
नयी दिल्ली. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बुधवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के खिलाफ विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि संगठन की विचारधारा देश के लिए मरने की है, वहीं उन्होंने दावा किया कि पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से सांठगांठ की वजह से देश में कम्युनिस्ट विचाराधारा को जगह मिली और सभी संस्थाओं पर वामपंथी लोग काबिज हुए.
लोकसभा में चुनाव सुधारों पर चर्चा का समापन करते हुए शाह ने नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के भाषण के हवाले से कहा कि सदन में
सवाल उठाए गए कि इस सरकार में देश में महत्वपूर्ण पदों पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के लोग क्यों हैं? शाह ने कहा, ‘‘अगर प्रमुख पदों पर आरएसएस के लोग हैं तो क्या परेशानी है. महत्वपूर्ण पदों पर आरएसएस की विचारधारा के लोगों को रखने के खिलाफ कोई कानून है क्या.’’ उन्होंने कहा कि जब इस देश का प्रधानमंत्री, गृह मंत्री आरएसएस की विचारधारा वाले हो सकते हैं तो अन्य पदों पर क्यों नहीं हो सकते.
उन्होंने कहा कि आरएसएस की विचारधारा देश के लिए मरने की है. शाह ने कहा, ‘‘हम यहां जनादेश से आए हैं, आपकी (कांग्रेस की) कृपा से नहीं.’’ शाह ने दावा किया कि 1969 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने वी वी गिरि को राष्ट्रपति बनाने के लिए वामपंथियों के साथ सांठगांठ की और इसके ऐवज में देश की सभी संस्थाओं पर कम्युनिस्ट विचारधारा के लोगों को बैठा दिया गया. गृह मंत्री ने कहा कि वहीं से देश में विमर्श बदला, लेकिन देश की जनता और संस्कृति को वामपंथी विचारधारा कभी स्वीकार नहीं हो सकती.
एसआईआर को लेकर झूठ फैलाया गया, विदेशी नागरिकों को मतदान का अधिकार नहीं दिया जा सकता: शाह
गृह मंत्री अमित शाह ने बुधवार को लोकसभा में आरोप लगाया कि देश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर झूठ फैलाया गया और जनता को गुमराह करने का प्रयास किया गया. उन्होंने सदन में, चुनाव सुधारों पर चर्चा पर जवाब देते हुए यह भी कहा कि संविधान का अनुच्छेद 327 निर्वाचन आयोग को मतदाता सूची बनाने का पूर्ण अधिकार देता है.
गृह मंत्री ने कहा, ‘‘मैं सदन और देश की जनता को कहना चाहता हूं कि क्या घुसपैठिए तय करेंगे कि मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री कौन होगा.’’ शाह ने कहा कि यह एसआईआर मतदाता सूची के शुद्धिकरण की प्रक्रिया है. उन्होंने कहा कि विदेशी नागरिकों को भारत में मतदान करने का अधिकार नहीं दिया जा सकता.



