सैनिकों की वापसी व तनाव में कमी आगे बढ़ने का रास्ता: पूर्वी लद्दाख पर राजनाथ ने कहा

नयी दिल्ली. पूर्वी लद्दाख में भारत-चीन के बीच सैन्य टकराव जारी रहने के बीच रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को कहा कि भारतीय सैनिक ”दृढ़ता” से तैनात हैं और मामले के शांतिपूर्ण हल के लिए दोनों पक्षों के बीच बातचीत जारी रहेगी क्योंकि सैनिकों की वापसी और तनाव में कमी ही आगे बढ़ने का रास्ता है.

थल सेना के शीर्ष कमांडरों को संबोधित करते हुए सिंह ने देश में “सबसे भरोसेमंद और प्रेरक” संगठनों में से एक के प्रति देश के करोड़ों नागरिकों के भरोसे की पुष्टि की. सेना के कमांडरों ने चीन और पाकिस्तान की सीमाओं पर राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियों और बल की समग्र युद्ध क्षमता को बढ़ावा देने के तरीकों पर गहन विचार-विमर्श किया.

रक्षा मंत्री ने देश की “रक्षा और सुरक्षा” दृष्टि को सफलतापूर्वक नयी ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए सेना नेतृत्व की सराहना की और कहा कि राष्ट्र निर्माण में बल की भूमिका अहम है. सिंह ने अपने संबोधन में सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) की भी प्रशंसा की और कहा कि इसके प्रयासों से पश्चिमी और उत्तरी सीमाओं पर सड़क संचार में “व्यापक सुधार” हुआ है.

रक्षा मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि उत्तरी सीमाओं की मौजूदा स्थिति के संबंध में सिंह ने पूरा विश्वास जताया कि सैनिक दृढ़ता से तैनात हैं और शांतिपूर्ण समाधान के लिए चल रही बातचीत जारी रहेगी तथा सैनिकों की वापसी और तनाव कम करना ही आगे का रास्ता है.

भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच पूर्वी लद्दाख में कुछ स्थानों पर लगभग चार साल से गतिरोध बना हुआ है, हालांकि दोनों पक्षों ने व्यापक राजनयिक और सैन्य वार्ता के बाद कई क्षेत्रों से सैनिकों की वापसी पूरी कर ली है. पाकिस्तान के साथ लगी सीमा पर की स्थिति का जिक्र करते हुए, रक्षा मंत्री सिंह ने सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ सेना की कार्रवाई की सराहना की, और कहा कि “शत्रु” द्वारा छद्म युद्ध जारी है.

सिंह ने जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद से निपटने में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों, स्थानीय पुलिस और सेना के बीच “उत्कृष्ट तालमेल” की भी सराहना की. उन्होंने कहा, “केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में समन्वित अभियान से क्षेत्र में स्थिरता बढ़ाने में मदद मिली है और इसे जारी रहना चाहिए.” दुनिया की जटिल स्थिति को रेखांकित करते हुए सिंह ने कहा कि यह वैश्विक स्तर पर हर किसी को प्रभावित करता है.

उन्होंने कहा, “हाइब्रिड युद्ध सहित गैर-परंपरागत युद्ध भविष्य में पारंपरिक युद्धों का हिस्सा होंगे. साइबर, सूचना, संचार, व्यापार और वित्त भविष्य के टकरावों का एक अभिन्न हिस्सा बन गए हैं.” उन्होंने कहा, “यह जरूरी है कि सशस्त्र बलों को अपनी योजना बनाते और रणनीति तैयार करते समय इन सभी पहलुओं को ध्यान में रखना होगा.” सिंह ने हर जरूरत के समय नागरिक प्रशासन को सहायता प्रदान करने के अलावा, देश की सीमाओं की रक्षा करने और आतंकवाद से लड़ने में सेना द्वारा निभाई गई बेहतरीन भूमिका को रेखांकित किया.

उन्होंने कहा, “सेना सुरक्षा, मानवीय सहायता और आपदा के समय राहत, चिकित्सा सहायता से लेकर देश में स्थिर आंतरिक स्थिति बनाए रखने तक हर क्षेत्र में मौजूद है…राष्ट्र निर्माण के साथ ही समग्र राष्ट्रीय विकास में भी भारतीय सेना की भूमिका महत्वपूर्ण है.” सिंह ने मातृभूमि की रक्षा के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले सभी वीरों को श्रद्धांजलि अर्पित की. सेना कमांडरों का सम्मेलन शीर्ष स्तरीय द्विवार्षिक कार्यक्रम है जो हर साल अप्रैल और अक्टूबर में आयोजित किया जाता है.

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