140 करोड़ भारतीय भाजपा के ‘अन्याय काल’ में जी रहे हैं: कांग्रेस

नयी दिल्ली. कांग्रेस ने रविवार को आरोप लगाया कि 140 करोड़ भारतीय लोग भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) द्वारा थोपे गये ‘अन्याय काल’ में जी रहे हैं. कांग्रेस ने कहा कि वह सुनिश्चित करेगी कि देश के लोगों को उसकी ओर से प्रस्तावित ‘न्याय’ के पांच स्तंभों के आधार पर न्याय मिले.

कांग्रेस प्रवक्ता और अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) के मीडिया एवं प्रचार विभाग के अध्यक्ष पवन खेड़ा ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि भाजपा सरकार ने किसी कार्यक्रम की चकाचौंध के पीछे वास्तविकता को छिपाने की कला में महारत हासिल कर ली है और उनके अधीन देश और इसकी अर्थव्यवस्था के साथ यही हो रहा है. उन्होंने कहा कि अर्थव्यवस्था के बारे में सच्चाई यह है कि उत्तर प्रदेश और हरियाणा के युवा इजराइल में लड़ने के लिए नौकरी पाने की चाहत में कतार में खड़े हैं, यह दिल को दहला देने वाला है.

खेड़ा ने संवाददाताओं से कहा,”कोई भी व्यक्ति युद्धरत देश में जाकर मजदूर क्यों बनना चाहेगा? इसका उत्तर यह है कि उनकी औसत मासिक आय सिर्फ 10,000 रुपये (न्यूनतम मजदूरी से बहुत कम) है, जबकि इजराइल इससे लगभग 13-14 गुना अधिक वेतन दे रहा है.”

खेड़ा ने कहा कि यह देखना दुर्भाग्यपूर्ण है कि उत्तर प्रदेश में पुलिस कांस्टेबल की केवल 60,000 रिक्तियों के लिए 51 लाख आवेदक थे. उन्होंने कहा, ”140 करोड़ भारतीय भाजपा के कुशासन द्वारा थोपे गए ‘अन्याय काल’ में जी रहे हैं.” कांग्रेस नेता ने कहा कि नरेन्द्र मोदी सरकार अगले कुछ दिनों में अपना अंतिम बजट पेश करेगी और पूरी सरकारी मशीनरी का इस्तेमाल ‘विकसित भारत’ के खोखले नारे का प्रचार करने के लिए किया जा रहा है.

अपने दावे के समर्थन में आंकड़ों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था की वास्तविकता अनुमान से बहुत अलग है. कांग्रेस नेता ने कहा कि आधे भारतीय लोगों (71 करोड़) की आय प्रति वर्ष 3,87,000 रुपये या इससे कम है, या लगभग 32,000 रुपये प्रति माह या इससे कम है.

खेड़ा ने कहा, ”सरकार को इस आंकड़े पर शर्म आना चाहिए कि 80 करोड़ लोगों को मुफ्त राशन पर निर्भर रहना पड़ता है. यह शर्मनाक है और इस सरकार का एक रिपोर्ट कार्ड है.” उन्होंने कहा, ”आने वाले दिनों में कांग्रेस पार्टी न्याय का एक सकारात्मक एजेंडा पेश करेगी, जिसके बारे में हमारे नेता राहुल गांधी ने ‘भारत जोड़ो न्याय यात्रा’ में बात की है. न्याय के पांच स्तंभ: युवा न्याय, भागीदारी न्याय, नारी न्याय, किसान न्याय और श्रम न्याय हैं.”

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