लोकसभा चुनाव में लोगों ने संविधान, देश की लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं में अपना अटूट विश्वास दोहराया: मोदी

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Sun, 30 Jun 2024 06:51 PM
लोकसभा चुनाव में लोगों ने संविधान, देश की लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं में अपना अटूट विश्वास दोहराया: मोदी
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नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने तीसरी बार देश की कमान संभालने के बाद अपने पहले ‘मन की बात’ रेडियो कार्यक्रम में रविवार को कहा कि लोगों ने दुनिया के सबसे बड़े चुनाव में देश के संविधान और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में अपना अटूट विश्वास व्यक्त किया है. उन्होंने लोगों को धन्यवाद दिया और निर्वाचन आयोग तथा इस प्रक्रिया से जुड़े हर व्यक्ति को बधाई दी और ‘आकाशवाणी’ के इस मासिक रेडियो कार्यक्रम के 30 मिनट के अपने संबोधन में पेरिस ओलंपिक, ‘वोकल फोर लोकल’ और भारतीय संस्कृति के दुनिया भर में बढ़ते प्रभाव सहित कई मुद्दों पर चर्चा की.

प्रधानमंत्री ने जुलाई महीने शुरू होने वाले पेरिस ओलंपिक में भाग लेने वाले भारतीय खिलाड़ियों को शुभकामनाएं दीं और लोगों से उनका उत्साहवर्धन करने के लिए सोशल मीडिया पर ‘चीयर4भारत’ हैशटैग का उपयोग करने का आग्रह किया. उन्होंने कहा कि तोक्यो में पिछले ओलंपिक में भारतीय खिलाड़ियों के प्रदर्शन ने हर नागरिक का दिल जीत लिया था, और भाग लेने वाले खिलाड़ी पूरे जी-जान से पेरिस ओलंपिक की तैयारियों में लगे हुए हैं.

उन्होंने 2024 के लोकसभा चुनाव को दुनिया का सबसे बड़ा चुनाव करार देते हुए को कहा कि इसमें 65 करोड़ लोगों ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल कर संविधान और देश की लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं में अपना अटूट विश्वास दोहराया है. ‘मन की बात’ की 111वीं कड़ी में देशवासियों के साथ अपने विचार साझा करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ”मैं आज देशवासियों को इस बात के लिए धन्यवाद भी देता हूं कि उन्होंने हमारे संविधान और देश की लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं में अपना अटूट विश्वास दोहराया है. साल 2024 का चुनाव दुनिया का सबसे बड़ा चुनाव था. दुनिया के किसी भी देश में इतना बड़ा चुनाव कभी नहीं हुआ, जिसमें 65 करोड़ लोगों ने मत डाले हैं.” प्रधानमंत्री ने लोकसभा चुनाव सफलतापूर्वक संपन्न कराने के लिए निर्वाचन आयोग और मतदान की प्रक्रिया से जुड़े हर व्यक्ति को बधाई दी.

मोदी ने जुलाई महीने के अंतिम सप्ताह में आरंभ हो रहे पेरिस ओलंपिक में भारतीय खिलाड़ी के उत्कृष्ट प्रदर्शन की उम्मीद जताते हुए भारतीय दल को शुभकामनाएं दीं और देशवासियों से खिलाड़ियों का उत्साह बढ़ाने का आग्रह किया. उन्होंने कहा कि पेरिस ओलंपिक की तैयारियों में भारतीय खिलाड़ी ‘जी-जान’ से जुटे हुए हैं और आने वाले दिनों में उन्हें भी भारतीय दल से मुलाकात और उनके उत्साहवर्धन का अवसर मिलने वाला है. दुनिया का सबसे बड़ा खेल महाकुंभ यानी ओलंपिक खेलों का इस बार पेरिस में 26 जुलाई से 11 अगस्त तक आयोजन होने जा रहा है. भारतीय खिलाड़ी इन खेलों की तैयारियों को अंतिम रूप देने में लगे हैं.

मोदी ने कहा, ”अगले महीने इस समय तक पेरिस ओलंपिक शुरू हो चुके होंगे. मुझे विश्वास है कि आप सब भी ओलंपिक खेलों में भारतीय खिलाड़ियों का उत्साह बढ़ाने का इंतजार कर रहे होंगे. मैं भारतीय दल को ओलंपिक खेलों की बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं.” तोक्यो ओलंपिक की यादें ताजा करते हुए उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों के प्रदर्शन ने हर भारतीय का दिल जीत लिया था.
उन्होंने कहा, ”इसके बाद से ही हमारे खिलाड़ी पेरिस ओलंपिक की तैयारियों में जी-जान से जुटे हुए हैं.”

