पंजाब के किसानों ने विरोध प्रदर्शन खत्म किया, सरकार के वादे से पलटने पर ‘बड़े आंदोलन’ की दी चेतावनी

चंडीगढ़. चंडीगढ़ की सीमा पर मोहाली में एकत्रित किसानों ने पंजाब और हरियाणा के राज्यपालों से मुलाकात के बाद अपना तीन दिवसीय विरोध प्रदर्शन मंगलवार को समाप्त कर दिया, लेकिन केंद्र सरकार को चेतावनी दी कि यदि उसने उनकी लंबित मांगों के प्रति गंभीरता नहीं दिखाई तो एक ‘बड़ा आंदोलन’ किया जाएगा.

तीन दिनों से विरोध प्रदर्शन कर रहे पंजाब के किसान नेता हरिंदर सिंह लाखोवाल ने कहा, ”यह तो केवल एक झांकी थी.” लाखोवाल ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ”अगर सरकार ने हमारी मांगों पर गंभीरता नहीं दिखाई तो ‘बड़ा आंदोलन’ किया जाएगा.” उन्होंने कहा कि कुछ मांगें राज्य सरकार से संबंधित हैं जिन्हें उन्होंने अलग से उठाया है और इस संबंध में मुख्यमंत्री के साथ 19 दिसंबर को बैठक होगी.
हरियाणा के किसानों के एक प्रतिनिधिमंडल ने विभिन्न मांगों को लेकर यहां राज्य के राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय से मुलाकात की. बैठक के बाद किसान नेता सुरेश कोथ ने संवाददाताओं से कहा कि वे सरकार को स्पष्ट चेतावनी देना चाहते हैं कि ”हम अपने अधिकारों के लिए लड़ सकते हैं.”

पंजाब के राज्यपाल से मिलने से पहले पंजाब के किसानों के प्रतिनिधियों ने अपने तीन दिवसीय विरोध प्रदर्शन के आखिरी दिन मंगलवार को राज्य के कृषि मंत्री गुरमीत सिंह खुदियान से मुलाकात की. यह प्रदर्शन संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले आयोजित किया गया था जो कई किसान संघों का समूह है.

किसानों ने बाद में पंजाब के राज्यपाल बनवारीलाल पुरोहित से मुलाकात की और मांग की कि निरस्त कृषि कानूनों के खिलाफ 2020-21 के आंदोलन के दौरान उनके खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लिया जाए. किसान अब निरस्त हो चुके कृषि कानूनों के खिलाफ 2020-21 के आंदोलन के दौरान उनके खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने, आंदोलन के दौरान मारे गए किसानों के परिवारों के लिए मुआवजा और किसी एक सदस्य के लिए नौकरी, कर्ज माफी तथा पेंशन की भी मांग कर रहे थे.

फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की कानूनी गारंटी सहित अपनी विभिन्न मांगों को स्वीकार करने का केंद्र पर दबाव डालने के लिए बड़ी संख्या में किसान मोहाली-चंडीगढ़ सीमा पर एकत्र हुए थे. किसान जुलाई और अगस्त में बाढ़ से फसलों को हुई क्षति का मुआवजा देने, मक्का, मूंग, गन्ना जैसी फसलों को निश्चित मूल्य पर खरीदने, 450 रुपये प्रति क्विंटल गन्ना मूल्य देने, बकाया गन्ना भुगतान जारी करने और पराली जलाने के लिये किसानों के खिलाफ दर्ज मामले वापस लेने की भी मांग कर रहे थे. विरोध प्रदर्शन के कारण भारी सुरक्षा व्यवस्था की गई थी और कुछ सड़कों पर यातायात को वैकल्पिक मार्गों पर मोड़ दिया गया था.

Related Articles

Back to top button