विपक्ष ने कहा कि बजट में आम आदमी की अनदेखी की गई, भाजपा बोली-बजट में किसी की उपेक्षा नहीं

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Tue, 30 Jul 2024 07:38 PM
विपक्ष ने कहा कि बजट में आम आदमी की अनदेखी की गई, भाजपा बोली-बजट में किसी की उपेक्षा नहीं
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नयी दिल्ली. सरकार पर आम आदमी की समस्याओं की अनदेखी करने का आरोप लगाते हुए शिवसेना (यूबीटी) और भाकपा (एम) ने मंगलवार को राज्यसभा में कहा कि ग्रामीण भारत की जीवनरेखा ”मनरेगा”, बाल कल्याण, आंगनवाड़ी से लेकर स्वास्थ्य के क्षेत्र में आवंटन घटा दिया गया है. वहीं भाजपा ने दावा किया कि ऐसा कोई भी क्षेत्र नहीं है जिसकी बजट में उपेक्षा की गई हो.

उच्च सदन में आम बजट 2024-25 एवं केंद्र शासित प्रदेश जम्मू कश्मीर के बजट पर संयुक्त चर्चा में भाग लेते हुए शिवसेना (यूबीटी) की प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा ”अगर वित्त मंत्री इस तरह का बजट बनाती रहेंगी तो वह दिन दूर नहीं जब वह विपक्ष में रहेंगी और आज का विपक्ष सत्ता में होगा.

चतुर्वेदी ने कहा ”वित्त मंत्री ने ‘प्रधानमंत्री सरकार बचाओ योजना’ के तहत यह बजट पेश किया है जो पूरी तरह महाराष्ट्र विरोधी है.” उन्होंने कहा ” बजट को जब हमने महाराष्ट्र विरोधी बताया तो कहा गया कि वाधवान बंदरगाह के लिए 76000 करोड़ रुपये दिए गए हैं. लेकिन जहाजरानी बंदरगाह जलमार्ग मंत्रालय की अनुपूरक मांगों में कहीं भी यह जिक्र नहीं है कि वाधवान बंदरगाह के लिए 76000 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं.” चतुर्वेदी ने कहा कि देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में बीएमसी का दो साल से चुनाव नहीं हुआ है. उन्होंने कहा कि 2023 में प्रधानमंत्री ने मुंबई में छह हजार 80 करोड़ रुपये की परियोजनाओं का उद्घाटन किया था लेकिन आज तक एक भी परियोजना कार्यान्वित नहीं हुई. उन्होंने कहा कि इसके अगले साल फिर से छह हजार करोड़ रुपये के ठेके उन ठेकेदारों को दे दिए गए जो काली सूची में हैं.

उन्होंने कहा कि मुंबई-गोवा राजमार्ग, मुंबई-नासिक राजमार्ग और मुंबई-अहमदाबाद राजमार्गों की हालत खस्ता हो चुकी है और दुर्घटनाओं की आशंका हमेशा रहती है. चतुर्वेदी ने कहा कि धारावी पुर्निवकास योजना के तहत भ्रष्टाचार होने की बात बार बार उजागर की गई है लेकिन सरकार उस ओर ध्यान नहीं दे रही है. उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में आने वाली चार लाख करोड़ रुपये की औद्योगिक इकाइयों को गुजरात भेज दिया गया, यह पीड़ादायक है.

उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र के बजट में इंटर्नशिप प्रोग्राम की बात कही गई है लेकिन इस मामले में भी राज्य के साथ न्याय नहीं किया गया है. उन्होंने कहा कि सरकार के बजट में आम आदमी और उसकी समस्याएं कहीं नजर नहीं आतीं. भारतीय जनता पार्टी के दोरजी त्सेरिंग लेप्चा ने कहा कि पढ़े-लिखे लोगों को आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए ताकि वे अपनी आजीविका चला सकें. उन्होंने कहा कि पढ़ाई का प्रमाणपत्र जरूरी है लेकिन हुनर की क्षमता लोगों को आजीविका चलाने में हर जगह मदद करेगी.

उन्होंने कहा कि पढ़ाई बेरोजगारी बढ़ाने के लिए नहीं है और वर्तमान परिस्थितियों में इस बात पर विचार करना चाहिए. उन्होंने कहा कि बजट में कौशल प्रशिक्षण पर जोर दिया गया है, इससे बेरोजगारी कम करने में मदद मिलेगी. उन्होंने कहा कि दावा किया कि ऐसा कोई भी क्षेत्र नहीं है जिसकी बजट में उपेक्षा की गई हो. उन्होंने कहा ”बजट में सिक्किम और पूर्वोत्तर राज्यों का ध्यान रखा गया है. मोदी सरकार के आने के बाद से सिक्किम का विकास हुआ है जो महत्वपूर्ण बात है.” उन्होंने सिक्किम के हवाईअड्डे के उन्नयन तथा राष्ट्रीय राजमार्ग दस में सड़क संपर्क की मांग की.

लेप्चा ने कहा ”सिक्किम की पहचान आर्गनिक खेती से है और इसके लिए विशेष योजनाएं बनाई जानी चाहिए ताकि इसे बढ़ावा दिया जा सके.” भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के डॉ वी शिवदासान ने बजट की आलोचना करते हुए कहा कि इसमें विपक्ष शासित राज्यों को पूरी तरह उपेक्षित किया गया है. उन्होंने कहा कि सरकार अपनी पीठ थपथपाती है और वादे तो बड़े बड़े करती है लेकिन उन्हें पूरा नहीं करती.

उन्होंने कहा कि किसानों की समस्याएं आज भी वहीं हैं और वे संघर्ष कर रहे हैं लेकिन उनकी समस्याएं सरकार को नजर नहीं आतीं. फसल बीमा योजना का खूब ढोल पीटा गया लेकिन उसके बजट में कटौती कर दी गई. शिवदासान ने कहा कि ग्रामीण भारत की जीवनरेखा ”मनरेगा” को केवल 86 हजार करोड़ रुपये ही आवंटित किए गए जबकि इसके तहत आने वाले श्रमिकों की संख्या बढ़ी है. उन्होंने कहा कि बाल कल्याण के लिए एक भी रुपया आवंटित नहीं किया जाना बेहद दुखद है.

उन्होंने कहा कि आंगनवाड़ी के लिए आवंटन भी घटा दिया गया है. उन्होंने कहा कि आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं का मानदेय बढ़ा कर 15,000 रुपये किया जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र में भी बजट घटा दिया गया. उन्होंने कहा कि ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ का नारा देने वाली सरकार ने महिलाओं की सुरक्षा की पूरी तरह अनदेखी कर दी है. उन्होंने कहा ”राम ने धर्म के लिए सत्ता का त्याग किया था लेकिन कुछ लोग सत्ता के लिए राम के नाम को भुना रहे हैं.”

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