उन्होंने कहा, ”अब पूरा देश ये उम्मीद कर रहा है कि हमारे खिलाड़ी ओलंपिक में भी बेहतरीन प्रदर्शन करेंगे. इन खेलों में पदक भी जीतेंगे और देशवासियों का दिल भी जीतेंगे.” भारत ने चार साल पहले तोक्यो ओलंपिक में अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करके एक स्वर्ण सहित सात पदक जीते थे. उन्होंने विश्व पर्यावरण दिवस पर इस साल आरंभ किए गए ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान का उल्लेख किया और कहा कि इसके तहत पेड़ लगाने का अभियान तेजी से चल रहा है.

उन्होंने कहा, ”हर कोई अपनी मां के लिए पेड़ लगा रहा है. चाहे वह अमीर हो या गरीब, चाहे वह कामकाजी महिलाएं हों या घरेलू. इस अभियान ने मां के प्रति स्नेह जताने का समान अवसर दिया है.” उन्होंने कहा, ”मां के नाम पेड़ लगाने के अभियान से अपनी मां का सम्मान तो होगा ही, साथ ही धरती मां की भी रक्षा होगी.” मोदी ने तुर्कमेनिस्तान में योग दिवस, राष्ट्रीय कवि गुरुदेव रवींद्र नाथ टैगोर की जयंती मनाए जाने और कैरेबियाई देशों में भारतीय विरासत का जश्न मनाए जाने का जिक्र करते हुए कहा कि आज दुनिया भर में भारतीय संस्कृति का गौरव गान हो रहा है, जिसकी हर देशवासी खुशी मना रहे हैं.

इसके साथ ही उन्होंने कुवैत सरकार की ओर से राष्ट्रीय रेडियो पर भारतीय संस्कृति के विभिन्न रंगों को शामिल करते हुए शुरू किए गए हिन्दी के एक विशेष कार्यक्रम का भी जिक्र किया और इस ‘शानदार पहल’ की सराहना की. प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन के दौरान पूरी दुनिया ने भरपूर उत्साह और उमंग के साथ मनाए गए 10वें योग दिवस का उल्लेख किया और कहा कि जम्मू एवं कश्मीर के श्रीनगर में आयोजित योग कार्यक्रम में भी कश्मीर में युवाओं के साथ-साथ बहनों-बेटियों ने भी योग दिवस में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया.

उन्होंने इस क्रम में म्यांमार, श्रीलंका, भूटान और अमेरिका सहित दुनिया भर के विभिन्न स्थानों पर योग दिवस के अवसर पर मनाए गए कार्यक्रमों का उल्लेख करते हुए कहा, ”हमें योग को केवल एक दिन का अभ्यास नहीं बनाना है. आप नियमित रूप से योग करें. इससे आप अपने जीवन में सकारात्मक बदलावों को जरूर महसूस करेंगे.” प्रधानमंत्री ने कार्यक्रम के दौरान एक रेडियो कार्यक्रम की ऑडियो क्लिप भी लोगों को सुनाई और बताया कि ये कुवैत रेडियो के एक प्रसारण से संबंधित है.

उन्होंने कहा, ”इसमें भारतीय संस्कृति के अलग-अलग रंग शामिल होते हैं. हमारी फिल्में और कला जगत से जुड़ी चर्चाएं वहां भारतीय समुदाय के बीच बहुत लोकप्रिय हैं. मुझे तो यहां तक बताया गया है कि कुवैत के स्थानीय लोग भी इसमें खूब दिलचस्पी ले रहे हैं. मैं कुवैत की सरकार और वहां के लोगों का हृदय से धन्यवाद करता हूं, जिन्होंने ये शानदार पहल की है.” ‘वोकल फोर लोकल’ कार्यक्रम का जिक्र करते हुए मोदी ने कहा कि इसके तहत बनाए जा रहे कई उत्पादों की दुनिया-भर में बहुत मांग है.

उन्होंने कहा, ”जब हम भारत के किसी स्थानीय उत्पाद को वैश्विक होते देखते हैं तो गर्व से भर जाना स्वाभाविक है.” इस क्रम में उन्होंने आंध्र प्रदेश के अराकू काफी, जम्मू एवं कश्मीर के पुलवामा के बर्फीले मटर और अन्य सब्जियों का जिक्र किया. उन्होंने कहा, ”जम्मू एवं कश्मीर के लोगों की समृद्धि के लिए नए द्वार खोले हैं. हमारे देश में ऐसे विशेष उत्पादों की कमी नहीं है.” प्रधानमंत्री ने 30 जून को मनाये जाने वाले ‘हूल दिवस’ पर देशवासियों को बधाई दी और कहा देश के आदिवासी भाई-बहन इसे धूमधाम से मनाते हैं.

