VIDEO छत्तीसगढ़ के सबसे प्राचीन देवी मंदिरों के दर्शन कीजिए और जानिए इनका इतिहास, कहां स्थित हैं

Author: Navabharat News Group
UPDATED: Mon, 19 Oct 2026 06:44 PM
VIDEO छत्तीसगढ़ के सबसे प्राचीन देवी मंदिरों के दर्शन कीजिए और जानिए इनका इतिहास, कहां स्थित हैं
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1- बम्लेश्वरी मंदिर डोंगरगढ़ (Bambleshwari temple

यह मंदिर छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले के डोंगरगढ़ में स्थित है। मान्यतानुसार कामावतीपुरी के राजा वीरसेन ने डोंगरगढ़ की पहाड़ी में महेश्वरी देवी का मंदिर का निर्माण कराया था। यहां बगुलामुखी (बम्लेश्वरी) मंदिर है। डोंगरगढ़ में शारदीय एवं वासंतीय नवरात्री में भव्य मेला आयोजित किया जाता है।

2- महामाया मंदिर रतनपुर ( Mahamaya Temple):

महामाया मंदिर बिलापुर जिले के रतनपुर में स्थित एक प्राचीन मंदिर है। महामाया मंदिर का निर्माण कलचुरी राजा रत्नदेव प्रथम ने 12-13 सदीं में कराया था। मान्यतानुसार यहां रतनपुर में देवी सती का दाहिना स्कंद गिरा था। यह स्थल बिलासपुर से करीब 37 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।

3- दंतेश्वरी माता मंदिर दंतेवाड़ा (Danteshwari Mata Mandir) :

दंतेश्वरी माता मंदिर दंतेवाड़ा जिले में जगदलपुर शहर से लगभग 84 किलोमीटर दूर डंकिनी-शंखिनी के संगम पर स्थित है। इसे 52 शक्तिपीठों में से एक माना जाता है। माना जाता है कि देवी सती की दांत यहां गिरा था, इसलिए दंतेवाड़ा नाम का नाम लिया गया। इस मंदिर का निर्माण काकतीय वंश के शासकों के द्वारा किया गया था। दंतेश्वरी माता बस्तर राज परिवार की यह कुल देवी है। पूर्ण पढ़ें

4- चंद्रहासिनी माता मंदिर चंद्रपुर ( Chandrahasini Mata Temple ):

यह मंदिर सक्ती जिला के डभरा तहसील में चंद्रपुर में स्थित है। यह काफी प्रशिद्ध धार्मिक स्थल है। यहां संबलपुर के राजा चंद्रहास द्वारा मंदिर निर्माण और देवी स्थापना का उल्लेख है। देवी की आकृति चंद्रहास अर्थात चन्द्रमा के सामान मुख होने के कारण उन्हें “चंद्रहासिनी देवी” कहा जाता है। चंद्रहासिनी मंदिर से थोड़ी दूरी पर नाथलदाई का मंदिर स्थित है, जो की रायगढ़ जिले की सीमा अंतर्गत आता है। मान्यतानुसार, मां चंद्रहासिनी के दर्शन के बाद माता नाथलदाई के दर्शन भी जरूरी है।

5- माता अंगारमोती, धमतरी (Maa Angarmoti) :

माता अंगारमोती की प्रतिमा धमतरी जिले में दो स्थानों पर स्थापित है। गंगरेल में माता का पैर स्थापित है, वहीं रुद्रीरोड सीताकुंड में माता का धड़ विराजमान है। धड़ तालाब में मछुआरों के जाल में फंसा मिला, मछुआरों ने इसे मामूली पत्थर समझकर वापस तालाब में ही वपर डाल दिया। फिर गांव के ही एक व्यक्ति को माता का स्वप्र आया फिर तालाब से निकालकर पास के ही झाड़ के नीचे स्थापित किया जाए।

वीडियो : ए.के.साहू के ब्लॉग से साभार.

 

 

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