वाशिंगटन. बांग्लादेश की अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना के बेटे संजीब वाजिद ने मोहम्मद यूनुस नीत अंतरिम सरकार पर अवामी लीग के नेताओं के खिलाफ राजनीतिक प्रतिशोध के लिए न्यायपालिका का दुरुपयोग करने का आरोप लगाया. वाजिद ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक लंबे पोस्ट में ये आरोप ऐसे समय में लगाए हैं, जब अंतरिम सरकार ने दो दिन पहले कहा था कि उसने नयी दिल्ली को राजनयिक पत्र भेजकर हसीना को भारत से बांग्लादेश प्र्त्यियपत करने की मांग की है.
हसीना (77) पांच अगस्त से भारत में हैं. वह बांग्लादेश में आरक्षण विरोधी आंदोलन के चलते अवामी लीग की 16 साल पुरानी सरकार के पतन के बाद ढाका छोड़कर भारत पहुंची थीं. बांग्लादेश के अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण (आईसीटी) ने ”मानवता और नरसंहार के खिलाफ अपराधों” के लिए हसीना और कई पूर्व कैबिनेट मंत्रियों, सलाहकारों तथा सैन्य एवं असैन्य अधिकारियों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किए हैं.
वाजिद ने मंगलवार को एक पोस्ट में कहा, ”यूनुस नीत अनिर्वाचित सरकार की ओर से नियुक्त न्यायाधीशों और अभियोजकों ने अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण के माध्यम से हास्यास्पद सुनवाई प्रक्रिया का संचालन किया, जो इसे एक राजनीतिक प्रतिशोध की कार्रवाई बनाता है, जिसमें इंसाफ को छोड़ दिया गया और अवामी लीग नेतृत्व को सताने के लिए एक और हमला किया गया.” सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) क्षेत्र से जुड़े वाजिद अमेरिका में रहते हैं. वह हसीना सरकार में अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण के सलाहकार पद पर तैनात थे.
उन्होंने कहा, ”कंगारू न्यायाधिकरण की स्थापना और उसके बाद प्रत्यर्पण का अनुरोध ऐसे समय में किया गया है, जब सैकड़ों नेताओं और कार्यकर्ताओं की न्यायेतर हत्या की जा रही है, उन पर हत्या के संगीन आरोप लगाए जा रहे हैं, कानून प्रवर्तन एजेंसियों द्वारा हजारों लोगों को अवैध रूप से कैद किया जा रहा है और शासन की अनदेखी के कारण हर रोज लूटपाट, तोड़फोड़ व आगजनी सहित हिंसक घटनाएं हो रही हैं.” भारत ने सोमवार को नयी दिल्ली में बांग्लादेश के उच्चायुक्त से एक राजनयिक पत्र प्राप्त होने की पुष्टि की थी, लेकिन इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी थी.
भारत-बांग्लादेश प्रत्यर्पण संधि के प्रावधानों के अनुसार अगर अपराध ‘राजनीतिक स्वरूप’ का है, तो प्रत्यर्पण से इनकार किया जा सकता है. बांग्लादेश के अघोषित विदेश मंत्री तौहीद हुसैन ने कहा कि ढाका चाहता है कि हसीना वापस आएं और न्यायिक प्रक्रिया का सामना करें.
वाजिद ने आरोप लगाया कि युद्ध अपराधियों का बचाव करने के प्रमाणित रिकॉर्ड के बावजूद यूनुस शासन द्वारा 22 दिसंबर को आईसीटी के मुख्य अभियोजक नियुक्त ताजुल इस्लाम ने हसीना के खिलाफ ह्लजानबूझकर दुष्प्रचार अभियान चलायाह्व और दावा किया कि इंटरपोल ने उनके खिलाफ रेड नोटिस जारी किया है. वाजिद ने इसे ह्लयूनुस के हितों की पूर्ति के लिए हसीना को प्र्त्यियपत करने और उनके खिलाफ हास्यास्पद मुकदमा चलाने की हताशापूर्ण कोशिशह्व करार दिया.
उन्होंने कहा, ह्ललेकिन मीडिया में झूठ उजागर होने के बाद अभियोजक ने बाद में अपना बयान बदल दिया और अब आधिकारिक तौर पर प्रत्यर्पण के लिए भारत को अनुरोध भेजा है.ह्व वाजिद ने आरोप लगाया, ह्लहम अपनी मांग दोहराते हैं कि जुलाई और अगस्त के बीच मानवाधिकार उल्लंघन की हर एक घटना की स्वतंत्र और निष्पक्ष तरीके से जांच की जानी चाहिए, लेकिन यूनुस के नेतृत्व वाले शासन ने न्यायपालिका को (राजनीतिक प्रतिशोध का) हथियार बना दिया है, जिसके चलते हमारा न्याय प्रणाली में कोई विश्वास नहीं रह गया है.ह्व वाजिद ने ‘एक्स’ पर एक अन्य पोस्ट में बांग्लादेश सरकार की तरफ से उन पर और उनके परिवार पर लगाए गए भ्रष्टाचार के आरोपों को ‘फर्जी’ करार दिया.
उन्होंने कहा, ह्लहम कभी भी किसी सरकारी परियोजना में शामिल नहीं रहे या उससे पैसा नहीं कमाया. 10 अरब अमेरिकी डॉलर की परियोजना से बेइमानी से अरबों डॉलर निकालना संभव नहीं है.ह्व वाजिद का इशारा बांग्लादेश के भ्रष्टाचार निरोधक आयोग (एसीसी) द्वारा रूपपुर परमाणु ऊर्जा संयंत्र (एनपीपी) में पांच अरब अमेरिकी डॉलर के गबन के आरोपों के संबंध में हसीना और उनके परिवार के खिलाफ शुरू की गई जांच की तरफ था. रूस का सरकारी निगम रोसाटोम ढाका से 160 किलोमीटर पश्चिम में बांग्लादेश के पहले परमाणु ऊर्जा संयंत्र बना रहा है. इस संयंत्र के निर्माण में कई भारतीय कंपनियां भी शामिल हैं. रोसाटॉम ने रूपपुर एनपीपी परियोजना के संबंध में मीडिया में दिए गए ‘आपत्तिजनक बयानों’ का पहले ही खंडन किया है.