सिद्धरमैया, कर्नाटक के कई कांग्रेस नेताओं ने केंद्र के खिलाफ प्रदर्शन किया

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Wed, 07 Feb 2024 07:34 PM
सिद्धरमैया, कर्नाटक के कई कांग्रेस नेताओं ने केंद्र के खिलाफ प्रदर्शन किया
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नयी दिल्ली. कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धरमैया के नेतृत्व में कांग्रेस की प्रदेश इकाई के कई नेताओं ने कर राजस्व वितरण में राज्य के साथ हुए ”अन्याय” को लेकर बुधवार को केंद्र के खिलाफ यहां जंतर-मंतर पर प्रदर्शन किया और प्रदेश के हिस्से की राशि तत्काल जारी करने की मांग की.

इस विरोध प्रदर्शन में उपमुख्यमंत्री और कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष डी.के. शिवकुमार, राज्य के कई सांसद, मंत्री और विधायक शामिल हुए. कांग्रेस का आरोप है कि पिछले कुछ वर्षों में कर राजस्व में उसके प्रदेश के हिस्से की राशि के हस्तांतरण और सहायता अनुदान में कर्नाटक के साथ ”अन्याय” किया गया है. विरोध प्रदर्शन में शामिल कांग्रेस नेताओं ने कहा कि केंद्र सरकार 15वें वित्त आयोग के तहत कर्नाटक को कथित तौर पर हुए 1.87 लाख करोड़ रुपये के नुकसान की भरपाई करे. सिद्धरमैया ने कहा कि यह विरोध भाजपा के खिलाफ नहीं, बल्कि कर्नाटक के साथ भेदभाव के खिलाफ है.

उन्होंने भाजपा के इस आरोप को खारिज किया कि इस विरोध प्रदर्शन का उद्देश्य उत्तर-दक्षिण विभाजन को बढ़ावा देना है. सिद्धरमैया ने प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए कहा, ”हम भारत सरकार द्वारा कर्नाटक और अन्य दक्षिणी राज्यों के साथ किए गए भेदभाव का मुद्दा उठा रहे हैं. इसीलिए मैंने भाजपा और जनता दल (एस) के सभी सांसदों को पत्र लिखकर इस आंदोलन में भाग लेने के लिए कहा था.” उन्होंने कहा कि 14वें वित्त आयोग के तहत राज्यों, खासकर कर्नाटक को कर राजस्व बांटने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले फॉर्मूले को 15वें वित्त आयोग ने बदल दिया था.

सिद्धरमैया ने कहा कि राज्य के राजस्व के नुकसान को रोकने के लिए पुराने फॉर्मूले पर लौटने की जरूरत है. मुख्यमंत्री ने कहा कि 14वें वित्त आयोग द्वारा इस्तेमाल किए गए फॉर्मूले को अपनाने के लिए वह नए वित्त आयोग को भी एक प्रतिवेदन प्रस्तुत करेंगे. शिवकुमार ने कहा कि कर्नाटक वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) संग्रह में दूसरे स्थान पर है और देश के राजस्व में सबसे बड़ा योगदानकर्ता है.

उन्होंने कहा, ”हम अपना अधिकार मांग रहे हैं, अपना हिस्सा मांग रहे हैं. कर्नाटक सरकार ने केंद्र से सूखा राहत के लिए धन मांगा था, लेकिन एक रुपया भी नहीं दिया गया.” शिवकुमार ने यह भी कहा, ”हम कर्नाटक की आवाज हैं. हम न्याय की मांग करते हैं.” कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने एक बयान में कहा कि कर्नाटक के शीर्ष नेताओं ने पूरे राज्य के हितों की रक्षा के लिए जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन किया.

उन्होंने कहा, ”प्रधानमंत्री ”सहकारी संघवा” के बारे में बड़ी-बड़ी बातें करते हैं, लेकिन हमेशा की तरह यह सिर्फ एक जुमला है. उनके अलोकतांत्रिक, जन-विरोधी विचार कर्नाटक के साथ-साथ अन्य विपक्षी शासित राज्यों में सूखा राहत के मुद्दे पर स्पष्ट हैं. धन देने से इनकार कर दिया गया; खाद्यान्न देने से इनकार कर दिया गया, परियोजनाओं में देरी हुई.” रमेश ने कहा, ”कर्नाटक और कांग्रेस न्याय की मांग करते हैं. उचित राशि तत्काल जारी की जाए.” उन्होंने कहा कि यह भाजपा के खिलाफ कांग्रेस पार्टी का राजनीतिक विरोध नहीं है, बल्कि मोदी सरकार के अनुचित व्यवहार को उजागर करने के लिए पूरे राज्य का विरोध है.

कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया, ”2014 के बाद से मोदी सरकार द्वारा कर्नाटक के लिए किए गए आर्थिक अन्याय अनगिनत हैं. कुल मिलाकर हजारों करोड़ रुपये का गलत तरीके से दुरुपयोग किया गया है.” उन्होंने दावा किया कि इस “अन्याय” का सबसे बड़ा उदाहरण यह है कि कर्नाटक को सूखा राहत राशि देने से इनकार कर दिया गया है, जबकि राज्य के 236 तालुकाओं में से 223 सूखे के प्रभाव से जूझ रहे हैं, जबकि 123 में गंभीर सूखे की स्थिति है.

रमेश ने कहा, ”कर्नाटक को सहायता राशि के रूप में 17,900 करोड़ रुपये की जरूरत है और किसानों की 35,000 करोड़ रुपये की फसल बर्बाद हो गई है, लेकिन केंद्र ने इस गंभीर स्थिति से निपटने के लिए एक भी रुपया जारी नहीं किया है.” माकपा के दिग्गज नेता और केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन अपने कैबिनेट सहयोगियों के साथ 8 फरवरी को दक्षिणी राज्य के प्रति केंद्र की कथित उदासीनता के खिलाफ दिल्ली में विरोध प्रदर्शन करेंगे.

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