जमीन बनाम जमीर : कांग्रेस नेता और पटवारी की सजा बरकरार, दो वर्ष का सश्रम कारावास और अर्थदंड, बेची जमीन को दोबारा बेचने का मामला

Author: Navabharat News Group
UPDATED: Sun, 18 Oct 2026 04:36 PM
जमीन बनाम जमीर : कांग्रेस नेता और पटवारी की सजा बरकरार, दो वर्ष का सश्रम कारावास और अर्थदंड, बेची जमीन को दोबारा बेचने का मामला
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जगदलपुर. प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश बस्तर सिद्धार्थ अग्रवाल की अदालत ने करीब चार दशक पहले बेची गई जमीन को दोबारा बेचने के मामले में पटवारी सहित चार आरोपितों की दोष सिद्धि और सजा बरकरार रखी है। इनमें जगदलपुर के कारोबारी और पूर्व शहर कांग्रेस अध्यक्ष मनोहर लुनिया भी शामिल हैं। 16 अक्टूबर को पारित संयुक्त फैसले में न्यायालय ने दोनों दांडिक अपीलें खारिज कर दीं।

प्रकरण के अनुसार वंदिता पटनायक के पिता बी. राधाकृष्णन ने 27 अगस्त 1984 को जगदलपुर देहात के पटवारी हल्का नंबर 100 स्थित खसरा नंबर 89/10 की 4,800 वर्गफीट जमीन लुनिया परिवार से पंजीकृत विक्रय पत्र के माध्यम से खरीदी थी। नामांतरण और बटांकन के बाद जमीन का नया खसरा नंबर 89/41 आवंटित हुआ और राजस्व अभिलेखों में उनका नाम दर्ज हो गया। मई 2009 में वंदिता पटनायक अपने पति के साथ भूखंड पर मकान बनवाने पहुंचीं, तब वहां दूसरे लोगों द्वारा निर्माण कराया जा रहा था। सीमांकन के दौरान जमीन की दोबारा बिक्री का मामला सामने आया। इसके बाद वर्ष 2010 में कोतवाली थाने में अपराध दर्ज कराया गया।

विचारण न्यायालय ने 22 सितंबर 2018 को पटवारी नरेंद्र कुमार सोनी और मनोहर लुनिया, मूलचंद्र लुनिया तथा बीरचंद्र लुनिया को धोखाधड़ी और आपराधिक षड्यंत्र के आरोप में दोषी ठहराते हुए दो-दो वर्ष के सश्रम कारावास और 100-100 रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई थी। कूटरचना से संबंधित अन्य धाराओं में उन्हें दोषमुक्त किया गया था। अपील की सुनवाई के दौरान सत्र न्यायालय ने दस्तावेजों और गवाहों के बयानों के आधार पर जमीन की दोबारा बिक्री के तथ्य को स्वीकार किया। अदालत ने उचित सतर्कता के बिना दस्तावेजों का सत्यापन करने की दलील को स्वीकार नहीं किया और दोष सिद्धि व सजा बरकरार रखी।

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