हिंदू देवताओं का अपमान ‘इंडिया’ गठबंधन के राजनीतिक एजेंडे की पहचान: भाजपा

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Tue, 05 Mar 2024 10:41 PM
हिंदू देवताओं का अपमान ‘इंडिया’ गठबंधन के राजनीतिक एजेंडे की पहचान: भाजपा
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नयी दिल्ली. भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) नेता ए राजा की हिंदुत्व और भगवान राम के खिलाफ कथित टिप्पणी को लेकर विपक्षी ‘इंडिया’ गठबंधन पर मंगलवार को निशाना साधा और कहा कि सार्वजनिक रूप से भारत के लोकाचार का अपमान करना और हिंदू देवी-देवताओं को अपमानित करना उसके राजनीतिक एजेंडे की पहचान बन गई है.

भाजपा मुख्यालय में संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि द्रमुक सांसद राजा ने तमिल में अपने हालिया भाषण में कहा है, ”भारत एक राष्ट्र नहीं है. इसे अच्छी तरह समझो. भारत कभी भी एक राष्ट्र नहीं है. एक राष्ट्र का अर्थ है एक भाषा, एक परंपरा, एक संस्कृति. तभी, यह एक राष्ट्र है. भारत एक राष्ट्र नहीं बल्कि एक उपमहाद्वीप है.” प्रसाद ने द्रमुक नेता की कथित टिप्पणी पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए आरोप लगाया, ”यह माओवादी विचारधारा है.”

प्रसाद के मुताबिक राजा ने यह भी कहा, ”अगर यह आपका जय श्री राम है, अगर यह आपकी भारत माता की जय है, तो हम जय श्री राम और भारत माता को कभी स्वीकार नहीं करेंगे. तमिल स्वीकार नहीं करते. आप जाइए और कहिए कि हम राम के शत्रु हैं.” भाजपा नेता ने मांग की कि कांग्रेस और ‘इंडिया’ के अन्य घटक दल आगे आएं और कहें कि क्या वे द्रमुक नेता की टिप्पणी से सहमत हैं.
प्रसाद ने आरोप लगाया, ”हम इस तरह की टिप्पणी की कड़ी निंदा करते हैं.” उन्होंने पूछा, ”सोनिया गांधी, राहुल गांधी, प्रियंका (गांधी वाद्रा), मल्लिकार्जुन खरगे… क्या आप इसे (राजा की टिप्पणी को) सही मानते हैं?” भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि भारत की पहचान को बदनाम करना और भारतीय आस्था का अपमान करना ‘इंडिया’ गठबंधन की आदत और राजनीतिक एजेंडा बन गया है.

उन्होंने कहा कि यह स्पष्ट है कि सार्वजनिक रूप से भारत के लोकाचार का अपमान करना, हिंदू देवताओं को अपमानित करना और भारत के मूल विचार पर सवाल उठाना विपक्षी गठबंधन के राजनीतिक एजेंडे की पहचान बन गया है. उन्होंने कहा कि यही कारण है कि उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को तमिलनाडु के मंत्री उदयनिधि स्टालिन की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा था कि वह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के साथ अनुचित स्वतंत्रता लेते हैं और फिर राहत के लिए अदालत में आते हैं.

प्रसाद ने कहा, ”कृपया इस तरह हिंदू भावनाओं का अपमान न करें, हिंदू आस्था को इस तरह र्शिमंदा न करें.” उन्होंने कहा, ”हम सभी धर्मों का सम्मान करते हैं. यह ऋग्वेद का भारतीय ‘संस्कार’ है जो कहता है कि सत्य एक है, रास्ते अलग हो सकते हैं.” उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को तमिलनाडु के मंत्री उदयनिधि स्टालिन को उनकी ‘सनातम धर्म को मिटाने’ संबंधी टिप्पणी को लेकर अप्रसन्नता जताई और पूछा कि वह भाषण एवं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अपने अधिकार का दुरुपयोग करने के बाद अपनी याचिका लेकर शीर्ष अदालत के पास क्यों आए हैं. न्यायमूर्ति संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता की पीठ ने स्टालिन से कहा कि वह एक मंत्री हैं और उन्हें अपनी टिप्पणी के परिणाम पता होने चाहिए थे.

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