4000 करोड़ के भारी बजट के साथ इंडियन सिनेमा में रिलीज हुई फिल्म रामायण दर्शकों को पसंद आई है। दर्शकों की एक ही मांग कि आदिपुरुष जैसी भूल न दोहराई जाए, तकनीकी चमक से ज्यादा कथा की आत्मा जरूरी है।
Bollywood इस बार भव्यता का चोला पहनकर रामायण का पुनः मज़ाक बनाने आया है। रावण का महिमामंडन करती इस फिल्म में रामत्व का भाव ही गायब है। वाल्मीकि रामायण का रावण क्रूर, अहंकारी और Lustful था, जबकि यहाँ Revenge का रूप देकर रावण को Hero के रूप में पेश किया जा रहा है।
फिल्म ‘रामायण’ का नया गाना ‘मंगल रंग’ रिलीज होते ही सवालों के घेरे में आ गया था लेकिन यह दर्शकों को पसंद आया। विवाह के मंगलगीत में सूफियाना कव्वाली और ‘कुन फाया कुन’ की झलक पर जरूर दर्शक बंटे दिखे।
संगीतकार ए.आर. रहमान की धुन और डॉ. कुमार विश्वास के बोलों पर उठे सवाल?. क्या रामकथा का प्रसंग और जनकपुर की मिठास बॉलीवुड प्रयोगों में खो गई है, ऐसा समझ में आया।
रणबीर की मर्यादा और यश का रौद्र रूप दर्शकों को खूब पसंद आया। VFX में फिल्म की भव्यता देखते ही बनी। संगीत और डायलॉग थोड़े फीके लगे। ऐसा लगता है मानो मेकर्स ने रामायण नहीं, बल्कि रावणायन बनाई है।
भगवान राम के रोल में रणबीर ने अच्छा काम किया है और रावण के रोल में यश को देखकर ऐसा लगता है मानो वही असली रावण हों। बाकी सभी किरदारों ने भी अच्छा काम किया है और विजुअल्स तो कमाल के हैं। हालांकि, फिल्म देखकर आपको थोड़ा टीवी सीरियल जैसा महसूस हो सकता है, लेकिन जटायु वाला अहम सीन टिकट के पैसे वसूल करा देता है।
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