महाकुम्भ नगर. महाकुंभ मेले में विभिन्न अखाड़ों का मौनी अमावस्या पर्व पर अमृत स्नान बुधवार शाम तक संपन्न हो गया. एक अधिकारी ने यह जानकारी दी. मंगलवार देर रात संगम क्षेत्र के पास भगदड़ की घटना के कारण अखाड़ों का अमृत स्नान सुबह टल गया था और भीड़ नियंत्रित होने के बाद दोपहर में फिर से शुरू हुआ था.
मेला प्रशासन के एक अधिकारी ने बताया कि यह पहला मौका था जब साधु-संतों, नागा संन्यासी और अखाड़ों ने संगम में ऐतिहासिक प्रथम स्नान की प्रतिज्ञा तोड़ कर परिस्थिति को देखते हुए ब्रह्म मुहूर्त के अमृत स्नान को स्थगित कर श्रद्धालुओं को पहले स्नान का अवसर दिया.
उन्होंने बताया कि परंपरा के मुताबिक, सन्यासी अखाड़ों ने सबसे पहले अमृत स्नान किया, जिसमें महानिर्वाणी, अटल, निरंजनी, आनंद, जूना, आवाहन और पंच अग्नि अखाड़ों के साधु संत शामिस हैं. अधिकारी ने बताया कि इसके बाद बैरागी संप्रदाय के पंच निर्वाणी अनी अखाड़ा, पंच दिगंबर, पंच निर्मोही अनी अखाड़े के साधु संतों ने अमृत स्नान किया. उन्होंने बताया कि अगले क्रम में उदासीन संप्रदाय के नया उदासीन, बड़ा उदासीन और निर्मल अखाड़े के साधु संतों ने स्नान किया. अधिकारी ने बताया कि दोपहर में स्नान के दौरान हेलीकॉप्टर से श्रद्धालुओं पर पुष्प वर्षा भी की गई.
एक संत ने बताया कि अखाड़ों के साधु संतों में अमृत स्नान को लेकर पहले जैसा उत्साह नहीं दिखा क्योंकि भगदड़ की घटना से सभी साधु संत व्यथित हैं. हालांकि अखाड़ों के महंत, श्रीमहंत और पीठाधीश्वर अपने पारंपरिक जुलूस, धर्मध्वजा और आराध्य देव की पालकी के साथ अमृत स्नान के लिए पहुंचे.
अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रवींद्र पुरी ने बुधवार को सुबह कहा था कि महाकुंभ में भगदड़ को देखते हुए संतों ने मौनी अमावस्या का अमृत स्नान सुबह टाल दिया था लेकिन भीड़ कम होने पर अखाड़े अमृत स्नान करेंगे. महाकुंभ के दूसरे अमृत स्नान पर्व मौनी अमावस्या पर देश के तीन पीठों के शंकराचार्यों श्रृंगेरी शारदा पीठाधीश्वर जगतगुरू शंकराचार्य स्वामी विधु शेखर भारती जी, द्वारका शारदा पीठाधीश्वर जगतगुरू शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती जी और ज्योतिष पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी ने एक साथ अमृत स्नान किया. ज्योतिष पीठाधीश्वर शिविर के प्रभारी मुकुंदानंद ब्रह्मचारी ने बताया कि तीनों पीठ के शंकराचार्य मोटर बोट से त्रिवेणी संगम पहुंचे, जहां पूरे धार्मिक विधि विधान से तीनों ने संगम में डुबकी लगाई.
अखाड़ा परिषद ने भगदड़ को बताया ‘विपक्ष की साजिश’
अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद ने भगदड़ को विपक्ष की ‘साजिश’ करार देते हुए इसे ‘जांच का विषय’ बताया. अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रवींद्र पुरी ने संवाददाताओं को बताया, “साधु-महात्माओं और नागा संन्यासियों सहित सभी ने स्नान किया. इसके लिये माननीय मुख्यमंत्री जी (योगी आदित्यनाथ) को बहुत-बहुत बधाई देना चाहता हूं. हमारे मेला प्रशासन को भी बहुत-बहुत साधुवाद.” पुरी ने भगदड़ के बाद की स्थिति की तरफ इशारा करते हुए कहा, “मैं समझता हूं कि आज का स्नान करना बहुत मुश्किल हो चुका था.” उन्होंने हालांकि यह भी कहा, “चाहे सुबह हो या शाम क्योंकि आज अमावस का स्नान है. आज रात का स्नान बहुत अच्छा स्नान है.”
पुरी ने महाकुम्भ के प्रबंधन की बागडोर सेना को सौंपने की समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव की मांग के बारे में कहा, “मैं समझता हूं कि यह विपक्ष की साजिश होगी. यह जांच का विषय है कि कहीं विपक्ष ने ही तो नहीं कुछ ऐसा किया जिसके कारण यह सब कुछ हुआ.” उन्होंने कहा, “विपक्ष आज से ही नहीं बल्कि जब से मेला शुरू हुआ था तब से हमारे पीछे लगा हुआ था. उनका कहना था कि मेला भूमि वक्फ बोर्ड की है. उनका यह कहना था कि गंगा में स्नान करना पाप होता है. गंगा में स्नान करने से बीमारी होती है. इसलिये मुझे शंका होती है कि कहीं ये विपक्ष की ही चाल तो नहीं.” एक संत ने बताया कि अमृत स्नान के लिए क्रम में सबसे पहले श्री पंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी और श्री शंभू पंचायती अटल अखाड़ा के साधु सन्यासियों ने अमृत स्नान किया. उन्होंने बताया कि उसके बाद श्री निरंजनी अखाड़ा के साधु संतों ने स्नान किया.
इस बीच, श्रंगेरी पीठाधीश्वर जगद्गुरु स्वामी विदुशेखर भारती ने ‘पीटीआई-वीडियो’ सेवा से कहा, “इस पवित्र मौनी अमावस्या के दिन हम यहां संगम पर स्नान करने आये हैं. पूरी दुनिया में सनातन धर्म का यह संदर्भ सबसे बड़ा है. इसमें करोड़ों लोग यहां आ रहे हैं. ऐसे पवित्र संदर्भ को हम सनातन धर्म परम्परा के अतिरिक्त हम कहीं भी नहीं देख सकते हैं. हमारे साथ द्वारका और बद्री के शंकराचार्य जी भी उपस्थित हैं. हम तीनों अभी स्नान करने जा रहे हैं.”