समरकंद. चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने पाकिस्तान में सीपीईसी परियोजनाओं पर काम कर रहे सैकड़ों चीनी र्किमयों को पुख्ता सुरक्षा मुहैया करने की यहां शुक्रवार को पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से अपील की. शी ने उज्बेकिस्तान के ऐतिहासिक शहर में यहां शहबाज शरीफ से मुलाकात के दौरान चीन और पाकिस्तान के बीच विकास रणनीतियों में मजबूत तालमेल बनाने पर भी जोर दिया.
चीन की सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ की खबर के मुताबिक, समरकंद में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के शिखर सम्मेलन से अलग दोनों नेताओं की मुलाकात हुई, जिस दौरान दोनों देशों ने रेलवे, ई-कॉमर्स और अन्य क्षेत्रों में सहयोग से जुड़े दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किये. समझौतों के विवरण का खुलासा नहीं किया गया है.
शी ने चीनी र्किमयों पर हुए आतंकी हमलों को लेकर चिंता जताते हुए शहबाज शरीफ से कहा, ‘‘चीन आशा करता है कि पाकिस्तान चीनी नागरिकों और प्रतिष्ठानों को अपने यहां पुख्ता सुरक्षा मुहैया कराएगा तथा चीन के कारोबार के वैध हितों की रक्षा करेगा.’’ चीन ने पाकिस्तान में 60 अरब डॉलर की लागत वाले चीन पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (सीपीईसी) परियोजनाओं में अपने सैकड़ों र्किमयों को काम पर लगा रखा है.
हालिया खबरों में कहा गया है कि चरमपंथी समूहों द्वारा समय-समय पर किये जाने वाले हमलों से चीनी र्किमयों को बचाने में पाकिस्तान की बढ़ती नाकामी के कारण दोनों मित्र देशों के बीच तनाव पैदा हो रहा है. अप्रैल में, कराची विश्वविद्यालय परिसर में हुए एक आत्मघाती हमले में तीन चीनी नागरिक मारे गये थे. हमले की जिम्मेदारी अलगाववादी समूह बलूच लिबरेशन आर्मी ने ली थी, जो बलूचिस्तान में चीन के निवेश का विरोध कर रहा है.
कुछ अन्य हमलों के लिए पाकिस्तान में कट्टरपंथी इस्लामी आतंकी संगठनों को जिम्मेदार ठहराया गया है. पाकिस्तानी मीडिया में आई खबरों के मुताबिक, चीन सीपीईसी परियोजनाओं में प्रगति की धीमी गति को लेकर भी चिंतित है. चीनी निवेशक सीपीईसी ढांचे के तहत अनुबंध के अपने दायित्वों के निर्वहन में इस्लामाबाद की नाकामी से भी कथित तौर पर नाराज हैं. उल्लेखनीय है कि भारत ने सीपीईसी को लेकर चीन के समक्ष विरोध दर्ज कराया है क्योंकि यह गलियारा पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) से होकर गुजरेगा.
बाहरी ताकतों को खुद को अस्थिर करने का मौका न दें मध्य एशियाई देश
चीन के राष्ट्रपति शी चिनंिफग ने शुक्रवार को मध्य एशियाई देशों से कहा कि वे बाहरी तत्वों को ‘‘सरकार विरोधी आंदोलनों’’ के जरिए उन्हें अस्थिर नहीं करने दें. साथ ही उन्होंने क्षेत्रीय आतंकवाद रोधी प्रशिक्षण केंद्र स्थापित करने की भी पेशकश की. रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और मध्य एशिया, भारत और ईरान के नेताओं के साथ सुरक्षा शिखर सम्मेलन में की गई शी की यह टिप्पणी चीन की इस आधिकारिक ंिचता को दर्शाती है कि पश्चिमी देश लोकतंत्र समर्थकों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का समर्थन करके चीन की सरकार और अन्य निरंकुशतावादी सरकारों को कमजोर करने की साजिश रचते रहे हैं.
शी ने शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के नेताओं को संबोधित करते समय उन प्रदर्शनों की ओर इशारा किया, जिनकी वजह पूर्व सोवियत संघ और मध्य पूर्व के कई देशों में सरकारें गिर गईं. शी ने कहा, ‘‘हमें बाहरी ताकतों को सरकार विरोधी आंदोलन खड़े करने से रोकना चाहिए.’’ उन्होंने स्थानीय आतंकवाद रोधी प्रशिक्षण केंद्र स्थापित करने की भी पेशकश की . हालांकि उन्हें इस बारे में कोई विस्तृत जानकारी नहीं दी.