नयी दिल्ली. बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) सहित विभिन्न मुद्दों पर विपक्षी सदस्यों के हंगामे के कारण राज्यसभा की बैठक बृहस्पतिवार को तीन बार के स्थगन के बाद अपराह्न चार बज कर 45 मिनट पर दिन भर के लिए स्थगित कर दी गई.
पूर्वाह्न 11 बजे उच्च सदन की बैठक शुरू होने पर उपसभापति हरिवंश ने आवश्यक दस्तावेज पटल पर रखवाए. इसके बाद उपसभापति ने भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) और अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा की साझेदारी के तहत बुधवार को जीएसएलवी रॉकेट से ‘निसार’ उपग्रह को कक्षा में स्थापित किये जाने का जिक्र किया.
उपसभापति ने इसरो से संबद्ध वैज्ञानिकों, अधिकारियों और अन्य सभी लोगों तथा नासा की समन्वय टीम को सदन और पूरे देश की ओर से बधाई दी. इसके बाद हरिवंश ने सदस्यों ने शून्यकाल तथा प्रश्नकाल चलने देने का अनुरोध करते हुए कहा कि सत्र की शुरूआत से गतिरोध के कारण करीब 30 घंटे का समय बर्बाद हो चुका है.
उन्होंने बताया कि उन्हें नियम 267 के तहत 28 नोटिस मिले हैं जिनमें बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण, ओडिशा में महिलाओं और बच्चों के कथित उत्पीड़न, बंगाली कामगारों के साथ दूसरे राज्यों में कथित दुर्व्यवहार, छत्तीसगढ़ में दो ननों की गिरफ्तारी, अमेरिका द्वारा भारत पर लगाए गए 25 फीसदी कर के दुष्प्रभाव तथा उपराष्ट्रपति पद से जगदीप धनखड़ के अचानक इस्तीफे के मुद्दे पर नियत कामकाज स्थगित कर तत्काल चर्चा कराए जाने की मांग की गई है.
उपसभापति ने कहा कि ये नोटिस आसन द्वारा पूर्व में दी गई व्यवस्था के अनुरूप नहीं हैं, इसलिए इन्हें स्वीकार नहीं किया जा सकता. नोटिस स्वीकार नहीं किए जाने पर विपक्षी सदस्यों ने विरोध जताया और हंगामा करने लगे. हरिवंश ने हंगामे को देखते हुए 11 बजकर 15 मिनट पर बैठक को दोपहर बारह बजे तक के लिए स्थगित कर दिया. एक बार के स्थगन के बाद दोपहर 12 बजे सदन की कार्यवाही पुन: शुरू होते ही विपक्षी दलों के सदस्यों ने बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के मुद्दे पर चर्चा की अपनी मांग दोहराई और हंगामा करने लगे.
इसी दौरान सदन के नेता जे पी नड्डा ने कहा कि बुधवार को सदन में जब गृह मंत्री ने ऑपरेशन सिंदूर पर हुई चर्चा का जवाब देना शुरू किया, तो कुछ विपक्षी दलों के सदस्य सदन से बहिर्गमन कर गए. उन्होंने दिसंबर 2008 में, मुंबई में हुए आतंकवादी हमले के बाद दोनों सदनों की कार्यवाही की ओर सदस्यों का ध्यान आर्किषत करते हुए कहा कि तत्कालीन गृह मंत्री और प्रधानमंत्री ने लोकसभा में आतंकवाद पर हुई बहस का जवाब दिया था और तत्कालीन गृह मंत्री ने राज्यसभा में चर्चा का जवाब दिया था. नड्डा ने कहा कि उन्होंने कार्य मंत्रणा समिति की बैठक के दौरान ही यह स्पष्ट कर दिया था कि यह तय करना सरकार का विशेषाधिकार है कि उसकी ओर से कौन बोलेगा.
उन्होंने कहा, “इसलिए कल विपक्षी दलों की मांग स्पष्ट रूप से अनुचित थी और यह उनके दोहरे मानदंडों को दर्शाती है.” इस बीच कुछ सदस्य नारे लगाते हुए आसन के समीप आ गए. हंगामे के चलते पीठासीन अध्यक्ष घनश्याम तिवाड़ी ने सदन की कार्यवाही तीन मिनट के भीतर ही दोपहर दो बजे तक के लिए स्थगित कर दी. दो बार के स्थगन के बाद दोपहर दो बजे उच्च सदन की बैठक पुन: शुरू हुई तो नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि सदन के नेता नड्डा कह चुके हैं कि 2008 में मुंबई में ऐसी घटना होने के बाद सदन में जब चर्चा हुई थी तो उस समय प्रधानमंत्री ने नहीं, बल्कि गृह मंत्री ने जवाब दिया था.
