बदलाव का सबसे बड़ा केंद्र है शिक्षा: धनखड़

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Wed, 20 Nov 2024 07:46 PM
बदलाव का सबसे बड़ा केंद्र है शिक्षा: धनखड़
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जयपुर. उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने शिक्षा को बदलाव का सबसे बड़ा केंद्र बताते हुए बुधवार को कहा कि यह समाज में समानता को बढ़ावा देती है. वह झुंझुनूं जिले के काजड़ा में जवाहर नवोदय विद्यालय के छात्रों को संबोधित कर रहे थे. उन्होंने कहा, “शिक्षा बदलाव का सबसे बड़ा केंद्र है. शिक्षा समाज में समानता को बढ़ावा देती है. शिक्षा समाज में असमानता को कुंठित करती है.” उन्होंने कहा,”ज्ञानं अहम्. अर्थात, ज्ञान ही एक ऐसा है जो अहम है. शिक्षा हमें जो चरित्र देती हैं वही हमें परिभाषित करता है.”

आधिकारिक बयान के अनुसार धनखड़ ने अनुशासन, संस्कार और मानव निर्माण के महत्व पर बल दिया. उन्होंने छात्रों से कहा, “आपकी उम्र में संस्कारी बनना आवश्यक है. माता-पिता का सम्मान करना, गुरुजनों को प्रणाम करना, आपसी भाईचारे को बढ़ाना और अनुशासन दिखाना आपके जीवन के अभिन्न हिस्से होने चाहिए. मानव निर्माण के लिए श्रेष्ठ आदतों का संचार आपकी प्राथमिकता होनी चाहिए.” उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में युवाओं के लिए उभरते अवसरों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आज की सरकारी नीतियों ने आपकी प्रतिभा को चमकाने के लिए अनेक मंच प्रदान किए हैं.

उपराष्ट्रपति ने कहा, “आप सभी ग्रामीण भारत की रीढ़ की हड्डी हैं. याद रखें, भारत की आत्मा ग्रामीण अंचल में है. हमारी जड़ें ग्रामीण भारत में ही मजबूत होती हैं. हमारा अन्नदाता किसान भी ग्रामीण क्षेत्रों में ही रहता है.” उन्होंने कहा कि पंचायत राज और नगर पालिका जैसी संस्थाओं के माध्यम से भारत ने लोकतंत्र को जमीनी स्तर तक सशक्त किया है.

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की सराहना करते हुए उपराष्ट्रपति ने इसे एक “गेम-चेंजर” बताया. उन्होंने कहा, “तीन दशकों के बाद भारत को एक नई शिक्षा नीति मिली है, जिसका उद्देश्य छात्रों को केवल पुस्तकों और डिग्रियों के बोझ से मुक्त करना और उन्हें कौशलयुक्त बनाना है. यह नीति भारत को 2047 तक विकसित भारत के रूप में स्थापित करने में मदद करेगी.”

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