नयी दिल्ली. कांग्रेस ने रविवार को इंडोनेशिया में भारत के एक वरिष्ठ सैन्य अधिकारी की कथित टिप्पणी का हवाला देते हुए कहा कि भारतीय वायु सेना को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान पाकिस्तान के हाथों अपने लड़ाकू विमानों का नुकसान उठाना पड़ा. कांग्रेस ने सरकार पर इस मामले में देश को ”गुमराह” करने का आरोप लगाया.
पार्टी ने यह भी पूछा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी विपक्ष को विश्वास में लेने के लिए सर्वदलीय बैठक की अध्यक्षता करने से क्यों इनकार कर रहे हैं और संसद के विशेष सत्र की मांग क्यों खारिज कर दी गई? कांग्रेस महासचिव और संचार प्रभारी जयराम रमेश ने ‘एक्स’ पर एक मीडिया रिपोर्ट साझा की, जिसमें कैप्टन शिवकुमार (भारतीय नौसेना) के हाल ही में इंडोनेशिया में दिए गए एक संबोधन का हवाला दिया गया है.
कैप्टन शिवकुमार ने कथित तौर पर इंडोनेशिया में एक सम्मेलन के दौरान कहा है कि भारतीय वायु सेना को सात मई, 2025 की रात को पाकिस्तान में आतंकवादियों के ठिकानों को निशाना बनाने के दौरान लड़ाकू विमानों का नुकसान उठाना पड़ा था. हालांकि, इंडोनेशिया स्थित भारतीय दूतावास ने रविवार को ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि रक्षा अताशे की टिप्पणी को ”संदर्भ से इतर उद्धृत किया गया है और मीडिया रिपोर्ट उनके द्वारा दिए गए बयान के उद्देश्य और महत्व को गलत तरीके से प्रस्तुत करती है.” इसमें कहा गया, ”टिप्पणी में बताया गया कि भारतीय सशस्त्र बल, हमारे पड़ोस के कुछ अन्य देशों के विपरीत, नागरिक राजनीतिक नेतृत्व के अधीन काम करते हैं. यह भी बताया गया कि ऑपरेशन सिंदूर का उद्देश्य आतंकवादी बुनियादी ढांचे को निशाना बनाना था और भारतीय कार्रवाई उकसावे वाली नहीं थी.”
रमेश ने ‘एक्स’ पर अपने पोस्ट में कहा, ”पहले, प्रमुख रक्षा अध्यक्ष (सीडीएस) सिंगापुर में महत्वपूर्ण खुलासे करते हैं. फिर एक वरिष्ठ रक्षा अधिकारी इंडोनेशिया में ऐसे ही दावे करते हैं.” कांग्रेस नेता ने कहा, ”लेकिन प्रधानमंत्री सर्वदलीय बैठक की अध्यक्षता करने और विपक्ष को विश्वास में लेने से क्यों इनकार कर रहे हैं? संसद के विशेष सत्र की मांग को क्यों खारिज कर दिया गया?” इसी मीडिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए कांग्रेस के मीडिया और प्रचार विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा ने आरोप लगाया, ”मोदी सरकार ने शुरू से ही देश को गुमराह किया है. सरकार ऑपरेशन सिंदूर के दौरान विमानों के नुकसान का खुलासा करने में विफल रही है.”
उन्होंने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ”वायु अभियान के महानिदेशक (एयर मार्शल अवधेश कुमार भारती) ने प्रेसवार्ता के दौरान 6-7 मई को हवाई युद्ध में हुए नुकसान का अप्रत्यक्ष संदर्भ दिया था, जब उन्होंने कहा था – ‘हम युद्ध की स्थिति में हैं और नुकसान युद्ध का एक हिस्सा है’.” खेड़ा ने कहा, ”इसके बाद, सिंगापुर में शांगरी-ला वार्ता के दौरान ब्लूमबर्ग टीवी से बात करते हुए सीडीएस जनरल अनिल चौहान ने हवाई क्षेत्र में हुए हमारे नुकसान की पहली आधिकारिक स्वीकारोक्ति की.” कांग्रेस नेता ने कहा, ”और अब, कैप्टन शिव कुमार द्वारा किए गए एक और चौंकाने वाले खुलासे से यह बात सामने आई है कि भारतीय वायुसेना को सात मई, 2025 की रात को पाकिस्तान के आतंकी ठिकानों को निशाना बनाने के दौरान अपने लड़ाकू विमान पाकिस्तान के हाथों खोने पड़े.”