खरगे ने कहा कि वह इस तथ्य को मानते हैं किंतु यहां सवाल इस बात का नहीं है कि चर्चा का जवाब कौन देगा. उन्होंने कहा, ”हमारा विरोध (गृहमंत्री अमित शाह की) इस बात से था कि मैं अकेला सबसे निबट लूंगा.” गौरतलब है कि पहलगाम हमले और उसके बाद हुए ऑपरेशन सिंदूर को लेकर उच्च सदन में करीब 16 घंटे तक चली चर्चा का जवाब देने के लिए बुधवार को जब शाह खड़े हुए तो विपक्ष के सदस्यों ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा जवाब नहीं देने को लेकर भारी विरोध जताया और नारेबाजी की थी. उसी समय शाह ने कहा था, ”मेरे से जब निबट रहा है तो काहे को प्रधानमंत्री जी को बुला रहे हो. और तकलीफ होगी.” कल नेता प्रतिपक्ष ने शाह की इस टिप्पणी को पूरे सदन का अपमान बताते हुए विपक्षी सदस्यों के साथ बहिर्गमन किया था.
इसी टिप्पणी की ओर संकेत करते हुए खरगे ने आज कहा कि वह (शाह) अक्सर यह भी कहते हैं, ”मैं आप सभी पर भारी हूं…तुम भारी हो पर हम डबल भारी हैं.” इसके बाद संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू ने कहा कि कल विपक्षी सदस्य सदन में इसी बात को लेकर नारेबाजी कर रहे थे कि प्रधानमंत्री चर्चा का जवाब देने के लिए क्यों नहीं आये. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने मंगलवार को एक घंटे 42 मिनट तक लोकसभा में इसी विषय पर चर्चा का जवाब दिया था. उन्होंने कहा कि कल गृहमंत्री ने उच्च सदन में चर्चा का पूरा जवाब दिया और वह इस चर्चा का जवाब देने में पूरी तरह से सक्षम हैं.
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में पूरे मंत्रिमंडल की सामूहिक जिम्मेदारी होती है और चर्चा का जवाब कौन देगा, यह सरकार तय करती है, कोई अन्य तय नहीं कर सकता. इसके बाद जब विपक्षी सदस्य हंगामा करने लगे तब पीठासीन अध्यक्ष सस्मित पात्रा ने बैठक को अपराह्न साढ़े चार बजे तक के लिए स्थगित कर दिया.
तीन बार के स्थगन के बाद अपराह्न साढ़े चार बजे बैठक शुरू होने पर भी सदन में विपक्षी सदस्यों का हंगामा जारी रहा. हंगामे के बीच ही वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने एक बयान दिया और कहा कि अमेरिका द्वारा भारत पर लगाए गए आयात शुल्क (टैरिफ) के प्रभावों का आकलन किया जा रहा है तथा राष्ट्रीय हितों को सुरक्षित करने और आगे बढ़ाने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जाएंगे. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत से आयातित वस्तुओं पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त आयात शुल्क और जुर्माना लगाने की बुधवार को घोषणा की.
गोयल ने कहा, ”सरकार हमारे किसानों, श्रमिकों, उद्यमियों, निर्यातकों, एमएसएमई और उद्योग जगत के सभी हितधारकों की रक्षा और संवर्धन को सर्वोच्च महत्व देती है. हम अपने राष्ट्रीय हितों को सुरक्षित करने और आगे बढ़ाने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाएंगे.” उनका बयान समाप्त होने के बाद विपक्ष के कई सदस्य स्पष्टीकरण की मांग करने लगे. उपसभापति हरिवंश ने सदन के नियमों का हवाला देते हुए इसकी अनुमति नहीं दी. इस बीच विपक्षी सदस्यों का हंगामा जारी रहा और उपसभापति ने अपराह्न चार बज कर 45 मिनट पर बैठक दिन भर के लिए स्थगित कर दी.