उन्होंने महान स्वतंत्रता सेनानियों सिदो-कान्हू को याद करते हुए कहा कि इनका बलिदान आज भी देशवासियों को प्रेरित करता है.
उन्होंने इन दोनों स्वतंत्रता सेनानियों को सर्मिपत संथाली भाषा में एक गीत के कुछ अंश की रिकॉर्डिंग भी लोगों को सुनायी. मोदी के लगातार तीसरी बार प्रधानमंत्री पद संभालने के बाद ‘मन की बात’ की यह पहली कड़ी है. ‘मन की बात’ कार्यक्रम की पिछली कड़ी का प्रसारण 25 फरवरी को हुआ था. लोकसभा चुनाव की घोषणा के बाद लागू आदर्श आचार संहिता के मद्देनजर इस कार्यक्रम का प्रसारण स्थगित कर दिया गया था. प्रधानमंत्री ने इसके 110वें संस्करण में कहा था कि अगली बार जब वह इस कार्यक्रम के जरिए लोगों से रुबरु होंगे तो नयी ऊर्जा और नयी जानकारी के साथ मिलेंगे.

दुनियाभर में भारतीय संस्कृति का गौरव गान हो रहा है: मोदी

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को तुर्कमेनिस्तान में योग दिवस, गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की जयंती मनाये जाने और कैरेबियाई देशों में भारतीय विरासत का जश्न मनाये जाने का जिक्र करते हुए कहा कि आज दुनियाभर में भारतीय संस्कृति का गौरव गान हो रहा है, जिसकी हर देशवासी खुशी मना रहे हैं. ‘आकाशवाणी’ के मासिक रेडियो कार्यक्रम की 111वीं कड़ी को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने यह बात कही. इसके साथ ही उन्होंने कुवैत सरकार की ओर से राष्ट्रीय रेडियो पर भारतीय संस्कृति के विभिन्न रंगों को शामिल करते हुए शुरु किए गए हिन्दी के एक विशेष कार्यक्रम का भी जिक्र किया और इस ‘शानदार पहल’ की सराहना की. उन्होंने कहा कि ‘कुवैत रेडियो’ पर हर रविवार को इसका प्रसारण आधे घंटे के लिए किया जाता है.

उन्होंने कहा, ”इसमें भारतीय संस्कृति के अलग-अलग रंग शामिल होते हैं. हमारी फिल्में और कला जगत से जुड़ी चर्चाएं वहां भारतीय समुदाय के बीच बहुत लोकप्रिय हैं. मुझे तो यहां तक बताया गया है कि कुवैत के स्थानीय लोग भी इसमें खूब दिलचस्पी ले रहे हैं.” उन्होंने कहा, ”मैं कुवैत की सरकार और वहां के लोगों का हृदय से धन्यवाद करता हूं, जिन्होंने ये शानदार पहल की है.” प्रधानमंत्री ने बताया कि तुर्कमेनिस्तान में इस साल मई में वहां के राष्ट्रीय कवि की 300वीं जयंती मनाई गई और इस दौरान वहां के राष्ट्रपति ने दुनिया के 24 प्रसिद्ध कवियों की प्रतिमाओं का अनावरण किया और इनमें से एक प्रतिमा गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की भी थी.
उन्होंने कहा, ”ये गुरुदेव का सम्मान है, भारत का सम्मान है.”

उन्होंने कहा कि इसी तरह जून के महीने में दो कैरेबियाई देश सूरीनाम और सेंट वेनिस और ग्रेनेडाइंस ने अपनी भारतीय विरासत को पूरे जोश और उत्साह के साथ मनाया.” उन्होंने बताया कि सूरीनाम में हिन्दुस्तानी समुदाय हर साल पांच जून को भारतीयों के आगमन दिवस और प्रवासी दिन के रूप में मनाया जाता है.

