अधिकतर समस्याओं की जड़ RSS, देश का दुर्भाग्य है कि उसके कार्यकर्ता सरकार चला रहे हैं: कांग्रेस

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Wed, 01 Oct 2025 07:40 PM
अधिकतर समस्याओं की जड़ RSS, देश का दुर्भाग्य है कि उसके कार्यकर्ता सरकार चला रहे हैं: कांग्रेस
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नयी दिल्ली. कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की सराहना किए जाने के बाद बुधवार को दावा किया कि देश की अधिकतर समस्याओं की जड़ आरएसएस है तथा यह भारत का दुर्भाग्य है कि इस संगठन के कार्यकर्ता सरकार चला रहे हैं. मुख्य विपक्षी दल ने यह भी कहा कि बीते 100 साल में आरएसएस ने एक भी काम ऐसा नहीं किया है, जिससे देश को नुकसान के अलावा कोई फायदा हुआ हो.

पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने महात्मा गांधी की हत्या के कुछ महीने बाद 18 जुलाई, 1948 को देश के तत्कालीन गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल द्वारा श्यामा प्रसाद मुखर्जी को लिखे गए उस पत्र का हवाला दिया, जिसमें कहा गया था कि ”आरएसएस की गतिविधियां सरकार एवं राष्ट्र के लिए खतरा हैं.” दरअसल, आरएसएस ने कई मौकों पर स्पष्ट किया है कि महात्मा गांधी की हत्या से उसका कोई संबंध नहीं था.

प्रधानमंत्री मोदी ने बुधवार को कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ समाज के विभिन्न वर्गों के साथ मिलकर काम करता है, लेकिन इसकी विभिन्न शाखाओं के बीच कभी अंर्तिवरोध नहीं होता क्योंकि ये सभी ‘राष्ट्र प्रथम’ के सिद्धांत पर काम करते हैं. आरएसएस की स्थापना के 100 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में एक डाक टिकट जारी करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि संघ के स्वयंसेवक राष्ट्र की सेवा और समाज को सशक्त बनाने के लिए अथक प्रयास करते रहे हैं.

जयराम रमेश ने सरदार पटेल के पत्रों से संबंधित पुस्तक का एक अंश ‘एक्स’ पर साझा करते कहा, ” प्रधानमंत्री ने आज सुबह आरएसएस के बारे में बहुत कुछ बोला है. क्या उन्हें इस बात की भी जानकारी है कि सरदार पटेल ने 18 जुलाई 1948 को डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को (पत्र में) क्या लिखा था?’ कांग्रेस ने अपने आधिकारिक ‘एक्स’ हैंडल से पोस्ट किया, ”आरएसएस देश को बांटने वाला संगठन. आजादी की लड़ाई के वक्त जिसके नेता न जेल गए, न अंग्रेजों ने उन पर कभी प्रतिबंध लगाया. 1942 में अंग्रेजों के खिलाफ शुरू हुए ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ में जब पूरा देश जेल जा रहा था, तब आरएसएस इस आंदोलन को दबाने में अंग्रेजों की मदद कर रहा था.”

उसने दावा किया, ”वो संगठन, जिसने हिंदुओं और मुस्लिमों का सांप्रदायिक विभाजन कर, देश को दो टुकड़ों में बांटकर खोखला कर दिया. वो संगठन- जिसके हाथ महात्मा गांधी के खून से लाल हैं, वो संगठन, जिसके तथाकथित वीर अंग्रेजों के मुखबिर रहे हैं, उस संगठन का नाम है, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ…बीते 100 साल में इन्होंने एक भी काम ऐसा नहीं किया है, जिससे देश को नुकसान छोड़ कोई फायदा हुआ हो.” कांग्रेस का कहना है, ”यह हमारे देश का दुर्भाग्य है कि यहां आरएसएस जैसे सांप्रदायिक और नफरती संगठन के कार्यकर्ता सीधे तौर पर सरकार चला रहे हैं. जो लोग संविधान की जगह शुरू से मनुस्मृति की वकालत करते रहे हैं, अब वही लोग हमारे देश में मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री बन रहे हैं. ऐसे में उनसे सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक न्याय की उम्मीद कैसे की जा सकती है.”

उसने दावा किया, ”अगर ये कहा जाए कि देश में अधिकतर समस्याओं की जड़ आरएसएस है तो अतिश्योक्ति नहीं होगी. जिस दिन ये संगठन देश में आग लगाकर देश को खोखला करना बंद कर दे, उसी दिन आधी से ज्यादा समस्याएं निपट जाएंगी.” कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ”तो क्या अब दिल्ली के स्कूलों में पाठ्यक्रम के तौर पर आरएसएस प­ढ़ाया जाएगा? आगे क्या होगा – नाथूराम गोडसे को “देशभक्त” के रूप में प­ढ़ाया जाएगा?”

उन्होंने दावा किया, ”आरएसएस इतिहास को फिर से लिखना चाहता है क्योंकि उसके पास कोई इतिहास नहीं है. वह 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में अनुपस्थित रहा, अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष में अनुपस्थित रहा, लेकिन महात्मा गांधी की गोली मारकर हत्या के समय मौजूद था.” कांग्रेस सांसद ने तंज कसते हुए कहा, ”अगर बच्चों को ”स्वतंत्रता संग्राम में आरएसएस की भूमिका” प­ढ़ाई जाए, तो क्या अध्याय में सिफ.र् यह लिखा होगा: यह पृष्ठ जानबूझकर खाली छोड़ा गया है?” टैगोर ने कहा, ”हमारे बच्चे इतिहास के हकदार हैं, प्रचार के नहीं. शिक्षा, विचारधारा का प्रचार नहीं. विज्ञान, अंधविश्वास नहीं. दिल्ली के स्कूलों को सच प­ढ़ाना चाहिए, आरएसएस का झूठ नहीं.”

आरएसएस पर सिक्का और डाक टिकट जारी करना संविधान का अपमान: माकपा

मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने बुधवार को दावा किया कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की स्थापना की शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में डाक टिकट और सिक्का जारी करना संविधान पर “गंभीर चोट और उसका अपमान” है. माकपा के पोलित ब्यूरो ने कहा कि यह बेहद आपत्तिजनक है कि एक आधिकारिक सिक्के पर आरएसएस द्वारा प्रचारित हिंदू देवी ‘भारत माता’ की छवि अंकित है तथा 1963 के गणतंत्र दिवस परेड में वर्दीधारी आरएसएस स्वयंसेवकों को दिखाने वाला डाक टिकट भी गलत इतिहास को दर्शाना है.

वामपंथी पार्टी ने कहा, ”आरएसएस की स्थापना की 100वीं वर्षगांठ मनाने के लिए प्रधानमंत्री द्वारा डाक टिकट और 100 रुपये का सिक्का जारी करना भारत के संविधान पर एक गंभीर चोट और अपमान है जिसे आरएसएस ने कभी स्वीकार नहीं किया.” बयान में कहा गया है, “यह बेहद आपत्तिजनक है कि एक आधिकारिक सिक्के पर एक ऐसी देवी की ‘भारत माता’ के रूप में छवि अंकित हो, जिसे आरएसएस अपने हिंदुत्ववादी राष्ट्र की सांप्रदायिक अवधारणा के प्रतीक के रूप में प्रचारित करता आया है.” प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आरएसएस की स्थापना के 100 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में बुधवार को एक विशेष डाक टिकट और एक स्मारक सिक्का जारी किया, जिसमें पहली बार भारतीय मुद्रा पर भारत माता की छवि अंकित है.

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