पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री विपक्षी दलों को धमका रही हैं: भाजपा

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Wed, 28 Aug 2024 08:25 PM
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री विपक्षी दलों को धमका रही हैं: भाजपा
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कोलकाता. भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने बुधवार को पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर आरोप लगाया कि वह ‘बदला नहीं, केवल बदलाव’ का अपना पुराना नारा छोड़कर विपक्षी दलों को धमकाने का काम कर रही हैं. तृणमूल कांग्रेस छात्र परिषद (टीएमसीपी) के स्थापना दिवस के मौके पर आयोजित एक रैली में बनर्जी ने कहा कि बदलते समय और परिस्थितियों के अनुरूप नारे को अद्यतन करने की जरूरत है.

उन्होंने कहा, ”जब आपका अपमान किया जाता है तो प्रतिरोध और विरोध करने का समय आ गया है. जब आप पर हमले होते हैं, तो आपको चुपचाप नहीं बैठना चाहिए. आप कैसे प्रतिक्रिया देते हैं, यह आप पर निर्भर करता है.” इस पर पलटवार करते हुए भाजपा की पश्चिम बंगाल इकाई के अध्यक्ष एवं केंद्रीय राज्य मंत्री सुकांत मजूमदार ने बनर्जी की टिप्पणी को धमकी भरा बताते हुए इसकी निंदा की और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को एक पत्र लिखकर कहा कि बनर्जी ”अब इस तरह के महत्वपूर्ण पद पर रहने की हकदार नहीं हैं.”

मजूमदार ने पत्रकारों से कहा, ”एक मुख्यमंत्री संवैधानिक रूप से पक्षपातपूर्ण रवैये से ऊपर उठने के लिए बाध्य होता है और उनके (बनर्जी) द्वारा इस तरह के डराने वाले बयान देना अकल्पनीय है जो लोकतंत्र के लिए खतरा पैदा करता है.” उन्होंने कहा कि बनर्जी की टिप्पणी तृणमूल कांग्रेस के समर्थकों को कानून अपने हाथ में लेने और विपक्षी सदस्यों पर हमला करने के लिए उकसा सकती है और इससे लोकतांत्रिक असहमति को दबाया जा सकता है.

उन्होंने बनर्जी के उस बयान की भी आलोचना की जिसमें उन्होंने कहा था कि यदि बंगाल में आग लगी तो पड़ोसी राज्य जैसे झारखंड, ओडिशा, असम और यहां तक कि दूर स्थित दिल्ली भी प्रभावित होंगे. मजूमदार ने इसे गणतंत्र की संघीय भावना के विपरीत बताया. उन्होंने कहा, ”एक निर्वाचित मुख्यमंत्री के लिए ऐसी टिप्पणी करना ठीक नहीं है. वह ऐसी बातें कैसे कह सकती हैं?” उन्होंने आरजी कर अस्पताल के चिकित्सकों के आंदोलन के बारे में उनकी टिप्पणियों की भी आलोचना की. उन्होंने कहा, ”अदालत ने पहले ही जूनियर चिकित्सकों के लोकतांत्रिक अधिकारों को बरकरार रखा है. जब तक न्याय नहीं मिल जाता, मुख्यमंत्री उन्हें चुप रहने के लिए मजबूर नहीं कर सकतीं.”

‘बंगाल बंद’ लागू करवाने की कोशिश के दौरान भाजपा कार्यकर्ताओं की कई स्थानों पर पुलिस से झड़प
पश्चिम बंगाल में 12 घंटे का बंद आहूत करने की कोशिश में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कार्यकर्ताओं की कई स्थानों पर बुधवार को पुलिस से झड़प हुई और राज्य में इस बंद का मिला-जुला असर देखा गया. सुबह से ही सड़कों और रेल की पटरियों को अवरुद्ध करने के लिए पूर्व राज्यसभा सदस्य रूपा गांगुली और लॉकेट चटर्जी तथा राज्यसभा सदस्य समिक भट्टाचार्य व विधायक अग्निमित्रा पॉल समेत कई भाजपा नेताओं को हिरासत में लिया गया है.

भाजपा ने मंगलवार को ‘नबान्न अभियान’ में भाग लेने वाले लोगों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई के विरोध में बुधवार को ‘बंगाल बंद’ का आह्वान किया था जो आज सुबह छह बजे शुरू हुआ. कोलकाता के आरजी कर अस्पताल में एक चिकित्सक के साथ दुष्कर्म और हत्या की घटना को लेकर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के इस्तीफे की मांग करते हुए राज्य सचिवालय (नबान्न) तक मार्च निकाला गया था. यह मार्च एक नवगठित छात्र समूह ‘छात्र समाज’ ने आयोजित किया था.

इस बंद से राज्य में जनजीवन आंशिक रूप से प्रभावित हुआ है और कई लोग सड़कों पर उपद्रव की आशंका से अपने घरों में ही रहे.
राजधानी कोलकाता में सड़कों पर चहल-पहल कम रही. सड़कों पर बहुत कम बस, ऑटो रिक्शा और टैक्सी नजर आईं. निजी वाहनों की संख्या भी कम रही. हालांकि, बाजार और दुकानें पहले की तरह खुली हैं. स्कूल और कॉलेज खुले थे लेकिन छात्रों की संख्या बेहद कम रही. कोलकाता में कई अंग्रेजी माध्यम के विद्यालयों ने कक्षाएं निलंबित कर दीं.

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