नयी दिल्ली. राज्यसभा में बुधवार को कांग्रेस सहित विपक्ष के सदस्यों ने ऑपरेशन सिंदूर पर हुई चर्चा का प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा जवाब नहीं दिये जाने को सदन का अपमान बताया और इसके विरोध में सदन से बहिर्गमन किया. उच्च सदन में पहलगाम हमले और ऑपरेशन सिंदूर पर करीब 16 घंटे तक चली विशेष चर्चा का जवाब देने के लिए गृह मंत्री अमित शाह जब खड़े हुए तो विपक्षी सदस्यों ने इस बात को लेकर हंगामा और नारेबाजी शुरू कर दी कि जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने एक सदन में जवाब दिया तो वह उच्च सदन में जवाब देने के लिए क्यों नहीं आये? शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री यहां अपने कार्यालय में ही हैं. उन्होंने कहा, ”मेरे से जब निबट रहा है तो काहे को प्रधानमंत्री जी को बुला रहे हो. और तकलीफ होगी.”
हंगामे के बीच नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि 16 घंटे की चर्चा के बाद सभी सदस्यों को उम्मीद थी कि प्रधानमंत्री चर्चा में उठाये गये सवालों का जवाब देंगे. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री संसद में रहकर यहां नहीं आते हैं तो यह सदन का अपमान है. इस पर उपसभापति हरिवंश ने कहा कि उन्होंने कार्य मंत्रणा समिति में पहले ही यह बता दिया था कि चर्चा में प्रधानमंत्री हस्तक्षेप नहीं करेंगे और गृह मंत्री जवाब देंगे. इसके बाद विपक्षी सदस्यों ने सदन से वाक आउट किया.
आपरेशन सिंदूर : राज्यसभा में कांग्रेस व विपक्ष ने एक-दूसरे पर साधा निशाना
राज्यसभा में बुधवार को विपक्षी सदस्यों ने ऑपरेशन सिंदूर को लेकर सरकार पर निशाना साधा और कांग्रेस सदस्य अखिलेश प्रसाद सिंह ने आरोप लगाया कि इस अभियान के दौरान सुरक्षा बलों द्वारा हासिल बढ.त को राजनीतिक नेतृत्व ने गंवा दिया. वहीं भाजपा सदस्य के. लक्ष्मण ने आतंकवादियों के खिलाफ कार्रवाई के ‘सबूत’ मांगने का आरोप लगाया. सदस्य राज्यसभा में ”पहलगाम में आतंकवादी हमले के जवाब में भारत के मजबूत, सफल एवं निर्णायक ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर विशेष चर्चा” में भाग ले रहे थे.
सिंह ने कहा कि देश के राजनीतिक नेतृत्व ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान बलों द्वारा हासिल की गयी बढ.त को गंवा दिया. उन्होंने विदेश मंत्री एस जयशंकर पर भी निशाना साधा और आरोप लगाया कि उन्होंने विमर्श को बदलने की कोशिश की. कांग्रेस सदस्य ने कहा कि सरकार के मंत्रियों के बयानों का सत्य से कोई संबंध नहीं है. उन्होंने कहा कि सुरक्षा बलों ने अद्वितीय साहस दिखाया और हर भारतीय को उन पर गर्व है लेकिन ऑपरेशन सिंदूर के दौरान बलों द्वारा प्राप्त बढ.त को राजनीतिक नेतृत्व ने खो दिया. चर्चा में भाग लेते हुए लक्ष्मण ने विपक्ष पर हमला बोला. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर भरोसा नहीं करने के लिए विपक्ष पर निशाना साधा और कहा कि मोदी को तीन बार भारत के लोगों का विश्वास मिला है.
भाजपा सदस्य ने कहा, ”उन्होंने र्सिजकल स्ट्राइक के बाद सबूत मांगे, उन्होंने पुलवामा के बाद सबूत मांगे, अब वे संघर्ष विराम को लेकर सवाल कर रहे हैं … उन्हें अपनी सरकार से ज्यादा (अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड) ट्रंप पर भरोसा है.” भाजपा सदस्य गुलाम अली ने कांग्रेस, नेकां और अन्य स्थानीय दलों पर “छद्म धर्मनिरपेक्षता” में शामिल होने का आरोप लगाया, और कहा कि अब विमर्श को बदला जा रहा है. उन्होंने कहा “पिछले 30 वर्षों में, सेनाओं के लोगों ने अपनी जान गंवायी है… उन्होंने कभी किसी भी स्कूल का नाम शहीदों के बाद नहीं रखा.”
उन्होंने कश्मीर में “जनमत संग्रह” की बात कहने के लिए पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की आलोचना की.
निर्दलीय कार्तिकेय शर्मा ने कहा कि बहस का उद्देश्य देश को भारत के साहस के बारे में बताना था. उन्होंने कहा कि यह एक सभ्य राष्ट्र द्वारा दी गयी चेतावनी थी, इस देश में बुद्ध और परशुराम दोनों हैं. उन्होंने कहा, “धैर्य रखना हमारी संस्कृति है, लेकिन अगर वे हमें उकसाते हैं, तो उन्हें बड़ी कीमत चुकानी होगी. 23 मिनट में, भारत ने आतंकवाद के वर्षों का बदला लिया.”