कांग्रेस ने सरिस्का अभयारण्य की सीमा ‘पुन: निर्धारित’ करने की योजना को लेकर भाजपा पर निशाना साधा
कांग्रेस ने 50 से अधिक खनन गतिविधियों को फिर से शुरू करने के लिए सरिस्का बाघ अभयारण्य की सीमाओं को पुन: निर्धारित करने की कथित योजना को लेकर रविवार को केंद्र और राजस्थान सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि यह कदम “पारिस्थितिक रूप से विनाशकारी” होगा.
विपक्षी दल कांग्रेस ने यह भी कहा कि केंद्रीय पर्यावरण मंत्री अलवर से हैं और राजस्थान के पर्यावरण मंत्री भी वहीं से आते हैं, ऐसे में यह ‘डबल इंजन’ सरकार ऐसे कदम का समर्थन नहीं कर सकती. कांग्रेस महासचिव (संचार प्रभारी) जयराम रमेश ने ‘एक्स’ पर एक मीडिया रिपोर्ट साझा की, जिसमें दावा किया गया है कि राजस्थान के सरिस्का बाघ अभयारण्य की सीमाओं को पुन? निर्धारित करने की योजना मंजूरी के करीब पहुंच रही है. उन्होंने कहा कि इससे 50 से अधिक खनन गतिविधियों को पुन? शुरू करने का रास्ता साफ हो जाएगा, जिन्हें पहले उच्चतम न्यायालय ने बंद करने का आदेश दिया था. इन दावों पर केंद्र या राजस्थान सरकार की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं आई. रमेश ने कहा कि अलवर के निकट सरिस्का बाघ अभयारण्य पुनरुद्धार का एक उत्कृष्ट उदाहरण है.
उन्होंने लिखा, ”अति-सक्रिय अवैध शिकार नेटवर्क के कारण दिसंबर 2004 तक सरिस्का में बाघों की संख्या शून्य हो गई थी. इससे पूरे देश में हड़कंप मच गया था इसके चलते अप्रैल 2005 में ‘टाइगर टास्क फोर्स’ का गठन किया गया, इसके बाद मई 2005 में रणथंभौर बाघ अभयारण्य में डॉ. मनमोहन सिंह ने विभिन्न राज्यों के मुख्य वन्यजीव अधिकारियों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की.” उन्होंने कहा कि इसके फलस्वरूप दिसंबर 2005 में राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) और जून 2007 में ‘वाइल्डलाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो’ अस्तित्व में आया.
रमेश ने कहा कि इसके बाद पन्ना बाघ अभयारण्य के साथ-साथ सरिस्का में भी बाघों को दोबारा बसाने की प्रक्रिया शुरू की गई -हालांकि शुरुआत में कुछ विशेषज्ञों ने इस पर संदेह भी जताया था, लेकिन आज सरिस्का में बाघों की संख्या 48 तक पहुंच गई है, जो अपने आप में एक ऐतिहासिक उपलब्धि है.
कांग्रेस महासचिव ने कहा, ”अब अभयारण्य की सीमा को बदलने की तैयारी की जा रही है. इससे इस क्षेत्र की वे 50 खनन कंपनियां, जो पहले बंद हो चुकी थीं, फिर से खनन शुरू कर सकती हैं.” उन्होंने कहा कि बाघ अभयारण्यों के सतत प्रबंधन में स्थानीय समुदायों की पूर्ण भागीदारी आवश्यक है और यह कहने की आवश्यकता नहीं है.
रमेश ने कहा, ”50 खदानों (संगमरमर, डोलोमाइट, चूना पत्थर और मेसोनिक पत्थर) और दूसरी खदानों को दोबारा शुरू करने से बाघों का रहवास, जो बड़ी मेहनत से वापस बना है, फिर से खतरे में पड़ जाएगा.” उन्होंने दावा किया कि इससे बाघों के रहने की जगह टुकड़ों में बंट जाएगी. इसकी भरपाई के लिए जो ”बफर जोन” में नए इलाके जोड़ने की बात की जा रही है, वो कागज पर तो सही लग सकती है लेकिन असल में यह बाघों के पारिस्थितिकी लिए विनाशकारी होगा, खासतौर पर तब जब बाघों की आबादी पहले ही सीमित है.
कांग्रेस महासचिव ने कहा, ”केंद्रीय पर्यावरण मंत्री अलवर से हैं और राजस्थान के पर्यावरण मंत्री भी वहीं से आते हैं. क्या वाकई यह ‘डबल इंजन’ सरकार खनन मालिकों को फायदा पहुंचाने के लिए बाघ कॉरिडोर के इस विघटन का समर्थन कर रही है?” रमेश ने कहा कि अंतत? उच्चतम न्यायालय को इस मामले में हस्तक्षेप करना ही होगा क्योंकि उसके निर्देशों का उल्लंघन किया जा रहा है.