उन्होंने कहा, ”यहां तो हिन्दी के साथ ही भोजपुरी भी खूब बोली जाती है. सेंट वेनिस और ग्रेनेडाइंस में रहने वाले हमारे भारतीय मूल के भाई-बहनों की संख्या भी लगभग छह हजार है. उन सभी को अपनी विरासत पर बहुत गर्व है. एक जून को इन सभी ने भारतीय आगमन दिवस को जिस धूमधाम से मनाया, उससे उनकी ये भावना साफ झलकती है. दुनियाभर में भारतीय विरासत और संस्कृति का जब ऐसा विस्तार दिखता है तो हर भारतीय को गर्व होता है.” प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन के दौरान पूरी दुनिया ने भरपूर उत्साह और उमंग के साथ मनाए गए 10वें योग दिवस का उल्लेख किया और कहा कि जम्मू एवं कश्मीर के श्रीनगर में आयोजित योग कार्यक्रम में भी कश्मीर में युवाओं के साथ-साथ बहनों-बेटियों ने भी योग दिवस में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया.

उन्होंने कहा, ”जैसे-जैसे योग दिवस का आयोजन आगे बढ़ रहा है, नए-नए रिकॉर्ड बन रहे हैं. दुनियाभर में योग दिवस ने कई शानदार उपलब्धियां हासिल की हैं. सऊदी अरब में पहली बार एक महिला अल हनौफ साद ने योग दिवस कार्यक्रम की अगुआई की. ऐसा पहली बार है जब किसी सऊदी महिला ने ऐसा किया.” उन्होंने कहा कि इसी प्रकार मिस्र में इस बार योग दिवस पर एक फोटो प्रतियोगिता का आयोजन किया गया और नील नदी के किनारे रेड सी के किनारों पर और पिरामिडों के सामने – योग करते, लाखों लोगों की तस्वीरें बहुत लोकप्रिय हुईं.

उन्होंने इस क्रम में म्यांमा, श्रीलंका, भूटान और अमेरिका सहित दुनियाभर के विभिन्न स्थानों पर योग दिवस के अवसर पर मनाए गए कार्यक्रमों का उल्लेख करते हुए कहा, ”हमें योग को केवल एक दिन का अभ्यास नहीं बनाना है. आप नियमित रूप से योग करें. इससे आप अपने जीवन में सकारात्मक बदलावों को जरूर महसूस करेंगे.” प्रधानमंत्री ने कार्यक्रम के दौरान एक रेडियो कार्यक्रम की ऑडियो क्लिप भी लोगों को सुनाई और बताया कि ये कुवैत रेडियो के एक प्रसारण से संबंधित है.

उन्होंने कहा, ”अब आप सोचेंगे कि बात हो रही है कुवैत की तो वहां हिन्दी कहां से आ गई ? दरअसल, कुवैत सरकार ने अपने राष्ट्रीय रेडियो पर एक विशेष कार्यक्रम शुरू किया है. और वह भी हिन्दी में. ‘कुवैत रेडियो’ पर हर रविवार को इसका प्रसारण आधे घंटे के लिए किया जाता है.” उन्होंने कहा, ”इसमें भारतीय संस्कृति के अलग-अलग रंग शामिल होते हैं. हमारी फिल्में और कला जगत से जुड़ी चर्चाएं वहां भारतीय समुदाय के बीच बहुत लोकप्रिय हैं. मुझे तो यहां तक बताया गया है कि कुवैत के स्थानीय लोग भी इसमें खूब दिलचस्पी ले रहे हैं. मैं कुवैत की सरकार और वहां के लोगों का हृदय से धन्यवाद करता हूं, जिन्होंने ये शानदार पहल की है.”

समय की मांग है कि देशवासी संस्कृत को सम्मान दें, उसे अपने दैनिक जीवन से भी जोड़ें: प्रधानमंत्री मोदी

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने प्राचीन भारतीय ज्ञान और विज्ञान की प्रगति में संस्कृत की बड़ी भूमिका को रेखांकित करते हुए रविवार को कहा कि आज समय की मांग है कि देशवासी संस्कृत को सम्मान भी दें और उसे अपने दैनिक जीवन से भी जोड़ें. प्रधानमंत्री मोदी ने ‘आकाशवाणी’ के मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ की 111वीं कड़ी में अपने विचार साझा करते हुए यह बात कही और बताया कि पचास साल पहले आज (30 जून) के ही दिन आकाशवाणी के संस्कृत बुलेटिन के प्रसारण की शुरुआत हुई थी.

उन्होंने संस्कृत में संवाद करते हुए कहा, ह्लमम प्रिया: देशवासिन: अद्य अहं किञ्चित् चर्चा संस्कृत भाषायां आरभे. आप सोच रहे होंगे कि ‘मन की बात’ में अचानक संस्कृत में क्यों बोल रहा हूं? इसकी वजह है, आज संस्कृत से जुड़ा एक खास अवसर! आज 30 जून को आकाशवाणी का संस्कृत बुलेटिन अपने प्रसारण के 50 साल पूरे कर रहा है.” उन्होंने कहा कि अपने 50 साल के सफर के दौरान इस बुलेटिन ने कितने ही लोगों को संस्कृत से जोड़े रखा है. उन्होंने इसके लिए आकाशवाणी परिवार को बधाई भी दी.

