मराठों को आरक्षण दें, लेकिन ओबीसी की ‘थाली’ से नहीं: पंकजा मुंडे

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Thu, 02 Oct 2025 08:03 PM
मराठों को आरक्षण दें, लेकिन ओबीसी की ‘थाली’ से नहीं: पंकजा मुंडे

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छत्रपति संभाजीनगर. महाराष्ट्र सरकार में मंत्री पंकजा मुंडे ने मराठों को सरकारी नौकरियों और दाखिले में आरक्षण की बृहस्पतिवार को वकालत की. हालांकि, उन्होंने कहा कि मराठों को आरक्षण अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) की “थाली” से नहीं दिया जाना चाहिए, क्योंकि इस समुदाय के सदस्य पहले से ही “भूख से जूझ रहे” हैं. बीड जिले के सावरगांव घाट में दशहरा के अवसर पर आयोजित एक रैली को संबोधित करते हुए पंकजा ने कहा कि लोगों के दिमाग में मौजूद “जातिवाद के राक्षस” को नष्ट करने की जरूरत है.

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व वाली महाराष्ट्र सरकार ने हैदराबाद गजेटियर को लागू करने के लिए दो सितंबर को एक सरकारी आदेश (जीआर) जारी किया, जिससे मराठा समुदाय के पात्र सदस्य कुनबी जाति प्रमाण पत्र के लिए आवेदन कर सकेंगे. इससे प्रमाण पत्र जारी होने के बाद उक्त सदस्य ओबीसी श्रेणी के तहत आरक्षण का दावा कर पाएंगे. यह जीआर मराठा आरक्षण कार्यकर्ता मनोज जरांगे के मुंबई में 29 अगस्त से पांच दिन तक अनशन करने के बाद जारी किया गया था. हालांकि, इसे लेकर ओबीसी समुदाय के सदस्यों में नाराजगी फैल गई है, जो मराठों को ओबीसी श्रेणी में शामिल किए जाने का विरोध कर रहे हैं.

ओबीसी समुदाय से ताल्लुक रखने वाली पंकजा ने रैली में कहा, “गोपीनाथ मुंडे ने मराठा आरक्षण का समर्थन किया था और हम भी इसके पक्ष में हैं. लेकिन इसे हमारी थाली से मत छीनिए. मेरा समुदाय आज भूख से जूझ रहा है. लोगों का संघर्ष देखने के बाद मेरी नींद उड़ गई है.” उन्होंने कहा, “मैंने कभी भी उन लोगों की जाति पर ध्यान नहीं दिया, जिनके लिए मैंने चुनाव प्रचार किया. मैंने इसे नजरअंदाज किया और हमेशा मानवता को महत्व दिया.” पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन विभाग संभालने वाली पंकजा ने महाराष्ट्र के बा­ढ़ प्रभावित किसानों की मदद करने का वादा किया.

उन्होंने कहा, “राज्य भर के लोग बा­ढ़ और उसके कारण हुए नुकसान के बावजूद यहां (रैली में शामिल होने) आए. बा­ढ़ के बीच जाति की सीमाएं टूट गईं और लोग एक-दूसरे की मदद के लिए आगे आए. अब ऐसा समाज और नेतृत्व बनाने की जरूरत है. मैं मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ओर से वादा करती हूं कि सरकार किसानों के साथ खड़ी रहेगी और पूरे दिल से उनकी मदद करेगी.” पंकजा ने कहा कि देवी दुर्गा ने रक्तबीज जैसे राक्षसों का वध किया था.

उन्होंने कहा, “आज रक्तबीज जैसे राक्षस लोगों के दिमाग में पैदा हो रहे हैं. यह राक्षस जातिवाद का है. देवी दुर्गा मुझे इन राक्षसों का अंत करने की शक्ति दें. हमने बा­ढ़ के दौरान देखा कि विभिन्न समुदायों के लोग एक साथ आए और जरूरतमंदों की मदद की.” पंकजा ने लोगों से अपने आत्मसम्मान से समझौता न करने और असामाजिक तत्वों का समर्थन न करने का आग्रह किया. उन्होंने कहा, “चाहे मैं विपक्ष में रहूं या सरकार का हिस्सा, मैं आम लोगों के कल्याण के लिए योगदान देना कभी नहीं छोड़ूंगी.” पंकजा के रिश्ते के भाई और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के नेता धनंजय मुंडे भी रैली में मौजूद थे. उन्होंने ओबीसी समुदाय के हिस्से से मराठों को आरक्षण दिए जाने का विरोध किया.

धनंजय ने कहा, “हमें खुशी है कि मराठा समुदाय को आरक्षण मिला. उनमें से कुछ ओबीसी श्रेणी के तहत कोटा चाहते हैं… आपको एक समुदाय का कोटा ब­ढ़ाना चाहिए, लेकिन इसे किसी से लेकर किसी और को देना स्वीकार नहीं किया जाएगा.” रैली में मौजूद कुछ लोगों ने बीड में सरपंच हत्याकांड के मुख्य आरोपी और धनंजय के करीबी सहयोगी वाल्मिक कराड के पोस्टर लहराए. बीड में एक पवनचक्की परियोजना की स्थापना कर रही कंपनी से जबरन वसूली की कथित कोशिश को रोकने के लिए मसाजोग गांव के सरपंच संतोष देशमुख का पिछले साल नौ दिसंबर को अपहरण कर लिया गया, उन्हें प्रताड़ित किया गया और फिर उनकी हत्या कर दी गई.

यह हत्याकांड राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में रहा और कराड तथा कई अन्य लोगों की गिरफ्तारी के बाद विपक्ष और सत्तारू­ढ़ महायुति के सदस्यों ने फडणवीस सरकार से धनंजय के इस्तीफे की मांग की. पारली से राकांपा विधायक ने इस साल मार्च में इस्तीफा दे दिया.
रैली के वीडियो में कई लोग “मैं वाल्मीकि कराड का समर्थन करता हूं” लिखा पोस्टर लिए नजर आए. इस बीच, सामाजिक कार्यकर्ता अंजलि दमानिया ने ऐसे पोस्टर लहराए जाने की निंदा की. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार में मंत्री और भाजपा नेता पंकजा मुंडे को स्पष्ट करना चाहिए कि क्या उन्हें अपनी रैली में कराड के लिए “समर्थन” व्यक्त किए जाने से कोई आपत्ति नहीं है.

By Yogesh Kumar Sahu