निर्वाचित सरकार के संवैधानिक जनादेश को कमतर आंक रहे हैं राहुल: भाजपा

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Tue, 18 Feb 2025 07:00 PM
निर्वाचित सरकार के संवैधानिक जनादेश को कमतर आंक रहे हैं राहुल: भाजपा
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नयी दिल्ली. भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) और निर्वाचन आयुक्त की नियुक्ति संबंधी नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के आरोपों को मंगलवार को खारिज करते हुए इसे ‘राजनीति से प्रेरित’ बताया और उन पर ‘दुर्भावनापूर्ण’ न्यायिक सक्रियता के जरिए निर्वाचित सरकार के संवैधानिक जनादेश को कमतर आंकने का आरोप लगाया.

भाजपा की यह प्रतिक्रिया गांधी के उस आरोप के मद्देनजर आई, जिसमें उन्होंने कहा था कि जब चयन समिति की संरचना और प्रक्रिया को उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी गई है और 48 घंटे से भी कम समय में सुनवाई होनी है, तो ऐसे समय में सीईसी और निर्वाचन आयुक्त की नियुक्ति का निर्णय आधी रात को लेना प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह के लिए गरिमा के प्रतिकूल है.
उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि सरकार का यह कदम वर्ष 2023 में आए उच्चतम न्यायालय के आदेश की मूल भावना का घोर उल्लंघन है.

प्रधानमंत्री मोदी की अध्यक्षता में सोमवार शाम को आयोजित चयन समिति की बैठक के बाद ज्ञानेश कुमार को भारत के नए सीईसी के रूप में नियुक्त किया गया. इस समिति में गृह मंत्री और राहुल गांधी भी शामिल हैं. कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष ने अपना असहमित नोट ‘एक्स’ पर साझा किया जिसमें उन्होंने पैरवी की थी कि न्यायालय की सुनवाई तक इस बैठक को टाला जाना चाहिए. यह बैठक सोमवार शाम संपन्न हुई और फिर देर रात कुमार के चयन की अधिसूचना जारी की गई.

भाजपा के सूचना और प्रौद्योगिकी विभाग के प्रमुख अमित मालवीय ने पलटवार करते हुए कहा कि सीईसी की नियुक्ति पर राहुल गांधी की असहमति न केवल ‘राजनीति से प्रेरित’ है, बल्कि इसमें दम नहीं है. उन्होंने ‘एक्स’ पर कहा, ”यह दुर्भावनापूर्ण न्यायिक सक्रियता के माध्यम से चुनी हुई सरकार के संवैधानिक जनादेश को कमजोर करने का प्रयास है. इसके अतिरिक्त, यह सीईसी की नियुक्ति पर उच्चतम न्यायालय के फैसले की गलत व्याख्या करता है.” मालवीय ने कहा कि मार्च 2023 में उच्चतम न्यायालय ने निर्णय दिया था कि सीईसी और ईसी की नियुक्ति भारत के राष्ट्रपति द्वारा प्रधानमंत्री तथा लोकसभा में विपक्ष के नेता एवं भारत के मुख्य न्यायाधीश की एक समिति की सलाह पर की जाएगी.

हालांकि, अदालत ने स्पष्ट किया कि यह व्यवस्था तब तक लागू रहेगी जब तक संसद एक स्थायी तंत्र स्थापित करने वाला कानून नहीं बना देती. मालवीय ने कहा कि संविधान निर्माताओं की मूल मंशा का पता लगाने के लिए अदालत ने 1949 की संविधान सभा की बहस का विश्लेषण किया था और कहा था कि नियुक्ति प्रक्रिया संसद के विवेक पर छोड़ दी जानी चाहिए. उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति ने फैसले से पहले सीईसी और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति केवल प्रधानमंत्री की सिफारिश पर की है.

मालवीय ने कहा, ”इस प्रकार, वर्तमान नियुक्ति प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित, पारदर्शी और समावेशी है, जिसमें विपक्ष के नेता सहित कई हितधारक शामिल हैं.” कांग्रेस पर हमला करते हुए उन्होंने कहा कि कम से कम पार्टी और विशेष रूप से गांधी परिवार को सीईसी की नियुक्ति पर उपदेश देने का कोई अधिकार नहीं होना चाहिए, क्योंकि उनके रिकॉर्ड में ‘पद का दुरुपयोग करने, आसानी से वश में आने वाले उम्मीदवारों की नियुक्ति करने और बाद में पद छोड़ने के बाद उनकी सेवाओं के लिए पुरस्कार के रूप में राजनीतिक नियुक्तियां करने का रिकॉर्ड है.

उन्होंने कई पूर्व सीईसी की सूची साझा की, जिन्हें बाद में विभिन्न पद दिए गए या तत्कालीन सरकार द्वारा पद्म पुरस्कारों से सम्मानित किया गया. राहुल गांधी ने यह आरोप भी लगाया कि उच्चतम न्यायालय के आदेश का उल्लंघन करके और भारत के प्रधान न्यायाधीश को समिति से हटाकर, मोदी सरकार ने चुनावी प्रक्रिया की ईमानदारी को लेकर करोड़ों मतदाताओं की चिंताओं को बढ़ा दिया है.

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