोग पंजाब-हरियाणा सीमा पर इकट्ठे हुए हैं. फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की कानूनी गारंटी सहित विभिन्न मांगों को लेकर केंद्र पर दबाव बनाने के लिए ‘दिल्ली चलो’ मार्च के तहत प्रदर्शनकारी किसान हरियाणा से लगते शंभू और खनौरी सीमा बिंदुओं पर डेरा डाले हुए हैं. सुरक्षाबलों ने उन्हें दिल्ली की तरफ बढ़ने से रोक दिया था जिसके चलते झड़पें भी देखने को मिलीं.

पंजाब सरकार को लिखे पत्र में केंद्रीय गृह मंत्रालय ने यह भी कहा कि पिछले कुछ दिनों में राज्य में बिगड़ती कानून-व्यवस्था की स्थिति चिंता का विषय है और कानून तोड़ने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए. गृह मंत्रालय ने कहा कि किसानों की आड़ में कई उपद्रवी पंजाब की हरियाणा से लगती सीमा पर शंभू के पास पथराव और भारी मशीनरी जुटाने जैसी घटनाओं में शामिल हैं.

गृह मंत्रालय ने कहा कि केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 14,000 लोगों को लगभग 1,200 ट्रैक्टर-ट्रॉली, 300 कार, 10 मिनी बस और अन्य छोटे वाहनों के साथ राजपुरा-अंबाला रोड पर शंभू बैरियर पर इकट्ठा होने की अनुमति दी गई है.

इसने कहा कि इसी तरह, पंजाब सरकार ने ढाबी-गुजरान बैरियर पर करीब 500 ट्रैक्टर-ट्रॉली के साथ लगभग 4,500 लोगों को इकट्ठा होने की अनुमति दी है. जवाब में, पंजाब के मुख्य सचिव अनुराग वर्मा ने कहा कि यह दावा करना “पूरी तरह से गलत” है कि पंजाब सरकार लोगों को शंभू और ढाबी-गुजरान सीमाओं पर इकट्ठा होने की अनुमति दे रही है.

उन्होंने कहा कि किसान विरोध प्रदर्शन करने के लिए दिल्ली जा रहे थे लेकिन प्रतिबंधों के कारण किसान पंजाब और हरियाणा की सीमाओं पर हैं. वर्मा ने कहा कि हरियाणा पुलिस द्वारा आंसू गैस के गोले और रबड़ की गोलियां इस्तेमाल किए जाने, बल प्रयोग तथा ड्रोन के कारण अब तक 160 से अधिक लोग घायल हुए हैं.

उन्होंने कहा कि फिर भी पंजाब सरकार ने जिम्मेदारीपूर्वक कानून एवं व्यवस्था की स्थिति बनाए रखी है. वर्मा ने यह भी कहा कि पंजाब सरकार ने किसान नेताओं और केंद्रीय मंत्रियों की समिति के बीच बातचीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और मुख्यमंत्री भगवंत मान खुद चार बैठकों में से तीन में शामिल हुए. उन्होंने कहा कि जिस बैठक में मुख्यमंत्री शामिल नहीं हो सके, उसमें उन्होंने एक कैबिनेट मंत्री और वरिष्ठ अधिकारियों को शामिल होने का दायित्व सौंपा.

मुख्य सचिव ने किसानों के प्रति अधिक सहानुभूति दिखाने का आह्वान करते हुए कहा कि विरोध प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था के मुद्दे से अधिक संवेदनशील तरीके से निपटा जाना चाहिए क्योंकि पंजाब एक सीमावर्ती राज्य है. संबंधित पत्राचार के अनुसार, शांति बनाए रखने के लिए 2,000 से अधिक पुलिसर्किमयों को तैनात किया गया है. मुख्य सचिव ने कहा, “स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और जरूरत पड़ने पर हम कदम उठाएंगे.”

किसान आंदोलन : किसानों ने पराली में आग लगाई, हमले में 12 पुलिसकर्मी घायल

न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की कानूनी गांरटी सहित विभिन्न मांगों को लेकर ‘दिल्ली कूच’ कर रहे किसानों ने बुधवार को हरियाणा के दातासिंह वाला-खनौरी बॉर्डर पर धान की पराली में मिर्चें डालकर आग लगा दी और तलवार, भालों व गंडासों से पुलिस बल पर हमला कर दिया जिसमें 12 पुलिस कर्मी गंभीर रूप से घायल हो गए.

पुलिस अधीक्षक सुमित कुमार ने बताया कि किसान आंदोलन के दौरान उपद्रवियों ने धान की पराली में मिर्ची डालकर आग लगा दी और पुलिस जवानों पर हमला किया. उन्होंने बताया कि पराली के साथ जलती मिर्चों के तीखे धुएं तथा तीखी गंध से सुरक्षाबलों को काफी परेशानी हुई. उन्होंने बताया कि कुछ आंदोलनकारियों ने तलवार, भालों व गंडासों से पुलिस पर हमला कर दिया जिसमें 12 पुलिस कर्मी गंभीर रूप से घायल हुए हैं.

कुमार ने बताया कि दो पुलिसर्किमयों को पीजीआई, रोहतक रेफर किया गया है. प्रत्यक्षर्दिशयों ने बताया कि दिनभर किसानों और पुलिस बल के बीच स्थिति तनावपूर्ण बनी रही. किसानों ने ट्रैक्टर ट्रालियों को बख्तरबंद रूप दे रखा था और उनके पास बरछी भाले, गंडासे और लाठियां थीं. उन्होंने आत्मरक्षा के लिए तसलों का प्रयोग किया.

Related Articles

Back to top button