वंदे मातरम् के अपमान पर मिलेगी कितने साल की सजा, सरकार के नए कानून से क्या-क्या बदल जाएगा?

Author: Nandkishoryadav
UPDATED: Thu, 30 Jul 2026 04:38 PM
वंदे मातरम् के अपमान पर मिलेगी कितने साल की सजा, सरकार के नए कानून से क्या-क्या बदल जाएगा?
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नई दिल्ली: लोकसभा में आज राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) विधेयक, 2026 को पारित कर दिया। यह विधेयक 29 जुलाई को राज्यसभा से पास हो गया था। अब राष्ट्रपति के मंजूरी के बाद यह कानून बन जाएगा। इसके जरिए राष्ट्रीय सम्मान अपमान निवारण अधिनियम, 1971 की धारा 3 में संशोधन का प्रस्ताव है।

ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर इस विधेयक में क्या प्रावधान हैं? इसकी जरूरत क्यों पड़ी? इससे क्या बदलाव होंगे? पहले का कानून क्या था? राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत के लिए क्या दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं? राष्ट्रगीत का इतिहास क्या है?

विधेयक में क्या प्रस्ताव है?

विधेयक के अनुसार, अगर कोई व्यक्ति जानबूझकर राष्ट्रीय गान या राष्ट्रीय गीत का गायन रोकता है या राष्ट्रीय गान या राष्ट्रीय गीत गा रही किसी सभा में व्यवधान उत्पन्न करता है तो उसे अधिकतम तीन वर्ष का कारावास, जुर्माना या दोनों से दंडित किया जा सकेगा।

विधेयक क्यों लाया गया?

  • 24 जनवरी 1950 को संविधान सभा की बैठक में उसके अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने कहा था कि बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित ‘वंदे मातरम्’, जिसने भारत के स्वतंत्रता संग्राम में ऐतिहासिक भूमिका निभाई, उसे ‘जन गण मन’ के समान सम्मान और समान दर्जा प्राप्त होगा।
  • वर्तमान में राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ के गायन के अपमान या उसमें बाधा डालने को रोकने के लिए कोई विशिष्ट कानूनी प्रावधान नहीं है। इसलिए अधिनियम की धारा 3 में संशोधन कर राष्ट्रीय गीत को भी इसके दायरे में शामिल करने का प्रस्ताव किया गया है, ताकि ऐसे कृत्य दंडनीय बन सकें।

राष्ट्रीय सम्मान अपमान निवारण अधिनियम, 1971 क्या है?

यह कानून 23 दिसंबर 1971 को संसद द्वारा बनाया गया। इसका उद्देश्य भारत के राष्ट्रीय ध्वज, संविधान और राष्ट्रीय गान के सम्मान की रक्षा करना तथा उनके अपमान को दंडनीय बनाना था। यह कानून पूरे भारत में लागू है।

 

कानून में कौन-कौन से प्रावधान?

1. धारा 2: राष्ट्रीय ध्वज और संविधान का अपमान
इस धारा के तहत अगर कोई व्यक्ति सार्वजनिक स्थान पर या सार्वजनिक दृष्टि में:

  • भारत के राष्ट्रीय ध्वज को जलाता है,
  • फाड़ता है,
  • विकृत या गंदा करता है,
  • पैरों तले रौंदता है,
  • उसका अनादर करता है,
  • या भारत के संविधान का अपमान करता है तो उसे अधिकतम तीन वर्ष का कारावास, जुर्माना या दोनों की सजा हो सकती है।

कानून यह भी स्पष्ट करता है कि अगर कोई व्यक्ति संविधान या राष्ट्रीय ध्वज के बारे में कानूनी तरीके से आलोचना करता है या संशोधन की मांग करता है, तो उसे अपराध नहीं माना जाएगा।

2. धारा 3: राष्ट्रीय गान के गायन में बाधा
अगर कोई व्यक्ति जानबूझकर:

  • भारतीय राष्ट्रीय गान (जन गण मन) का गायन रोकता है, या
  • राष्ट्रीय गान गा रही सभा में व्यवधान उत्पन्न करता है तो उसे अधिकतम तीन वर्ष का कारावास, जुर्माना या दोनों की सजा हो सकती है।

3. धारा 3ए: दोबारा अपराध करने पर कड़ी सजा
बाद में इस अधिनियम में धारा 3ए जोड़ी गई। इसके अनुसार, यदि कोई व्यक्ति धारा 2 या धारा 3 के तहत पहले दोषी ठहराया जा चुका है और फिर वही अपराध दोबारा करता है, तो दूसरी और उसके बाद की हर सजा में कम-से-कम एक वर्ष का कारावास होगा।

 

इस कानून में क्या शामिल नहीं था?

1971 के इस अधिनियम में:

  • राष्ट्रीय ध्वज शामिल था।
  • भारत का संविधान शामिल था।
  • राष्ट्रीय गान (जन गण मन) शामिल था।

लेकिन राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ का कोई उल्लेख नहीं था। यानी अगर कोई व्यक्ति वंदे मातरम् के गायन में जानबूझकर बाधा डालता था, तो इस अधिनियम की धारा 3 सीधे उस पर लागू नहीं होती थी। इसी कमी को दूर करने के लिए राष्ट्रीय सम्मान (संशोधन) विधेयक, 2026 लाया गया है, जिसमें धारा 3 में राष्ट्रीय गीत जोड़ने का प्रस्ताव किया गया है।

 

राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ और राष्ट्रीय गान ‘जन गण मन’ में क्या अंतर है?