उन्होंने कहा, ”प्राचीन भारतीय ज्ञान और विज्ञान की प्रगति में संस्कृत की बड़ी भूमिका रही है. आज के समय की मांग है कि हम संस्कृत को सम्मान भी दें, और उसे अपने दैनिक जीवन से भी जोड़ें.” प्रधानमंत्री ने इस क्रम में बेंगलुरू में कुछ लोगों की ओर से किए जा रहे प्रयासों का उल्लेख किया. उन्होंने बताया कि बेंगलुरू कब्बन पार्क में लोगों ने एक नई परंपरा शुरू की है और इसके तहत वे यहां हफ्ते में एक दिन यानी हर रविवार को बच्चे, युवा और बुजुर्ग आपस में संस्कृत में बात करते हैं.

उन्होंने कहा, ”इतना ही नहीं, यहां वाद- विवाद के कई सत्र भी संस्कृत में ही आयोजित किए जाते हैं. इनकी इस पहल का नाम है – ‘संस्कृत वीकेंड’. इसकी शुरुआत एक वेबसाइट के जरिए समष्टि गुब्बी जी ने की है.” उन्होंने बताया कि कुछ दिनों पहले ही शुरू हुआ ये प्रयास बेंगलुरूवासियों के बीच देखते ही देखते काफी लोकप्रिय हो गया है. उन्होंने कहा, ”अगर हम सब इस तरह के प्रयास से जुड़ें, तो हमें विश्व की इतनी प्राचीन और वैज्ञानिक भाषा से बहुत कुछ सीखने को मिलेगा.”

चुनाव के दौरान ‘मन की बात’ के जरिए संवाद न कर पाने की बहुत कमी महसूस हुई: प्रधानमंत्री मोदी

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को कहा कि लोकसभा चुनाव की घोषणा के कारण तकरीबन चार महीने तक वह ‘मन की बात’ कार्यक्रम के जरिए लोगों से संवाद नहीं कर सके और इस दौरान महीने के हर आखिरी रविवार को उन्हें इसकी ”बहुत कमी” महसूस हुई. तीसरी बार प्रधानमंत्री बनने के बाद ‘आकाशवाणी’ के मासिक रेडियो कार्यक्रम की 111वीं कड़ी में देशवासियों के साथ अपने विचार साझा करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने यह बात कही.

करीब 30 मिनट के अपने संबोधन में मोदी ने लोकसभा चुनाव, पेरिस ओलंपिक, ‘वोकल फॉर लोकल’, पर्यावरण, संस्कृत और भारतीय संस्कृति के दुनिया भर में बढ.ते प्रभाव सहित कई मुद्दों पर चर्चा की. ‘मन की बात’ कार्यक्रम की पिछली कड़ी का प्रसारण 25 फरवरी को हुआ था. लोकसभा चुनाव की घोषणा के बाद लागू आदर्श आचार संहिता के मद्देनजर इस कार्यक्रम का प्रसारण स्थगित कर दिया गया था. मोदी ने कहा, ”फरवरी से लेकर अब तक… जब भी महीने का आखिरी रविवार आने को होता था तब मुझे आपसे इस संवाद की बहुत कमी महसूस होती थी.” उन्होंने कहा कि लेकिन उन्हें यह देखकर बहुत अच्छा भी लगा कि इन महीनों में लोगों ने उन्हें लाखों संदेश भेजे.

प्रधानमंत्री ने कहा, ”मन की बात कार्यक्रम भले ही कुछ महीने बंद रहा हो लेकिन, ‘मन की बात’ की जो भावना है वह देश में, समाज में, हर दिन अच्छे काम, नि:स्वार्थ भावना से किए गए काम, समाज पर सकारात्मक असर डालने वाले काम निरंतर चलते रहे.” मोदी के लगातार तीसरी बार प्रधानमंत्री पद संभालने के बाद ‘मन की बात’ की यह पहली कड़ी थी. प्रधानमंत्री ने इसके 110वें संस्करण में कहा था कि अगली बार जब वह इस कार्यक्रम के जरिए लोगों से रूबरू होंगे तो नयी ऊर्जा और नयी जानकारी के साथ मिलेंगे.

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