राष्ट्रीय सम्मान (संशोधन) विधेयक, 2026 आने से पहले गृह मंत्रालय ने 9 जुलाई 2026 को राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ और राष्ट्रीय गान ‘जन गण मन’ के गायन एवं वादन को लेकर विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए। गृह मंत्रालय ने यह आदेश सभी राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और केंद्र सरकार के सभी मंत्रालयों व विभागों को भेजा और कहा कि इन निर्देशों का सख्ती से पालन कराया जाए।

आदेश में बताया गया कि किन-किन अवसरों पर राष्ट्रीय गीत और राष्ट्रीय गान गाए या बजाए जाएंगे, किन मौकों पर दोनों का उपयोग किया जा सकता है और किन कार्यक्रमों में दोनों को कार्यक्रम की शुरुआत और समापन पर प्रस्तुत किया जाएगा।

गृह मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि अगर किसी कार्यक्रम में राष्ट्रीय गीत और राष्ट्रीय गान दोनों प्रस्तुत किए जाएं, तो पहले राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ और उसके बाद राष्ट्रीय गान ‘जन गण मन’ प्रस्तुत किया जाएगा। अदक किसी राज्य में राज्य गीत भी राष्ट्रीय गीत या राष्ट्रीय गान के साथ गाया या बजाया जाता है, तब भी यही क्रम लागू होगा।

आदेश में यह भी कहा गया कि राष्ट्रीय गीत और राष्ट्रीय गान के अधिकृत शब्द और सही उच्चारण का ही पालन किया जाए। दोनों के अधिकृत पाठ और सही उच्चारण गृह मंत्रालय की वेबसाइट पर उपलब्ध कराए गए हैं।

इसके अलावा, सभी राज्य सरकारों, केंद्र शासित प्रदेशों और संबंधित संस्थानों एवं संगठनों को निर्देश दिया गया कि वे अपने अधीन सभी विभागों को आवश्यक आदेश जारी करें, ताकि इन दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जा सके।

राष्ट्रीय गीत (वंदे मातरम्) से जुड़े निर्देशों में यह भी बताया गया है कि इसका आधिकारिक संस्करण लगभग 3 मिनट 10 सेकंड का है, इसे किन औपचारिक अवसरों पर बजाया या गाया जाएगा, किन अवसरों पर सामूहिक गायन किया जा सकता है, और जब भी राष्ट्रीय गीत व राष्ट्रीय गान दोनों प्रस्तुत हों, राष्ट्रीय गीत पहले प्रस्तुत किया जाएगा। साथ ही, जब राष्ट्रीय गीत का आधिकारिक संस्करण गाया या बजाया जाए, तो सामान्यतः उपस्थित लोगों को सम्मान में सावधान की मुद्रा में खड़ा होना चाहिए।

इस संशोधन की मांग क्यों उठी?

यह संशोधन ऐसे समय में लाया गया है, जब पिछले वर्ष (2025) वंदे मातरम् की रचना के 150 वर्ष पूरे हुए थे। इस अवसर पर केंद्र सरकार ने संसद के शीतकालीन सत्र में इस विषय पर चर्चा कराई, संसद में प्रस्ताव पारित कराया और कई राज्यों में इससे जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए। इसके अलावा, पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद वंदे मातरम् को लेकर राजनीतिक बहस भी तेज रही। पश्चिम बंगाल में सरकारी कार्यक्रमों में ‘वंदे मातरम्’ गाए जाने या न गाए जाने का मुद्दा भाजपा और तृणमूल कांग्रेस (TMC) के बीच लगातार राजनीतिक विवाद का विषय बना रहा। पश्चिम बंगाल में भाजपा की
सरकार बनने के बाद राज्य के सभी सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों व मदरसों की सुबह की प्रार्थना सभा में राष्ट्रगीत वंदे मातरम का गायन अनिवार्य कर दिया है।

वंदे मातरम् का इतिहास क्या है?

  • वंदे मातरम् की रचना बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने की थी।
  • यह गीत पहली बार 7 नवंबर 1875 को साहित्यिक पत्रिका बंगदर्शन में प्रकाशित हुआ।
  • बाद में इसे बंकिम चंद्र के प्रसिद्ध उपन्यास आनंदमठ (1882) में शामिल किया गया।
  • रवीन्द्रनाथ टैगोर ने इस गीत को संगीतबद्ध किया।
  • स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान ‘वंदे मातरम्’ देशभक्ति और ब्रिटिश शासन के खिलाफ संघर्ष का प्रमुख प्रतीक बन गया।
  • 1907 में मैडम भीकाजी कामा ने जर्मनी के स्टुटगार्ट में पहली बार विदेश में भारतीय तिरंगा फहराया, जिस पर ‘वंदे मातरम्’ अंकित था।
  • 2025 में वंदे मातरम् की रचना के 150 वर्ष पूरे हुए, जिसे भारत की राष्ट्रीय पहचान और स्वतंत्रता आंदोलन की विरासत के महत्वपूर्ण पड़ाव के रूप में याद किया गया।

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